मध्यप्रदेश भीड़ हिंसा: पांच आरोपी गिरफ्तार, थानाध्यक्ष समेत पांच पुलिसकर्मी सस्पेंड, मुआवजे का एलान
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मध्यप्रदेश के धार जिले के मनावर स्थित खरिकिया गांव में छह किसानों के साथ हुए भीड़ हिंसा मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इतना ही नहीं इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में थानाध्यक्ष समेत पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी कर दिया गया है। राज्य सरकार ने मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का एलान किया है।
बुधवार को भीड़ द्वारा किए गए हमले में एक युवक की मौत हो गई थी, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज इंदौर के चोइथराम अस्पताल में चल रहा है। गुरुवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने अस्पताल का दौरा कर घायलों के हालत की जानकारी ली।
उन्होंने इस घटना को मानवता को शर्मसार करने वाली बताया। उन्होंने एलान किया कि घायलों का इलाज प्रदेश सरकार करवाएगी।
घटना के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा था कि धार के मनावर में आपसी विवाद में घटित हुई घटना बेहद दुःखद है। ऐसी घटनाएं मानवता को शर्मसार करने वाली होकर बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। पूरे मामले की प्रशासन को जांच के निर्देश दिए गए है। साथ ही जांच कर दोषियों पर सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए है।
यह था मामला
धार जिले के मनावर क्षेत्र में अपनी रकम वसूल करने आये सात लोगों पर ग्रामीणों ने बुधवार को पत्थरों और लाठियों से हमला कर दिया था। इस हमले में 35 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गयी, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये थे। घटना में हताहत लोगों के खिलाफ अफवाह फैलायी गयी थी कि वे बच्चा चुराने आये हैं।
डीजीपी ने कहा: वीडियो बनाने वालों को भी घटना रोकने के प्रयास करने चाहिये थे
धार जिले में बच्चा चोरी की अफवाह पर भीड़ हिंसा की घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विजय कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस मामले में हालांकि पुलिस अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती, लेकिन इस वाकये को रोकने के प्रयास मौके पर मौजूद उन लोगों को भी करने चाहिये थे जो इसका वीडियो बना रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दु:खद और दुर्भाग्यपूर्ण है। पुलिस इस मामले में जो भी कदम उठा सकती है, जरूर उठायेगी, लेकिन हमें समाज की मानसिकता पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। डीजीपी ने कहा कि भीड़ हिंसा में शामिल लोगों को काबू करने के प्रयासों में मौके पर मौजूद वे व्यक्ति भी शामिल होने चाहिये थे, जो घटना को रोकने के बजाय अपने मोबाइल कैमरों से इसका वीडियो बना रहे थे।
उन्होंने कहा कि पुलिस (भीड़ हिंसा की घटना में) हालांकि अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती, लेकिन पुलिस की अपनी सीमाएं हैं। डीजीपी ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अफवाहों के आधार पर किसी भी हिंसात्मक गतिविधि के अंग न बनें।
उन्होंने यह भी बताया कि मनावर क्षेत्र की हिंसक भीड़ में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही, एक थाना प्रभारी, एक उप निरीक्षक और तीन-चार अन्य पुलिस कर्मियों को निलंबित किया है। कर्तव्य में लापरवाही की पुष्टि होने पर क्षेत्र के अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जायेगी।
संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ सूबे के अलग-अलग स्थानों पर पिछले कई दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि इन विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जल्द रुक जायेगा।
