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Damoh: पांच बार सांसद-मंत्री रहे कुसमरिया को भाजपा से बगावत पड़ी भारी, निर्दलीय चुनाव लड़ा तो जमानत हुई जब्त
Sun, 10 Mar 2024 10:07 AM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: उदित दीक्षित
Updated Sun, 10 Mar 2024 10:07 AM IST
सार
कुसमारिया ने 2018 में पथरिया और दमोह विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों ही सीटों पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इनके कारण दमोह से जयंत मलैया और पथरिया से लखन पटेल भी चुनाव हार गए थे।
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डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दमोह लोकसभा सीट का प्रदेश में अपना एक अलग ही इतिहास रहा है। दमोह से चार बार के सांसद रहे पूर्व कृषि मंत्री डॉक्टर रामकृष्ण कुसमरिया (बाबाजी) ने पथरिया से 2018 का विधानसभा चुनाव पार्टी से बगावत कर निर्दलीय लड़ा तो अपनी जमानत जब्त करा बैठे थे।
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कुल पांच बार सांसद रहे कुसमरिया
दमोह संसदीय क्षेत्र से चार बार और खजुराहो संसदीय क्षेत्र से एक बार सांसद चुने जाने वाले डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया 2013 में मध्य प्रदेश सरकार में कृषि मंत्री रहे थे। भाजपा ने उन्हें पथरिया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाया था। कुसमारिया 2018 में भी टिकट के लिए दावेदारी कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने वर्तमान पशुपालन मंत्री लखन पटेल को पथरिया विधानसभा से प्रत्याशी बना दिया, जिससे नाराज कुसमरिया ने पथरिया और दमोह विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों ही सीट से वे चुनाव हार गए। इसके साथ दमोह से जयंत मलैया और पथरिया से लखन पटेल भी चुनाव हार गए थे। राहुल सिंह दमोह और रामबाई सिंह परिहार पथरिया से विधायक का चुनाव जीती थीं, जिससे भाजपा की सरकार बनते बनते रह गई थी।
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कांग्रेस में गए पर नहीं लगा तो लौटे
हालांकि, कुसमरिया ने कहा था कि उनकी हार में भी उनकी जीत है। जानकार बताते हैं कि यदि कुसमरिया ने दोनों सीट से चुनाव न लड़ा होता तो यह दोनों सीट भाजपा जीत सकती थी। हालांकि, इस चुनाव में कुसमरिया की जमानत तक जब्त हो गई थी। इसके बाद वे राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हो गए, लेकिन यहां भी उनका मन जल्द बदल गया और फिर वे भाजपा में आ गए। वर्तमान में कुसमरिया मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में बतौर मंत्री काम कर रहे हैं।
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यह था वोट का आंकड़ा
कुसमरिया को दमोह विधानसभा से करीब 1133 और पथरिया विधानसभा से करीब 8755 वोट प्राप्त हुए थे। ऐसा कहा जाता है कि इन दोनों सीटों को हारने के कारण ही शिवराज सिंह चौहान सत्ता से बाहर हो गए थे। जयंत मलैया और लखन पटेल जितने वोटों से चुनाव हारे थे, उतने वोट कुसमरिया को दोनों विधानसभा में मिले थे, क्योंकि, राहुल सिंह ने जयंत मलैया को 798 वोट से चुनाव में हराया था और रामबाई परिहार ने लखन पटेल को 2205 वोट से चुनाव हराया था।
दमोह से चार बार रहे सांसद
रामकृष्ण कुसमरिया 1991, 1996, 1998, 1999 में दमोह से सांसद रहे और 2004 में खजुराहो लोकसभा से सांसद का चुनाव जीते।
दमोह लोकसभा में आठ विधानसभा क्षेत्र
दमोह रहली लोकसभा क्षेत्र आठ विधानसभा क्षेत्रों में बंटा है। इसमें दमोह, हटा, जबेरा, पथरिया, बड़ा मलहरा, देवरी, रहली, बंडा शामिल हैं
कुल मतदाता- 19,09,886
पुरुष मतदाता- 10,00,952
महिला मतदाता- 9,08,902
थर्ड जेंडर- 32
