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जन्माष्टमी: जहां रुक्मिणी ने कृष्ण को लिखी थी पाती, वहीं हुआ था उनका हरण; आज भी मौजूद हैं कृष्ण लीला के प्रमाण

Fri, 04 Sep 2026 11:05 AM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Fri, 04 Sep 2026 11:05 AM IST
सार

धार जिले का अमझेरा भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी से जुड़े पौराणिक प्रसंगों के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि माता रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को पाती लिखकर उन्हें मंदिर पहुंचने का संदेश दिया था, जिसके बाद श्रीकृष्ण उन्हें अपने साथ ले गए। अमका-झमका तीर्थ में प्राचीन मंदिर, सूरज कुंड, झरना, चामुंडा माता मंदिर और पांडवकालीन गुफा प्रमुख आकर्षण हैं। 

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Janmashtami Special Exploring the Holy Site of Rukmini’s Letter and Her Divine Elopement with Lord Krishna
अमझेरा में दर्ज है पौराणिक इतिहास - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

धार जिले में ग्राम अमझेरा को भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी वरण से जुड़े पौराणिक प्रसंग का साक्षी माना जाता है। यही वह कथा-भूमि है, जहां कृष्ण का प्रेम, पराक्रम और लोकजीवन एक साथ दिखाई देते हैं। अमझेरा के प्राचीन मंदिर, तालाब, छतरियां, कुएं और किला इस क्षेत्र की ऐतिहासिक समृद्धि की कहानी कहते हैं।
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किवदंती: माता रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को लिखी थी पाती
विंध्याचल की गोद में बसा माता अमका-झमका तीर्थ मालवा क्षेत्र की आखिरी सीमा पर बसा है। अमझेरा का नाम पूर्व में कुंदनपुर था। यहां के राजा भीष्मक थे और माता रुक्मिणी राजा की पुत्री थीं। माता रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण से विवाह करने की प्रतिज्ञा भी यहीं से ली थी। अमका-झमका तीर्थ के पुजारी सुमित पंडित ने बताया कि किवदंती है कि द्वापर काल में माता रुक्मिणी ने एक पाती (पत्र) भगवान श्रीकृष्ण को लिखी थी, जिसमें उल्लेख था कि तीन परिक्रमा के पूर्व पहुंच जाना। दूसरी परिक्रमा पूरी होते ही भगवान श्रीकृष्ण मंदिर पहुंच गए थे। यहां दर्शन के बाद माता रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण के साथ चली गई थीं। तब से इस स्थान का नाम श्रीकृष्ण-रुक्मिणी हरण स्थल के रूप में विख्यात हुआ।
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महाराजा लालसिंह ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था
1720 ई. में अमर शहीद राजा बख्तावर के वंशज महाराजा लालसिंह ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। लाल पाषाण से निर्मित मंदिर पर आज भी कृष्ण लीला अंकित है। मंदिर में प्राचीन सूरज कुंड, कल-कल बहता झरना और पवार वंश की कुलदेवी माता चामुंडा का मंदिर स्थित है। तीर्थ परिसर दो भागों में स्थित है। पहला भाग श्रीकृष्ण-रुक्मिणी हरण स्थल है, जबकि दूसरा भाग पांडवकालीन गुफा है। गुफा में माता झमका, प्राचीन शिवलिंग और भगवान दत्तात्रेय की प्राचीन मूर्ति स्थापित है। मान्यता है कि इस प्राचीन गुफा में पांडवों ने विश्राम किया था।
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जीर्ण-शीर्ण स्थिति की सूरत जनसहयोग से बदली
श्रीकृष्ण-रुक्मिणी हरण स्थल का निर्माण लगभग 5 हजार वर्ष पूर्व का बताया जाता है। विगत 15 वर्ष पूर्व स्थानीय ग्रामीणों ने तीर्थ के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया और इन 15 वर्षों में जनसहयोग से तीर्थ की सूरत बदल दी।स्थानीय ग्रामीणों और दानदाताओं के जनसहयोग से मंदिर का निर्माण कार्य आज भी लगातार जारी है। अब तक यहां सूरज कुंड, उद्यान, चामुंडा माता मंदिर का निर्माण, अंबिका माता मंदिर का निर्माण, कार्यालय आदि अन्य निर्माण कार्य दानदाताओं के सहयोग से किए गए हैं।
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