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Gwalior News: PM जीवन ज्योति बीमा में 20 करोड़ की ठगी, तीन जिलों के जिंदा लोगों को मृत बताया, 15 पर FIR
Thu, 07 Aug 2025 04:36 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: ग्वालियर ब्यूरो
Updated Thu, 07 Aug 2025 04:36 PM IST
सार
ग्वालियर-चंबल संभाग में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में जीवित लोगों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर 20 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। EOW ने 15 लोगों पर मामला दर्ज किया है। जांच में बीमा एजेंट, पंचायत सचिव और नगर निगम कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है।
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तीन जिलों के जिंदा लोगों को मृत बता दिया
विस्तार
ग्वालियर-चंबल संभाग में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत एक बड़ा घोटाला सामने आया है। इस फर्जीवाड़े में एक संगठित गिरोह ने जीवित लोगों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर लगभग 20 करोड़ रुपये की बीमा राशि हड़प ली। आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने ग्वालियर, भिंड और मुरैना से 15 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
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कैसे हुआ घोटाला?
साल 2015 में शुरू हुई इस योजना के तहत बीमित व्यक्ति की मृत्यु पर नॉमिनी को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। आवेदन प्रक्रिया सरल और बिना मेडिकल जांच के होती है। इसी सरलता का फायदा उठाकर शातिरों ने पहले कुछ लोगों पर योजना का परीक्षण किया और फिर पूरे ग्वालियर-चंबल संभाग में नेटवर्क फैला दिया। यह गिरोह पिछले पांच वर्षों से सक्रिय था।
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फर्जी प्रमाण पत्र और झूठे क्लेम
EOW को फरवरी 2025 में ग्वालियर से एक शिकायत मिली, जिसमें संदिग्ध बीमा क्लेम का ज़िक्र था। जांच में पता चला कि मृत लोगों को जीवित बताकर उनके नाम पर बीमा पॉलिसी कराई गई और फिर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर दो-दो लाख रुपये का क्लेम किया गया। अब तक जांच में 1,004 संदिग्ध क्लेम मिले हैं, जिनमें से अधिकांश फर्जी हैं।
बीमा कंपनियों की मिलीभगत?
EOW ने आठ बीमा कंपनियों से 2020 से 2024 तक के रिकॉर्ड की जांच की, जिनमें मैक्स लाइफ इंश्योरेंस और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस से 20 करोड़ के भुगतान की पुष्टि हुई है। मैक्स लाइफ के 325 और एसबीआई लाइफ के 679 केसों की जानकारी सामने आई है। बाकी छह कंपनियों की जांच जारी है।
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जीवित लोग 'सरकारी रिकॉर्ड' में मृत
मैक्स लाइफ के पांच मामलों में जीवित व्यक्तियों — नदीम, इरशाद, नसीमा, सिमरन और कृष्णा शंखवार — को मृत दिखाकर उनके नाम पर पैसे निकाले गए। इरशाद, जो ग्वालियर के वीरपुर में एक बेकरी में काम करता है, ने बताया कि उसकी पत्नी के नाम पर भी फर्जी क्लेम किया गया।
गिरोह का नेटवर्क और कार्यप्रणाली
मुख्य सरगना जिग्नेश प्रजापति ने नदीम के माध्यम से ऐसे गरीब व कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाया, जिनका बीमा कराया गया और फिर उनका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर क्लेम लिया गया। ग्वालियर नगर निगम के बल भवन स्थित मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यालय से ये फर्जी प्रमाण पत्र बनाए गए। नगर निगम उपायुक्त प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि 2024 से ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों की जांच के बाद प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। इसी प्रणाली की कमजोरियों का लाभ उठाकर यह फर्जीवाड़ा किया गया।
आरोपियों पर शिकंजा कसता जा रहा है
अब तक EOW ने 15 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। इनमें बीमा एजेंट, पंचायत सचिव, नगर निगम कर्मचारी और अन्य शामिल हैं। अभी तक सिर्फ दो बीमा कंपनियों की जांच में ही 20 करोड़ का घोटाला सामने आया है, जबकि छह कंपनियों की पड़ताल बाकी है। अनुमान है कि यह घोटाला 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
