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अगर भाजपा की राह पर चली कांग्रेस तो 48 में से 35 सांसद नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Updated Tue, 04 Sep 2018 10:34 AM IST
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Congress
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साल 2018 के आखिर में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत में सोशल मीडिया का अहम योगदान माना गया। अब कांग्रेस भी सोशल मीडिया को लेकर सजग है और इस मीडियम का इस्तेमाल करना चाहती है। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने तो चुनाव के उम्मीदवारों के चयन के लिए नियम-शर्तों जारी की है जिसमें सोशल मीडिया को पैमाना बनाया गया।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी किए एक पत्र के मुताबिक, विधानसभा में टिकट पाने के इच्छुक उम्मीदवारों में से जिनके सोशल मीडिया प्टेलफॉर्म फेसबुक पर 15 हजार लाइक्स, ट्विटर पर 5 हजार फॉलोअर्स और बूथ लेवल कार्यकर्ताओं का एक वॉट्सएप ग्रुप होगा, टिकट देने में उन्हीं के नाम पर विचार किया जाएगा।
अगर इस फॉर्मूले पर कांग्रेस अगले साल संभावित लोकसभा चुनाव में भी आगे बढ़ती है तो मौजूदा 48 में से 35 सांसदों के टिकट कट जाएंगे। 10 कांग्रेस सांसदों के तो टि्वटर पर अकाउंट ही नहीं हैं। इसमें यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी हैं। कांग्रेस में ऐसे 25 सांसद हैं जिनके टि्वटर पर पांच हजार से कम फॉलोअर्स हैं। यानी 35 सांसद इस फॉर्मूले पर खरे नहीं उतरेंगे। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, शाशि थरूर, ज्योतिरादित्य सिंधिया के सबसे अधिक फॉलोअर्स हैं।
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टिकट देने से पहले सोशल मीडिया खंगालेगी कांग्रेस
ऐसा माना गया कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस भाजपा की तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर पाई, जो अब जनमत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कांग्रेस भी अब पारंपरिक प्रचार पद्धति से हटकर कुछ अलग करना चाहती है। इसकी शुरुआत वह विधानसभा चुनावों से करेगी।
सोशल मीडिया पर भाजपा की लड़ाई
मध्यप्रदेश में सत्ता पर काबिज भाजपा ने पांच महीने पहले ही विधायकों को हिदायत दे दी थी कि वे सरकार और संगठन के खिलाफ होने वाले दुष्प्रचारों का टि्वटर और फेसबुक पेज बनाकर उचित जवाब दें। विधानसभा के आगामी चुनाव के मद्देनजर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के चुनावी वार रूम मुस्तैद हो गए हैं। चुनाव के लिए भाजपा ने भोपाल में 50 लोगों की एक टीम बनाई है। वहीं कांग्रेस ने 100 से अधिक विशेषज्ञों को जोड़ा है।
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मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी किए एक पत्र के मुताबिक, विधानसभा में टिकट पाने के इच्छुक उम्मीदवारों में से जिनके सोशल मीडिया प्टेलफॉर्म फेसबुक पर 15 हजार लाइक्स, ट्विटर पर 5 हजार फॉलोअर्स और बूथ लेवल कार्यकर्ताओं का एक वॉट्सएप ग्रुप होगा, टिकट देने में उन्हीं के नाम पर विचार किया जाएगा।
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अगर इस फॉर्मूले पर कांग्रेस अगले साल संभावित लोकसभा चुनाव में भी आगे बढ़ती है तो मौजूदा 48 में से 35 सांसदों के टिकट कट जाएंगे। 10 कांग्रेस सांसदों के तो टि्वटर पर अकाउंट ही नहीं हैं। इसमें यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी हैं। कांग्रेस में ऐसे 25 सांसद हैं जिनके टि्वटर पर पांच हजार से कम फॉलोअर्स हैं। यानी 35 सांसद इस फॉर्मूले पर खरे नहीं उतरेंगे। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, शाशि थरूर, ज्योतिरादित्य सिंधिया के सबसे अधिक फॉलोअर्स हैं।
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टिकट देने से पहले सोशल मीडिया खंगालेगी कांग्रेस
ऐसा माना गया कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस भाजपा की तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर पाई, जो अब जनमत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कांग्रेस भी अब पारंपरिक प्रचार पद्धति से हटकर कुछ अलग करना चाहती है। इसकी शुरुआत वह विधानसभा चुनावों से करेगी।
सोशल मीडिया पर भाजपा की लड़ाई
मध्यप्रदेश में सत्ता पर काबिज भाजपा ने पांच महीने पहले ही विधायकों को हिदायत दे दी थी कि वे सरकार और संगठन के खिलाफ होने वाले दुष्प्रचारों का टि्वटर और फेसबुक पेज बनाकर उचित जवाब दें। विधानसभा के आगामी चुनाव के मद्देनजर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के चुनावी वार रूम मुस्तैद हो गए हैं। चुनाव के लिए भाजपा ने भोपाल में 50 लोगों की एक टीम बनाई है। वहीं कांग्रेस ने 100 से अधिक विशेषज्ञों को जोड़ा है।
मोदी ने सांसदों को सोशल मीडिया फॉलोअर्स का टारगेट दिया
Namo App
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन 2019 के लिए पार्टी के सांसदों और विधायकों को सोशल मीडिया के जरिये लोगों से सीधा संवाद करने की हिदायत दे चुके हैं। पिछले 30 अप्रैल को उन्होंने कहा था, "अगर सांसद को उसके क्षेत्र के 3 लाख लोग ट्विटर पर और विधायकों को एक लाख लोग फॉलो करने लगे तो मैं नमो एप से सीधे उनसे बात करूंगा।"
नमो एप भाजपा में प्रत्याशियों के चयन में अहम भूमिका निभाने जा रहा है। नमो एप एक करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड हो चुका है। इस मोबाइल एप के जरिये पार्टी के कामकाज का सर्वे भी हुआ है। नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले सांसदों और विधायकों को सोशल मीडिया पर सक्रिय होने की हिदायत दे चुके हैं।
मध्यप्रदेश कांग्रेस की सोशल मीडिया पर उपस्थिति पर नजर डालें तो मौजूदा 55 विधायकों में से एक तिहाई विधायक सोशल मीडिया ट्विटर पर सक्रिय नहीं हैं। कांग्रेस के प्रदेश के कुल विधायकों में से महज 17 विधायक ही ट्विटर पर मौजूद हैं। उनमें से भी आधे कभी-कभार ही ट्वीट करते हैं।
कांग्रेस ने जारी किए गए पत्र में कहा है कि राज्य के सभी पदाधिकारियों और टिकट के दावेदारों के सोशल मीडिया अकाउंट्स का भी आकलन होगा। टिकट के दावेदार, विधायक और पदाधिकारी 15 सितंबर तक ट्विटर, फेसबुक और वॉट्सएप की जानकारी मध्य प्रदेश कांग्रेस के सोशल मीडिया और आईटी विभाग को दें। प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों को पार्टी के ट्विटर अकाउंट से हर पोस्ट को री-ट्वीट, फेसबुक लाइक भी करना होगा।
नमो एप भाजपा में प्रत्याशियों के चयन में अहम भूमिका निभाने जा रहा है। नमो एप एक करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड हो चुका है। इस मोबाइल एप के जरिये पार्टी के कामकाज का सर्वे भी हुआ है। नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले सांसदों और विधायकों को सोशल मीडिया पर सक्रिय होने की हिदायत दे चुके हैं।
मध्यप्रदेश कांग्रेस की सोशल मीडिया पर उपस्थिति पर नजर डालें तो मौजूदा 55 विधायकों में से एक तिहाई विधायक सोशल मीडिया ट्विटर पर सक्रिय नहीं हैं। कांग्रेस के प्रदेश के कुल विधायकों में से महज 17 विधायक ही ट्विटर पर मौजूद हैं। उनमें से भी आधे कभी-कभार ही ट्वीट करते हैं।
कांग्रेस ने जारी किए गए पत्र में कहा है कि राज्य के सभी पदाधिकारियों और टिकट के दावेदारों के सोशल मीडिया अकाउंट्स का भी आकलन होगा। टिकट के दावेदार, विधायक और पदाधिकारी 15 सितंबर तक ट्विटर, फेसबुक और वॉट्सएप की जानकारी मध्य प्रदेश कांग्रेस के सोशल मीडिया और आईटी विभाग को दें। प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों को पार्टी के ट्विटर अकाउंट से हर पोस्ट को री-ट्वीट, फेसबुक लाइक भी करना होगा।
