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व्हिसलब्लोअर आनंद राय निलंबित: शिवराज सरकार की आलोचना करने की सजा, सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी पर सुनवाई 11 को

Fri, 08 Apr 2022 12:49 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Fri, 08 Apr 2022 12:49 PM IST
सार

व्यापमं मामले के व्हिसलब्लोअर रहे डॉ. आनंद राय की गुरुवार रात को गिरफ्तारी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ व्यापमं के पेपर लीक मामले में मुख्यमंत्री के ओएसडी ने एफआईआर कराई थी।  

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Dr. Anand Rai Suspended: Criticizing CM Shivraj's plans on social media, Health Department took action
डॉ. आनंद राय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले में व्हिसलब्लोअर रहे डॉ. आनंद राय को स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित कर दिया है। राय पर अपने दायित्वों में गंभीर लापरवाही बरतने और सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद सरकारी योजनाओं और नीतियों की सोशल मीडिया पर आलोचना करने का आरोप है। सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत यह कार्रवाई की गई है।
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इससे पहले गुरुवार रात को मुख्यमंत्री के ओएसडी लक्ष्मण सिंह मरकाम की एफआईआर के सिलसिले में आनंद राय को भोपाल पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। आनंद राय को शुक्रवार को भोपाल की कोर्ट में पेश किया जाएगा। इससे पहले गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आनंद राय की एफआईआर निरस्त करने की याचिका खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ आनंद राय के वकीलों ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। इस पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। 
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आनंद राय का दावा है कि उन्होंने टीईटी परीक्षा के पेपर का स्क्रीन शॉट वायरल होने की पोस्ट सोशल मीडिया पर की थी। इसमें लिखा था कि यह लक्ष्मण सिंह कौन हैं? इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ उप सचिव लक्ष्मण सिंह मरकाम ने उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाते हुए थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इस मामले की जांच भोपाल क्राइम ब्रांच कर रही है। आनंद राय ने अपनी याचिका में कहा था कि उनकी पोस्ट से किसी का अपमान नहीं किया गया।  
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निलंबन का आदेश जारी 
संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं की अपर संचालक सपना एम लोवंशी ने डॉ. आनंद राय को निलंबित करने संबंधी आदेश जारी किए। आदेश के अनुसार इंदौर के हुकुमचंद चिकित्सालय में पदस्थ्य डॉ. राय का निलंबन के बाद मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रीवा संभाग रहेगा। निलंबन काल में डॉ. राय को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। आदेश में लिखा है कि डॉ. राय वरिष्ठ अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान 29 मार्च को अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं थे, जबकि रजिस्टर में उनकी उपस्थिति दर्ज थी। वहीं, राय 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच सिर्फ 18 दिन ही कार्यालय में उपस्थित रहे। बाकी दिन उनके द्वारा अवकाश के लिए भी आवेदन नहीं दिया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि डॉ. राय के 29 मार्च को लघुकृत अवकाश आवेदन सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक इंदौर को प्रस्तुत किया गया था। जिस पर उन्हें मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन डॉ. राय मेडिकल बोर्ड के सामने भी प्रस्तुत नहीं हुए।

निलंबन आदेश में सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र
निलंबन आदेश में राय की 29 मार्च को की गई सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र है। इसमें राय ने लिखा है कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मुकेश सिंह को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विशेष तौर पर सिर्फ मेरी पत्नी डॉ. गौरी राय के कर्तव्य स्थल सिविल डिस्पेंसरी रेडियो कॉलोनी भेजा। इतनी दूर से यह भैया जी इंदौर में कार्यरत 400 डॉक्टर्स में से मात्र हम दो लोगों की जांच करने आए। इसे कहते हैं खिसियानी बिल्ली खम्बा नोंचे, इन अधिकारियों को अगर यह लग रहा है कि भाजपा आजीवन मध्य प्रदेश में सत्ता में रहेगी तो यह गलतफहमी है, इन जैसे अधिकारियों का क्या होगा, जब प्रदेश का निजाम बदल जाएगा, हुकूमत बदल जाएगी कम से कम अपना जमीर जिंदा रखो।

 
सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना की आलोचना की थी
निलंबन आदेश में राय पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा चलाई जा रही ‘सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना ने बढ़ाया दिव्यांगों का आत्मविश्वास’ पर अमर्यादित टिप्पणी करने की भी बात कही गई है। 22 मार्च को राय ने पोस्ट किया था कि योजना की जमीनी हकीकत आपके सामने लेकर आउंगा। विभाग ने शासन/प्रशासन एवं वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध प्रतिकूल एवं अमर्यादित टिप्पणी करने का भी दोषी राय को बताया है। इसके अलावा राय पर थानों में दर्ज प्रकरण की जानकारी विभागीय कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराने का भी दोषी बताया गया है।
 
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