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एमपी : चुनाव प्रचार में हर दिन हो रहा 10 टन प्लास्टिक का इस्तेमाल, हाईकोर्ट ने सरकार को भेजा नोटिस
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Updated Wed, 14 Nov 2018 03:28 PM IST
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Madhya Pradesh High Court
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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में चुनाव प्रचार के दौरान प्लास्टिक की सामग्री के इस्तेमाल को लेकर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव निर्वाचन आयोग को नोटिस भेजकर दो हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है। दरअसल चुनाव प्रचार में प्लास्टिक सामग्री के अंधाधुन उपयोग के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है।
याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी के जायसवाल व न्यायमूर्ति बी के श्रीवास्तव की युगलपीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की।
जबलपुर निवासी संजीव कुमार पांडे की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि अपशिष्ट पदार्थ अधिनियम की श्रेणी में प्लास्टिक से बनने वाले फ्लेक्स, होर्डिंग व झंडे भी आते हैं। केन्द्रीय प्लास्टिक पदार्थ प्रतिबंधित सूची में भी यह शामिल हैं। इसके बावजूद भी विधासभा चुनाव में प्रचार प्रसार के लिए इनका उपयोग किया जा रहा है।
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एक अनुमान के अनुसार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रतिदिन प्रचार प्रसार के लिए 10 टन प्लास्टिक से बने फ्लेक्स, होर्डिंग व झंडे का उपयोग होगा। इतनी भारी मात्रा में प्लास्टिक सामग्री का उत्पादन पर्यावरण की लिए घातक है।
याचिका में कहा गया था कि प्रदेश में प्लास्टिक के बैग का उत्पादन, भंडारण व उपयोग प्रतिबंधित है। सरकार के इस निर्णय को हाईकोर्ट ने भी उचित ठहराया था। जब प्लास्टिक के कैरी-बैग का उपयोग प्रतिबंधित है तो प्लास्टिक का उपयोग चुनाव प्रचार सामग्री में क्यों किया जा रहा है।
याचिका में प्रदेश सरकार व राज्य चुनाव निर्वाचन आयोग को प्रतिवादी बनाया गया था। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ उपस्थित हुए। (इनपुट:भाषा)
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याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी के जायसवाल व न्यायमूर्ति बी के श्रीवास्तव की युगलपीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की।
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जबलपुर निवासी संजीव कुमार पांडे की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि अपशिष्ट पदार्थ अधिनियम की श्रेणी में प्लास्टिक से बनने वाले फ्लेक्स, होर्डिंग व झंडे भी आते हैं। केन्द्रीय प्लास्टिक पदार्थ प्रतिबंधित सूची में भी यह शामिल हैं। इसके बावजूद भी विधासभा चुनाव में प्रचार प्रसार के लिए इनका उपयोग किया जा रहा है।
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एक अनुमान के अनुसार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रतिदिन प्रचार प्रसार के लिए 10 टन प्लास्टिक से बने फ्लेक्स, होर्डिंग व झंडे का उपयोग होगा। इतनी भारी मात्रा में प्लास्टिक सामग्री का उत्पादन पर्यावरण की लिए घातक है।
याचिका में कहा गया था कि प्रदेश में प्लास्टिक के बैग का उत्पादन, भंडारण व उपयोग प्रतिबंधित है। सरकार के इस निर्णय को हाईकोर्ट ने भी उचित ठहराया था। जब प्लास्टिक के कैरी-बैग का उपयोग प्रतिबंधित है तो प्लास्टिक का उपयोग चुनाव प्रचार सामग्री में क्यों किया जा रहा है।
याचिका में प्रदेश सरकार व राज्य चुनाव निर्वाचन आयोग को प्रतिवादी बनाया गया था। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ उपस्थित हुए। (इनपुट:भाषा)
