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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Guna accident: The bus collided on the side where the children were sitting, all three children were burnt alive due to being trapped in the cabin

गुना हादसा: जिस तरफ बैठे थे बच्चे उसी ओर से टकराई बस, केबिन में फंसने के कारण जिंदा जल गए तीनों बच्चे

Sat, 06 Nov 2021 05:02 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: रवींद्र भजनी Updated Sat, 06 Nov 2021 05:02 PM IST
सार

गुना के पास इंदौर से मथुरा जा रही बस में आग लगने से शुक्रवार को तीन लोग जिंदा जल गए थे। इस मामले में नए खुलासे सामने आए हैं। 

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Guna accident: The bus collided on the side where the children were sitting, all three children were burnt alive due to being trapped in the cabin
गुना के पास जलती बस। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बच्चों की जिद थी कि बस में आगे बैठेंगे। मस्ती करेंगे और खुली आंखों से सफर के नजारे देखेंगे कि लेकिन यह उनकी आखिरी जिद बन गई। सपने टूट गए और कभी न खुलने वाली नींद में चले गए। मौत इतनी निर्दयता से आई कि तीनों जिंदा जल गए। जब निकाला तो बच्चे नहीं बल्कि कंकाल मिले।
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गुना में हुए सडक़ हादसे के बाद जिस मिनी बस में आग लगी थी उसमें तीनों बच्चे जिंदा जल गए थे। जब बच्चों के शव इंदौर लाए गए तो किसी की देखने की हिम्मत तक नहीं हुई। पोटली में भरकर लाया गया और पंचकुइया के मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया। उल्लेखनीय है कि  गोवर्धन पूजा के लिए दीपावली की रात इंदौर से निकले यात्रियों की बस हादसे का शिकार हो गई। गुना के पास बस डंपर से जा भिड़ी और बस में आग लग गई। इस बस में तीन बच्चे जिंदा जल गए जबकि शेष घायल हुए।
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28 लोग गए थे यात्रा पर
जानकारी के मुताबिक निमाड़ के शकरखेड़ा निवासी प्रवीण शर्मा  इंदौर में रहते थे। उनकी पत्नी नेहा, बेटे मधुसूदन, बेटी काशवी, मां पुष्पाईबाई सहित पड़ोस में रहने वाले रिश्तेदार जगदीश शर्मा, सुभाष शर्मा और खरगोन निवासी रिश्तेदार सहित 28 लोग मथुरा दर्शन करने जा रहे थे। घर में दीपावली का पूजन कर रात को इंदौर से निकले। मिनी बस का प्रबंध किया और इस खुशी में बस में सवार हुए कि अगली सुबह मथुरा में होगी लेकिन रास्ते में जो हुआ उसने सबको उदास कर दिया।
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केबिन में नहीं फंसते तो बच सकती थी जान
बस में माधव (२०) अपनी बहन दुर्गा (१३) और रोहित (१९) के साथ ड्रायवर के पास वाली सीट पर बैठे थे। बच्चों की जिद थी कि वे आगे ही बैठेंगे। घरवालों ने उन्हें समझाया कि बीच में बैठ जाओ  लेकिन बच्चों की जिद की आगे झुक गए। जिस तरफ बच्चे बैठे थे उसी तरफ से बस डंपर से टकराई इस कारण बच्चे केबिन में फंस गए। उन्हें निकलने का मौका नहीं मिला। घटना के वक्त तीनों बच्चे नींद में थे। जो दूसरे यात्री थे वे हादसे के बाद आपस में टकराकर चोटिल हुए और नीचे उतरने लगे। एक एक करके सब नीचे उतरे और तभी बस में आग लग गई। सबने नीचे बच्चों को देखा तो वे नहीं मिले और इसी बीच आग तेज हो गई। कुछ ही देर में तीनों बच्चे आग में जिंदा जल गए। शुक्रवार को बच्चों के शव पोटली में रखकर इंदौर लाए गए तो देखकर हर आंख से आंसू बह निकले। इंदौर के द्वारकापुरी में मातम  पसर गया। जिन बच्चों के साथ तीनों का बचपन गुजरा उनके चेहरे आंसुओं से भीगे हुए थे। तीनों की शवयात्रा एक साथ निकली। शाम को पंचकुइया मुक्तिधाम पर तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। 

तेज रफ्तार से चला रहा था बस
हादसे के पीछे चालक नितेश  की लापरवाही की बात सामने आ रही है। घटना के वह बस से उतरकर भाग गया। बताया जा रहा है कि मिनी बस का चालक अनमने मन से यात्रा के लिए आया था। इंदौर से बस निकलते ही वह तेज रफ्तार में बस चला रहा था। बीच में कई बार यात्रियों ने उसे टोका लेकिन वह नहीं माना। चालक ने शराब भी पी रखी थी। देवास के पास तो कुछ यात्रियों ने चालक के नशे में होने की स्थिति के कारण वापस इंदौर जाने का मन बनाया लेकिन दूसरे साथियों ने कहा कि वापस नहीं जाएंगे। 


ये लोग गए थे यात्रा पर
हादसे में घायल प्रवीण  अपनी पत्नी, बच्चे व मां के साथ यात्रा पर गए थे। जगदीश शर्मा प्रवीण के मामा हैं। वे भी यात्रा पर गए थे। उनकी बेटी दुर्गा की इस हादसे में जान चली गई। दुर्गा सातवीं कक्षा में पढ़तीं थीं। एक परिवार सुभाष शर्मा का था। वे पत्नी रानी, बेटी खुशी, अन्नू, मयंक के साथ यात्रा पर गए थे। सुभाष भी प्रवीण के मामा और जगदीश के भाई हैं। इसके अलावा प्रवीण के एक जीजा, जगदीश जो कन्नौद क्षेत्र के निवासी हैं वे भी बेटे और बेटी को लेकर गए थे। हादसे में बेटे की मौत हो गई। अन्य रिश्तेदार शुभम शर्मा पत्नी शिवानी और बेटे को भी यात्रा पर लेकर गए थे। साथ में अशोक शर्मा का परिवार भी था।
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