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मध्यप्रदेश में संक्षिप्त मंत्रिमंडल तो बना, राज्य भाजपा के हर खेमे के लिए राजनीति करने की गुंजाइश बाकी

Tue, 21 Apr 2020 03:58 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 21 Apr 2020 03:58 PM IST
सार

  • केंद्र ने तबियत से चुने पांच नाम, सामान्य, ओबीसी, अनुसूचित जाति, आदिवासी सबको साधा
  • महिला चेहरे के रूप में मीना सिंह को मंत्रिमंडल में जगह
  • शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कैलाश की चली

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In Madhya Pradesh Narottam Mishra, Tulsi Silavat, Kamal Patel, Govind Singh Rajput and Meena Singh were sworn in as ministers on Tuesday
Oath ceremony in Madhya Pradesh - फोटो : Social Media

विस्तार

अरेंजमेंट के तहत कोविड-19 से जूझ रहे मध्यप्रदेश में तमाम कयासबाजियों को विराम देते हुए मंगलवार को संक्षिप्त मंत्रिमंडल ने शपथ ले ली। पद और गोपनीयता की शपथ लेने वाले पांच मंत्रियों में दो नाम (तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत) ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए नेताओं के हैं।

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एक नाम कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दोनों से अच्छे संबंध रखने वाले कमल पटेल का है। आदिवासी, उमरिया मानपुर से पांच बार विधायक रही मीना सिंह को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है।

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जगह पाने वालों में मध्यप्रदेश का ब्राह्मण चेहरा नरोत्तम मिश्रा भी हैं। इस तह से भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को मुख्य चेहरा और मिले जुले पांच चेहरों को मंत्री पद देकर सभी को साधने की कोशिश की है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की सोमवार देर शाम मंजूरी के बाद सोमवार को ही तय हो गया था कि मंगलवार को छोटा मंत्रिमंडल आकार ले लेगा।

लॉकडाउन के बाद 29 चेहरे होंगे शामिल

भाजपा के एक बड़े नेता ने कहा कि यह संकटकालीन व्यवस्था है। हमारे लिए इस समय मंत्रिमंडल महत्वपूर्ण नहीं है। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण लोगों की कोविड-19 के संक्रमण से जान बचाना है।

यह संक्षिप्त मंत्रिमडल कोविड-19 के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री की सहायता के लिए बना है। लॉकडाउन के बाद मंत्रिमंडल का पूर्ण गठन होगा। तब 29 चेहरे और शामिल किए जाएंगे। सूत्र का कहना है कि 21 अप्रैल को संक्षिप्त मंत्रिमंडल बना है ताकि कामकाज सुचारू रूप से चल सके।

पांचों मंत्री करोड़पति, सभी अनुभवी

शिवराज मंत्रिमंडल में नरोत्तम मिश्रा प्रभावशाली चेहरा हैं। नरोत्तम की घोषित संपत्ति 6.88 करोड़ रुपये है। शिवराज की पिछली सरकार में वह जल संसाधन एवं सूचना मंत्री थे। विधानसभा चुनाव के दौरान खर्च का ब्यौरा न दे पाने, पेड न्यूज के आरोप में नरोत्तम को उच्चतम न्यायालय ने तीन साल के लिए अयोग्य भी घोषित कर दिया था।

बाद में वह स्टे ले आए थे। नरोत्तम  का कार्यक्षेत्र भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के दबदबे वाला ग्वालियर, चंबल संभाग ही है। वह दतिया क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। कमल पटेल हरदा से पांचवी बार विधायक बने हैं। शिवराज की पिछली सरकार में चिकित्सा मंत्री रहे हैं। पटेल की कुल घोषित संपत्ति 6.43 करोड़ रुपये है।

तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान ने पटेल पर कभी पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए नोटिस भी जारी किया था। भाजपा के पुराने नेताओं में तीसरा चेहरा पांच बार की विधायक, पिछली सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री, आदिवासी नेता मीना सिंह का है। मीना सिंह की घोषित संपत्ति 1.76 करोड़ रुपये है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया से करीब और विश्वास का रिश्ता रखने वाले तथा कमलनाथ सरकार में स्वास्थ्यमंत्री रहे अनुसूचित जाति के नेता तुलसी सिलावट को भी जगह मिली है। तुलसी सिलावट ही सबसे अमीर मंत्री हैं।

उनकी कुल घोषित संपत्ति 8.26 करोड़ रुपये हैं। सिंधिया के ही करीबी सामान्य वर्ग के गोविंद सिंह राजपूत को भी मंत्री बनाया गया। उनकी कुल संपत्ति 3.87 करोड़ रुपए हैं।

ज्योतिरादित्य की बुआ समेत ये चेहरे हैं कतार में

ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ यशोधरा राजे सिंधिया को मंत्रि परिषद में जगह मिलती रही है। अभी वह कतार में हैं। गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह जैसे शिवराज के करीबी विश्वसनीय नेताओं के नाम पर भी कोई फैसला होना है।

रामपाल सिंह, राजेन्द्र शुक्ला, गौरी शंकर बिसेन, विजय शाह जैसे नेताओं को लेकर भी चर्चा जारी है। चर्चा के केन्द्र में सिंधिया के कोटे के प्रद्युम्न सिंह, बिसाहू लाल, महेन्द्र सिंह सिसोधिया, इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी भी हैं। समझा जा रहा है कि इन सबको मंत्रिमंडल के विस्तार में जगह मिल सकती हैं।

अभी तो चित, पट दोनों केंद्र के हाथ में

मध्य प्रदेश भाजपा में जो नेता ज्योतिरादित्य के भाजपा में जाने से नाराज बताए जा रहे थे, उनमें एक नाम नरोत्तम मिश्रा का भी लिया जा रहा था। कहा जा रहा है कि नरोत्तम, कमल और मीना को जगह देकर केंद्र सरकार ने चित और पट, दोनों को अपने पास रखा है।

सिंधिया के खेमे का सम्मान करके राज्य की राजनीति को एक संदेश दे दिया है। मध्य प्रदेश की राजनीति को समझने वाले बताते हैं कि यह संदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए भी है।

वह राज्य के मुख्यमंत्री रहेंगे, लेकिन उनके लिए सरकार चलाने के दिन भी पहले जैसे नहीं रहने वाले हैं। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में यह तस्वीर पूरी तरह से साफ हो जाएगी। फिलहाल अभी राज्य भाजपा के हर खेमे के लिए राजनीति करने की पूरी गुंजाइश बची हुई है।

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