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इंदौर: ज्योतिषाचार्य को ब्रेन डेड घोषित करने के बाद परिजनो ने किए अंगदान, लीवर से मिला महिला को जीवन, दूसरों के जीवन में उजाला करेंगी आंखें

Sat, 09 Apr 2022 06:00 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Sat, 09 Apr 2022 06:00 PM IST
सार

इंदौर में 74 वर्षीय ज्योतिषाचार्य संपराज कोचेटा (जैन) को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद परिजनों ने उनके अंगदान किए। लीवर, आंखे व त्वचा दान की गई। किडनी भी दान करनी थी लेकिन दान करने की स्थिति में नहीं थी।  

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Indore: After declaring Jyotishacharya brain dead, relatives donated organs, the woman got life from the liver, eyes will light up the lives of others
संपतराज कोचेटा (जैन) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कुछ लोग होते हैं जो जिंदगी जीते हुए तो लोगों को राह दिखाते हैं, मार्गदर्शन करते हैं लेकिन जिंदगी के बाद भी दूसरों के काम आते हैं। ऐसा ही कुछ उदाहरण पेश किया है ख्यात ज्योतिषाचार्य संपतराज कोचेटा (जैन) परिवार ने। उन्होंने अंगदान कर अनूठी मिसाल पेश की है।
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जानकारी के मुताबिक संपत जैन (74) को डॉक्टर्स ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इसके बाद परिजनों ने उनकी आंखें, त्वचा व लीवर दान की। किडनी भी दान करने की बात कही लेकिन वे ऐसी स्थिति में नहीं थी कि दान की जा सके। दरअसल संपतराज कोचेटा निवासी छोटा बांगड़दा को गुरुवार को ब्रेन हेमरेज के चलते  बारोड़ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने गुरुवार रात  और शुक्रवार सुबह जांच की। इसके बाद परिवार को बताया कि ब्रेन डेड है।  संपतराज जैन ख्यात ज्योतिषाचार्य थे और समाज में उनकी प्रतिष्ठा थी। डॉक्टरों द्वारा ब्रेन डेड बताए जाने पर परिवार ने सामाजिक संगठन मुस्कान ग्रुप के जीतू बगानी, संदीपन आर्य, अनिल गोरे व जयवंत निकम से संपर्क किया। हालांकि अंगदान की प्रक्रिया में लगने वाले समय के बारे में जानकर परिवार राजी नहीं हुआ। ऐसे में कोचेटा के नाती केतन  व पोती पद्मजा ने परिवार के लोगों को समझाया कि अंगदान में इतना समय लगता ही है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि इससे कुछ लोगों को नया जीवन मिलेगा। इस पर उनकी पत्नी चंद्रकला व परिवार के अन्य लोग शुक्रवार रात सहमत हो गए। शनिवार को लीवर इंदौर की महिला को दान किया गया। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई। आंखें दो लोगों के काम आएंगी। इनको शंकरा आई बैंक में रखा गया है जबकि त्वचा को त्वचा चोइथराम अस्पताल के स्किन बैंक में सहेजकर रखा है। इंदौर में अंगदान का यह 43वां मामला है। खास बात यह रही कि इसके लिए किसी तरह के ग्रीन कॉरिडोर बनाने की जरूरत नहीं पड़ी। शनिवार सुबह 9 बजे डॉक्टरों की टीम ने दो बार उनका परीक्षण किया। अंगदान के लिए जांच की गईं तो पता चला कि दोनों किडनियां दान करने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में आंखें, त्वचा व लीवर ही दान के लिए निकाले जा सके। 
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