{"_id":"63cfe6270c9d7847e3300c4a","slug":"farmers-suffering-from-tower-line-besieged-the-collectorate-demanding-compensation-in-satna-madhya-pradesh-2023-01-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: सतना में टावर लाइन से पीड़ित किसानों ने घेरा कलेक्ट्रेट, 2015 के दिशानिर्देश के तहत मांगा मुआवजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: सतना में टावर लाइन से पीड़ित किसानों ने घेरा कलेक्ट्रेट, 2015 के दिशानिर्देश के तहत मांगा मुआवजा
Tue, 24 Jan 2023 07:37 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Tue, 24 Jan 2023 07:37 PM IST
सार
किसानों ने शासन से 2015 में कलेक्टर द्वारा तय की गई प्रति टावर 12 लाख रुपए, तार का तीन हजार रुपए प्रति मीटर की दर से मुआवजा देने की मांग की। किसानों ने कहा कि हम कंपनी से भीख नहीं मांग रहे हैं, जमीन के बदले मुआवजा हमारा अधिकार है। अगर पावर ग्रिड मुआवजा नहीं देती तो अब हम आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।
विज्ञापन
सतना में विरोध-प्रदर्शन के दौरान किसान
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उचेहरा के 300 किसानों ने सोमवार को सतना पावर ग्रिड एवं जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर कलेक्ट्रेट का घेराव किया। दरअसल, सतना पावर ग्रिड ने उचेहरा इलाके में किसानों की जमीनों में हाईटेंशन लाइनों का जाल तो बिछा दिया, लेकिन मुआवजा नहीं दिया। पावर ग्रिड की इस मनमानी के खिलाफ इलाके के 40 से अधिक किसान दो महीने से टावर पर चढ़कर आंदोलन कर रहे हैं।
विज्ञापन
मुआवजा दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने प्रभावित किसानों की जमीनों का सर्वे कराते हुए 2017 की गाइडलाइन के अनुसार किसानों को जमीन का मुआवजा देने के लिए प्रदेश सरकार से 27 करोड़ का बजट मांगा है। लेकिन किसानों ने नई गाइडलाइन के अनुसार मुआवजा लेने से मना कर दिया है।
विज्ञापन
'जमीन के बदले मुआवजा हमारा अधिकार है'
जिला प्रशासन द्वारा सरकार को भेजी गई रिपोर्ट के विरोध में सोमवार को उचेहरा के 300 किसानों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। इस दौरान उन्होंने पावर कंपनी एवं जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
विज्ञापन
किसानों ने शासन से 2015 में कलेक्टर द्वारा तय की गई प्रति टावर 12 लाख रुपए, तार का तीन हजार रुपए प्रति मीटर की दर से मुआवजा देने की मांग की। किसानों ने कहा कि हम कंपनी से भीख नहीं मांग रहे हैं, जमीन के बदले मुआवजा हमारा अधिकार है। अगर पावर ग्रिड मुआवजा नहीं देती तो अब हम आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।
किसानों ने प्रस्ताव को बताया गुमराह करने वाला
जिला प्रशासन ने प्रदेश सरकार को नई गाइडलाइन से मुआवजा देने का प्रस्ताव भोपाल भेजा है। इस प्रस्ताव के मुताबिक, 2017 से पहले टावर लाइनों का कोई मुआवजा तय नहीं था।
प्रशासन द्वारा सरकार को दी गई इस जानकारी को गुमराह करने वाला बताते हुए किसानों ने कहा कि जब 2017 से पहले टावर लाइन से पीड़ित किसानों को मुआवजा देने का प्रावधान नहीं था तो उचेहरा के कई किसानों को 15 से 30 लाख रुपए मुआवजा पावर ग्रिड ने किस नियम के तहत दिया।
