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ग्वालियर: रेत माफियाओं ने ले ली फॉरेस्ट गार्ड की जान

Mon, 07 Mar 2016 03:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्वालियर
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्वालियर Updated Mon, 07 Mar 2016 03:06 AM IST
सार

  • मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
  • पुलिस ने वनकर्मी की जान लेने वाले आरोपी ट्रैक्टर चालक को गिरफ्तार कर लिया है।

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forest guard killed in gwalior
ग्वालियर हादसा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के ग्वालियर चंबल संभाग में रेत माफिया ने रविवार सुबह एक वनकर्मी (फॉरेस्ट आरक्षक) पर रेत से भरी ट्रैक्टर ट्राली चढ़ाकर जान ले ली। घटना से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने वनकर्मी की जान लेने वाले आरोपी ट्रैक्टर चालक को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

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जानकारी के अनुसार बेकाबू हो रहे रेत और पत्थर माफियाओं को रोकने के लिए वन विभाग और जिला प्रशासन कवायद कर रहा है। रविवार सुबह इसी के तहत संयुक्त टीमें उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए निकली थीं। एक टीम बानमोर के समीप आगरा-मुंबई राजमार्ग पर निकली थी।
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टीम को पुरानी छावनी थाना क्षेत्र में  रेत से भरी तीन-चार ट्रैक्टर ट्रालियां दिखीं। उनका पीछा किया गया तो ट्रैक्टर चालक टीमों को देखकर तेजी से भागने लगे। दो ट्राली गांव की ओर मुड़कर ओझल हो गई जबकि तीसरी ट्राली का चालक लल्ला मावई ने सीधे ही तेजी से भागता रहा।

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पकड़ना चाहा तो चालक ने मारी लात

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ग्वालियर हादसा - फोटो : अमर उजाला

उसका पीछा कर रहे वन विभाग के फारेस्ट गार्ड नरेंद्र शर्मा अपने वाहन के साथ उसके पास पहुंचे तभी उसने अचानक ब्रेक लगा दिए। दोनों वाहन टकरा गए। नरेंद्र ने ट्रैक्टर चालक को पकड़ने की कोशिश की तो उसने चालक लल्ला ने उन्हें लात मारकर नीचे गिरा दिया और तेज गति से ट्रैक्टर आगे बढ़ा दिया।

नीचे गिरे नरेंद्र ट्रैक्टर के पहिए के नीचे आ गए जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, उनके साथी हेमराज, ज्ञानेंद्र व एक अन्य घायल हो गए। हादसे के बाद भागती ट्रैक्टर ट्राली सड़क किनारे पलट गई। आरोपी लल्ला ने भागने की कोशिश की लेकिन टीम के अन्य सदस्यों ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने उसे पुलिस को सौंप दिया।

पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। जानकारी मिलने पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को अवैध खनन माफिया के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये नगद व एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने की घोषणा भी की है।

आईपीएस नरेंद्र भी हुए थे खनन माफिया का शिकार

forest guard killed in gwalior
ग्वालियर हादसा - फोटो : अमर उजाला

आगरा-मुंबई राजमार्ग के आसपास सटे गांवों, जंगलों व नदियों में इन दिनों अवैध खनन करने वाले माफियाओं का कब्जा हैं। राज्य की शिवराज सरकार इन अवैध कारोबार के माफियाओं के खिलाफ कितनी भी कार्रवाई का दावा करे लेकिन सच्चाई यही है कि अवैध खनन पर अंकुश नहीं लग सका है।

बता दें, मार्च 2012 में भी ऐसी ही एक दर्दनाक घटना में खनन माफिया ने युवा आईपीएस अधिकारी नरेंद्र कुमार की उस समय जान ले ली थी जब उन्होंने होली के दिन ड्यूटी के दौरान पत्थर माफिया को पकड़ने का प्रयास किया था। तब उन पर भी ट्रैक्टर ट्राली चढ़ा दी गई थी जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। उस समय भी राज्य सरकार ने खनन माफिया को रोकने के बड़े-बड़े दावे किए थे लेकिन ताजा घटना ने एक बार फिर न सिर्फ उस घटना की याद ताजा कर दी बल्कि सरकारी दावों की भी पोल खोल दी।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि उस घटना से आईपीएस नरेंद्र कुमार की आईएएस पत्नी मधु तेवतिया को इतना गहरा सदमा लगा था कि वे मध्यप्रदेश कैडर छोड़कर हरियाणा कैडर में चली गई थीं। हालांकि यह अलग बात है कि इसके बाद भी राज्य में विशेषकर ग्वालियर चंबल संभाग में अवैध खनन का कारोबार नहीं रुका हैं।

नतीजा मार्च 2016 में ठीक चार वर्ष पूर्व की वह घटना दोहरा दी गई जिसमें फारेस्ट गार्ड नरेंद्र शर्मा को भी अवैध खनन माफियाओं ने उसी तरह कुचलकर मार दिया, जिस प्रकार आईपीएस नरेंद्र कुमार को मारा गया था। ऐसी ही एक अन्य घटना गत वर्ष हो चुकी है। जब नूराबाद के एक पुलिस आरक्षक धर्मेंद्र सिंह चौहान को भी डंपर चालक ने कुचलकर मार डाला था।

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