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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Dhar News: even after the High Court order, 13-year-old girl was harassed for hours for abortion

Dhar News: लचर स्वास्थ्य सेवाएं, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी 13 वर्षीय बच्ची गर्भपात के लिए घंटों हुई परेशान

Wed, 28 May 2025 04:36 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 28 May 2025 04:36 PM IST
सार

धार में 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता का हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद समय पर गर्भपात नहीं हो पाया। सिविल सर्जन ने सिकल सेल बीमारी और 108 वाहन देरी को कारण बताया। मामला राज्य स्तर पर संज्ञान में है और जांच जारी है। पीड़िता को इंदौर रेफर किया गया।

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Dhar News: even after the High Court order, 13-year-old girl was harassed for hours for abortion
हाईकोर्ट के आदेश के बाद नाबालिग गर्भपात कराने पहुंची थी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धार जिले से संवेदनशील और सवाल खड़े करने वाली एक खबर सामने आई है। यहां सिस्टम की लापरवाही ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। आरोप है कि धार में  13 साल की दुष्कर्म पीड़िता कों गर्भपात के लिए हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद, धार जिला भोज अस्पताल में दर-दर भटकना पड़ा। कोर्ट ने सुबह 11 बजे तक गर्भपात कराने का स्पष्ट आदेश दिया था, लेकिन सिस्टम की बेरुखी के कारण पीड़िता को अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिल सका। 
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पीड़िता के वकील नवनीत जैन ने आरोप लगाए कि पीड़िता कों काफ़ी समय इंतजार करना पड़ा, जिसके बाद मामले से केंद्रीय राज्य मंत्री और धार महू लोकसभा सांसद सांवित्री ठाकुर को अवगत करवाया। इसके बाद पीड़िता को गर्भपात के लिए इंदौर रेफर किया गया। बच्ची का पिता हाथ जोड़कर अस्पताल प्रशासन से विनती करता रहा, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। सवाल ये है, जब हाईकोर्ट का आदेश भी नहीं माना जाता, तो फिर न्याय की उम्मीद किससे की जाए?
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जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. मुकुंद बर्मन ने बताया कि लापरवाही के आरोप निराधार हैं। पीड़िता अस्पताल में सुबह 12 बजे आई, जिसके बाद तुरंत सभी जांचें की गईं क्योंकि माननीय हाई कोर्ट का आदेश था। रिपोर्ट में पता चला दुष्कर्म पीड़िता सिकल सेल बीमारी से पीड़ित भी है, लिहाजा गर्भपात धार में संभव नहीं था, लिहाजा इंदौर रेफर किया गया। इस दौरान कई बार नियमानुसार 108 को कॉल किया गया, लेकिन समय पर गाड़ी नहीं होने के कारण देरी हुई। सिविल सर्जन ने बताया चार बजे मरीज को इंदौर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। ताकि विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में तय गाइड लाइन के अनुसार सुरक्षित गर्भपात हो सके। 
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पूरे मामले में धार के मुख्य जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी आरके शिंदे ने कहा कि मामला पूरा संज्ञान में है और राज्य स्तर से पालन प्रतिवेदन मांगा गया है जो कि सिविल सर्जन से लिया जा रहा है। 
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