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जानिए कैसे एक चीनी सैनिक 54 साल तक रहा भारत में, अब चीन जाने पर खड़ी हुई ये मुसीबत

Fri, 30 Aug 2019 04:20 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Trainee Trainee Updated Fri, 30 Aug 2019 04:20 PM IST
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Ex Chinese soldier awaits return to family in MP village
वांग छी(चीनी सैनिक) - फोटो : Twitter

चीनी सैनिक वांग छी (80 वर्ष) जिन्हें 26 साल की उम्र में सन 1963 में भारत में घुसने और जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। फिर छह साल की जेल की सजा सुनाई गई और अलग-अलग जेलों में रखा गया। जेल की सजा काटने के बाद वह मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के तिरोड़ी गांव में बस गया जहां उसे राज बहादुर के नाम से जाना जाता है। अब 54 साल बाद उन्हें फरवरी 2017 में चीन में अपने भाई-बहनों से मिलने का मौका मिला लेकिन चीन जाना उनके लिये भारी पड़ गया क्योंकि अब पिछले पांच महीनों से उनका वीजा का नवीनीकरण नहीं हो पा रहा और अब वह भारत नहीं लौट पा रहे हैं।

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उनके बेटे विष्णु वांग जो बालाघाट में अकाउंटेंट हैं उन्होंने बताया,मेरे पिता मार्च 2018 में एक और वर्ष के लिए वीज़ा रिन्यू करवाने में सफल रहे। मार्च 2019 में उनका एक साल का भारत का मल्टी-एंट्री वीज़ा की समय सीमा समाप्त हो गई और अप्रैल 2019 में उन्होने वीजा के नवीनीकरण के लिए अप्लाई किया लेकिन उसपर अभी तक सुनवाई नहीं हुई है। विष्णु  ने बताया कि पहले पिता से बोला गया कि वे पासपोर्ट ले जाएं क्योंकि आवेदन में कुछ गलतियां हैं और जब वो दूसरी बार बीजिंग गए तो बोला गया कि आप ई-वीजा के लिए आवेदन कर दीजिए। ई-वीजा के लिए 5709 रुपए भी खर्च करने पड़े लेकिन बाद में उन्हें बताया गया कि उनका वीजा रद्द कर दिया गया है।
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विष्णु वांग ने दावा किया है कि वे बीजिंग में भारतीय दूतावास के अधिकारियों के साथ-साथ नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को बार-बार मेल भेजे हैं लेकिन मेरे पिता को बच्चों से मिलने की उनकी कोशिश के कोई परिणाम अबतक नहीं मिले हैं। विष्णु ने कहा 1969 में बालाघाट जिले के तिरोड़ी गांव में बसने के बाद, मेरे पिता चीन में अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिये लगभग कई दशकों तक संघर्ष करते रहे और इसी दौरान अक्टूबर 2017 में, उन्होंने अपनी पत्नी (मेरी मां) सुशीला को भी खो दिया।  
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वांग छी 1963 में गिरफ्तार हुए, मार्च 1969 में अदालत के आदेश पर रिहा होने से पहले राजस्थान, पंजाब और यूपी की अलग-अलग जेलों में उन्होंने लगभग सात साल बिताए, जिसके बाद वो मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के तिरोडी इलाके में आटा चक्की चलाकर अपना जीवनयापन करने लगे।  तिरोड़ी में रहते हुए लोग उन्हें राज बहादुर कहने लगे वहीं की निवासी सुशीला मोहिते से उन्होंने विवाह किया और जिनसे उन्हें तीन बच्चे हैं । 

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