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देवास: दिल्ली पीजी हादसे में जान गंवाने वाले अर्पित का शव पहुंचा घर, भाई को देखते ही फूट-फूटकर रोई बहन

Tue, 08 Sep 2026 03:43 PM IST
देवास ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास Published by: देवास ब्यूरो Updated Tue, 08 Sep 2026 03:43 PM IST
सार

दिल्ली के बिल्डिंग हादसे में जान गंवाने वाले देवास निवासी अर्पित जाज का शव मंगलवार को घर पहुंचा। गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार हुआ। बहन फूट-फूटकर रोई। पिता ने प्रशासन पर नाराजगी जताई। परिवार ने अर्पित की आंखें दान कर दीं।

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Dewas resident Arpit dies in Delhi building collapse; last rites performed amidst a somber atmosphere.
बेटे का शव देख बिलख पड़े माता-पिता और बहन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में बिल्डिंग गिरने के हादसे में जान गंवाने वाले देवास के जय बजरंग नगर निवासी अर्पित जाज का शव मंगलवार सुबह देवास पहुंचा। शव के घर पहुंचते ही परिजनों, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। गमगीन माहौल में अर्पित का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान माता-पिता और बहन का रो-रोकर बुरा हाल रहा।

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अर्पित पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली गया था और वहीं रहकर पढ़ाई कर रहा था। रविवार रात दिल्ली में हुए बिल्डिंग हादसे के बाद से ही परिजनों का उससे संपर्क नहीं हो पा रहा था। हादसे की जानकारी मिलने के बाद परिजन दिल्ली पहुंचे और अस्पतालों से लेकर घटनास्थल तक उसकी तलाश करते रहे। काफी तलाश के बाद सोमवार सुबह अर्पित के शव मिलने की पुष्टि हुई। दिल्ली में पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद मंगलवार सुबह उसका शव देवास लाया गया। घर पर शव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गईं।
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भाई का चेहरा देखते ही फूट-फूटकर रोई बहन
अर्पित का शव घर पहुंचते ही बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। भाई को आखिरी बार देखने के बाद उसकी बहन फूट-फूटकर रोने लगी। अंतिम यात्रा के लिए जब शव ले जाया जाने लगा तो बहन उसे रोकने के लिए दौड़ पड़ी। परिजनों ने किसी तरह उसे संभाला। अर्पित के पिता भूपेंद्र जाज ने बेटे को कंधा दिया तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। गमगीन माहौल के बीच अर्पित का अंतिम संस्कार किया गया।
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अर्पित के पिता ने दिल्ली प्रशासन पर जताई नाराजगी
अर्पित के पिता भूपेंद्र जाज ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई के लिए दिल्ली गया था, लेकिन बिल्डिंग हादसे में उसकी मौत हो गई। उन्होंने दिल्ली प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बेटे की तलाश के दौरान परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि अस्पतालों और घटनास्थल पर अर्पित को ढूंढने के लिए परिजनों ने काफी मशक्कत की। इसके बाद अर्पित की पहचान हो सकी।

परिजनों ने दान की अर्पित की आंखें
बेटे की मौत के गम के बीच परिवार ने मानवता की मिसाल पेश की। परिजनों ने अर्पित की आंखें दान कर दीं, ताकि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को रोशनी मिल सके। परिवार के इस फैसले से अर्पित की आंखें किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में रोशनी बन सकेंगी। अर्पित देवास के कैलादेवी क्षेत्र के पास स्थित जय बजरंग नगर का रहने वाला था। वह पढ़ाई के लिए दिल्ली में रह रहा था। हादसे की सूचना मिलने के बाद से ही परिवार में चिंता का माहौल था और परिजन लगातार उसकी तलाश में जुटे हुए थे। शव मिलने के बाद उसे देवास लाया गया, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।

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