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इंदौर: मां-बेटे की मौत के मामले में बस के ड्रायवर-कंडक्टर व अन्य के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज
Sat, 23 Apr 2022 05:31 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Sat, 23 Apr 2022 05:31 PM IST
सार
अशोका ट्रैवल्स की बस में बैठकर पुणे से इंदौर आ रहे मां-बेटे की मौत के मामले में पुलिस ने बस के चालक व कंडक्टर सहित साथी स्टाफ के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। शुरुआती जांच में लापरवाही की बात सामने आई है।
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पुलिस द्वारा जब्त की गई बस
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मां-बेटे की मौत के मामले में पुलिस ने बस के ड्रायवर, कंडक्टर और साथी स्टाफ के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। प्रथमदृष्ट्या लापरवाही सामने आने पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है। हालांकि बस के ड्रायवर ने कहा है कि उनकी कोई गलती नहीं है।
गौरतलब है कि पुणे से अशोका ट्रैवल्स में बैठकर उज्जैन निवासी शिक्षिका दीपिका पति संदीप (38) अपने बेटे आदित्यराज (11) व मां के साथ इंदौर आ रही थी। बस में दीपिका और आदित्यराज की तबीयत बिगड़ी और उल्टियां होने लगी। दोनों को इंदौर के अस्पताल में भर्ती करवाया गया लेकिन दोनों की मौत हो गई। इसके बाद मृतका के भाई ने बस के ड्रायवर कंडक्टर पर लापरवाही के आरोप लगाए थे। बताया था कि अगर समय पर बस रोक देते और उपचार मिल जाता तो जान बच जाती। आशंका जताई गई थी कि जिस एसी बस में बैठकर आ रहे थे उस बर्थ के ऊपर अग्निशमन यंत्र लगा था। इसमें से गैस रिसाव होने के कारण दम घुटा और मौत हो गई। इस मामले में परिजन और यात्रियों के प्राथमिक बयान व जांच के आधार पर पुलिस ने बस के ड्रायवर अनोखीलाल पिता रामनारायण शर्मा निवासी लोटस ग्रीन कॉलोनी मक्सी रोड , अशोक पिता मोहन सिंह निवासी ग्राम सादलपुर धार और क्लीनर ईश्वरलाल पिता राजाराम सोलंकी निवासी माकड़ोन उज्जैन के खिलाफ आईपीसी 304 और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा-34 के तहत केस दर्ज किया है।
ड्रायवर ने कहा-सात जगह रोकी थी बस
इस मामले में पुलिस ने बस को पहले ही जब्त कर लिया था। बस में लगे एसी की जांच करवाई थी। उसमें से गैस लीकेज जैसी बात सामने नहीं आई। जिस सीट प मां-बेटे बैठे थे वहां भी किसी तरह की कमी नहीं मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मां-बेटे के पेट में जहर की पुष्टि भी नहीं हुई। यह बात सामने आई कि लगातार उल्टियां होने से ह्रदय गति रूक गई थी जिस कारण मौत हो गई। दोनों के टिश्यू जांच के लिए भेजे गए हैं। मृतक दीपिका की मां पुष्पा व अन्य यात्रियों से पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि पुणे से बस में बैठने के दौरान ही मां-बेटे की तबीयत बिगड़ने लगी थी, लेकिन बस के स्टाफ के कर्मचारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि बस के ड्रायवर अशोक सिंह ने पुलिस बताया कि तीनों सवारी पुणे से 60 किमी आगे शिरूर से बैठी थी। तब उन्हें कोई तकलीफ नहीं थी। बस में सात डायबिटिक मरीज भी थे। उन्हें टॉयलेट के लिए अहमदनगर, शिर्डी सहित सात जगह बस रोकी। रात ढाई से तीन बजे पीछे की सीट से दो यात्री आए और उन्होंने मां-बेटे द्वारा उल्टियां करने की बात बताई, तब हमने जाकर पूछा तो पुष्पा वर्मा ने इंदौर में उतारने की बात कही।
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गौरतलब है कि पुणे से अशोका ट्रैवल्स में बैठकर उज्जैन निवासी शिक्षिका दीपिका पति संदीप (38) अपने बेटे आदित्यराज (11) व मां के साथ इंदौर आ रही थी। बस में दीपिका और आदित्यराज की तबीयत बिगड़ी और उल्टियां होने लगी। दोनों को इंदौर के अस्पताल में भर्ती करवाया गया लेकिन दोनों की मौत हो गई। इसके बाद मृतका के भाई ने बस के ड्रायवर कंडक्टर पर लापरवाही के आरोप लगाए थे। बताया था कि अगर समय पर बस रोक देते और उपचार मिल जाता तो जान बच जाती। आशंका जताई गई थी कि जिस एसी बस में बैठकर आ रहे थे उस बर्थ के ऊपर अग्निशमन यंत्र लगा था। इसमें से गैस रिसाव होने के कारण दम घुटा और मौत हो गई। इस मामले में परिजन और यात्रियों के प्राथमिक बयान व जांच के आधार पर पुलिस ने बस के ड्रायवर अनोखीलाल पिता रामनारायण शर्मा निवासी लोटस ग्रीन कॉलोनी मक्सी रोड , अशोक पिता मोहन सिंह निवासी ग्राम सादलपुर धार और क्लीनर ईश्वरलाल पिता राजाराम सोलंकी निवासी माकड़ोन उज्जैन के खिलाफ आईपीसी 304 और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा-34 के तहत केस दर्ज किया है।
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ड्रायवर ने कहा-सात जगह रोकी थी बस
इस मामले में पुलिस ने बस को पहले ही जब्त कर लिया था। बस में लगे एसी की जांच करवाई थी। उसमें से गैस लीकेज जैसी बात सामने नहीं आई। जिस सीट प मां-बेटे बैठे थे वहां भी किसी तरह की कमी नहीं मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मां-बेटे के पेट में जहर की पुष्टि भी नहीं हुई। यह बात सामने आई कि लगातार उल्टियां होने से ह्रदय गति रूक गई थी जिस कारण मौत हो गई। दोनों के टिश्यू जांच के लिए भेजे गए हैं। मृतक दीपिका की मां पुष्पा व अन्य यात्रियों से पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि पुणे से बस में बैठने के दौरान ही मां-बेटे की तबीयत बिगड़ने लगी थी, लेकिन बस के स्टाफ के कर्मचारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि बस के ड्रायवर अशोक सिंह ने पुलिस बताया कि तीनों सवारी पुणे से 60 किमी आगे शिरूर से बैठी थी। तब उन्हें कोई तकलीफ नहीं थी। बस में सात डायबिटिक मरीज भी थे। उन्हें टॉयलेट के लिए अहमदनगर, शिर्डी सहित सात जगह बस रोकी। रात ढाई से तीन बजे पीछे की सीट से दो यात्री आए और उन्होंने मां-बेटे द्वारा उल्टियां करने की बात बताई, तब हमने जाकर पूछा तो पुष्पा वर्मा ने इंदौर में उतारने की बात कही।
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