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चंबल की शान थानों में कैद: थानों में जमा होने लगी 'चंबल की शान', भिंड में 31 हजार से अधिक लाइसेंसी बंदूक

Tue, 17 Oct 2023 04:28 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 17 Oct 2023 04:28 PM IST
सार

मध्यप्रदेश का चंबल और चंबल के लोगों में बंदूक मोह किसी से छिपा नहीं है। इस क्षेत्र में हथियार आदमी की शान मानी जाती है, जहां लोग नौकरी और रुपये-पैसों के लिए नेताओं से सिफारिश करते हैं। वहीं, चंबल अंचल में ये सिफारिशें बंदूक लाइसेंस की होती है। लेकिन अब ये शान पुलिस थानों में कैद हो रही है। चुनाव के चलते प्रशासन ने लाइसेंसी हथियारों को जमा करने का फरमान जारी कर दिया है।

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Gwalior Licensed guns started getting deposited in Chambal police
बंदूक जमा कराने के लिए थाने पर बैठे हुए लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता भी लागू हो गई है। इसी बीच अब ग्वालियर चंबल की शान कही जाने वाली लाइसेंसी बंदूक भी थानों में कैद होने लगी है। ग्वालियर चंबल में स्टेटस सिंबल के रूप में पहचाने जाने वाली लाइसेंसी बंदूक को लेकर लोग थाने में जमा करने के लिए पहुंच रहे हैं। यही कारण है कि अब थानों में लंबी-लंबी कतारे लगी हुई हैं। ग्वालियर-चंबल अंचल में पूरे मध्यप्रदेश से अधिक शस्त्र लाइसेंसी बंदूक है। यहां के लोग इस लाइसेंसी बंदूक को स्टेटस सिंबल के रूप में मानते हैं। लेकिन अब यह सभी लाइसेंसी बंदूक धीरे-धीरे थानों में जमा हो रही है। मतलब आने वाले शादी समारोह या किसी अन्य फंक्शन में लोगों के कंधों पर बंदूके दिखाई नहीं देगी।

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मध्यप्रदेश में विधानसभा का चुनाव नजदीक है। ऐसे में सभी लाइसेंसी हथियारों को थानों में जमा करने की निर्देश जारी हो चुके हैं। यही कारण है की ग्वालियर-चंबल अंचल में लोग अपने घर से लाइसेंसी बंदूक को लेकर थाने पहुंच रहे हैं और उसे जमा करा रहे हैं। अंचल के थानों में लोगों की लंबी-लंबी कतारों को देखकर ऐसे लग रहा है कि यहां कोई राशन बट रहा है। लेकिन असल में इन थानों में लाइसेंसी बंदूके जमा की जा रही हैं। ताकि आगामी चुनाव में कोई हिंसा या उपद्रव जैसी घटनाएं न हो सके। ग्वालियर चंबल अंचल में लगभग एक लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंसी बंदूक हैं, जो कि पूरे मध्यप्रदेश में सबसे अधिक है। अंचल में लगभग सभी घरों में लाइसेंसी बंदूके मौजूद हैं और यही कारण है कि यह बंदूके कभी-कभी मौत का कारण भी बन जाती है।
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ग्वालियर-चंबल अंचल के जिलों में हमेशा स्वस्थ लाइसेंस की मांग सबसे अधिक होती है और चुनाव के वक्त यह डिमांड काफी बढ़ जाती है। चुनाव में यहां के लोग बिजली, पानी, सड़क की बजाय माननीय के यहां शस्त्र लाइसेंस की अनुशंसा के लिए चक्कर काटते रहते हैं और माननीय भी वोट बैंक के चक्कर में शस्त्र लाइसेंस बनवाने का वादा भी करते हैं। यही कारण है कि इस इलाके में दिनों दिन शस्त्र लाइसेंस की संख्या बढ़ती जा रही है।
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अंचल के चार जिलों में सबसे अधिक शस्त्र लाइसेंस की संख्या है, जिसमें भिंड में लगभग 31,000 से अधिक शस्त्र लाइसेंस है तो वहीं मुरैना में 33,000 से अधिक शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं। इसके अलावा ग्वालियर में 31,000 और दतिया जिले में 27,000 शस्त्र लाइसेंस हैं। यहां पर हर वक्त शस्त्र लाइसेंस की डिमांड बनी रहती है और लोग माननीय या अधिकारियों से सांठगांठ करके शस्त्र लाइसेंस बनवाने की जुगाड़ में घूमते फिरते हैं। यही कारण है कि ग्वालियर-चंबल अंचल में शस्त्र लाइसेंस की संख्या पूरे प्रदेश में सबसे अधिक है।


ग्वालियर-चंबल अंचल में लाइसेंसी बंदूके को स्टेटस सिंबल के रूप में उपयोग करते हैं। आंचल में यहां के लोग शादी समारोह या किसी फंक्शन में शामिल होने के लिए जाते हैं तो वह अपनी कंधे पर लाइसेंसी बंदूक को जरूर लटका कर लाते हैं। कहा जाता है कि चंबल में लाइसेंसी बंदूक लोगों की शान मानी जाती है। लेकिन अब यह बंदूकें मौत का कारण भी बनती जा रही हैं। ग्वालियर-चंबल अंचल में मौत का आंकड़ा कहता है कि सबसे अधिक खून खराब और हत्याएं इसी लाइसेंस की बंदूक के कारण हो रही है। क्योंकि जब कभी आपस में झगड़ा होता है तो लोग अपने घर में रखी लाइसेंसी बंदूक को निकालकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाना शुरू करते थे, जिसमें कई जान चली जाती हैं। इसके अलावा यहां पर आपसी दुश्मनी काफी अधिक है और लोग इस कारण शस्त्र लाइसेंस रखना काफी आवश्यक समझते हैं।

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