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Dewas News: कांग्रेस आई महिला के बचाव में, कहा- प्रशासन को जवाब देना होगा चप्पल कैसे उठाई
Wed, 29 Dec 2021 05:53 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Wed, 29 Dec 2021 05:53 PM IST
सार
मास्क न लगाने की बात पर हुए हंगामे के बाद अब पुलिस-प्रशासन की किरकिरी हो रही है। महिला को चप्पल मारने का मामला तूल पकड़ रहा है। शहर के कई लोग इस घटना में अफसरों की आलोचना कर रहे हैं तो कांग्रेस भी मैदान में कूदी है।
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कांग्रेस नेत्री नूरी खान की फेसबुक पोस्ट।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मास्क न लगाने की बात पर हुए हंगामे के बाद अब पुलिस-प्रशासन की किरकिरी हो रही है। महिला को चप्पल मारने का मामला तूल पकड़ रहा है। शहर के कई लोग इस घटना में अफसरों की आलोचना कर रहे हैं तो कांग्रेस भी मैदान में कूदी है। कांग्रेस ने कहा है कि महिला पर दर्ज किया गया केस वापस लिया जाए और उपस्थित अधिकारियों पर केस दर्ज किया जाए।
दरअसल देवास के सयाजी गेट पर मंगलवार को एसडीएम प्रदीप सोनी, सीएसपी विवेक सिंह चौहान, टीआई उमराव सिंह, तहसीलदार पूनम तोमर पुलिस बल के साथ मास्क को लेकर चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान जागृति माधवानी मिश्रा नामक महिला स्कूटी से गुजरी। महिला ने मास्क नहीं लगाया था। इस पर पुलिस ने उसे रोका। चालान बनाने की बात करने पर महिला ने कहा कि उसके पास रुपये नहीं है। चालान नहीं भर सकती। पुलिस ने कहा कि स्कूटी जब्त कर लेंगे तो महिला ने कहा कि जब्त कर लीजिए, मैं कोर्ट से छुड़ा लूंगी। इस पर वहां बैठे एसडीएम सोनी ने कहा कि महिला को थाने ले जाएं। इस पर महिला भड़क गई। उसने कहा कि ऐसा क्या अपराध किया जो थाने ले जाओगे। एसडीएम से उसकी बहस होने लगी। इस दौरान वहां खड़ी महिला होमगार्ड ने उसे रोका तो उसने होमगार्ड को धक्का दे दिया। इससे वह दूर गिर गई। बाद में उस पर चप्पल उठाई और सिर में मार दी। इस घटना ने काफी तूल पकड़ा और आखिरकार देर रात को महिला जागृति माधवानी मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
पुलिस ने नहीं लिखी महिला की रिपोर्ट
एसडीएम और सीएसपी की मौजूदूगी में हुई इस घटना की चौतरफा आलोचना हुई। कई लोगों ने कहा कि अगर महिला ने मास्क नहीं लगाया था तो उसे समझा सकते थे, चप्पल उठाकर मारने की क्या जरूरत थी। इस तरह सरेराह महिला का अपमान नहीं करना था। उधर कुछ लोगों ने कहा कि महिला की गलती थी। उसे हुज्जत नहीं करना थी। इस मामले में यह बात भी सामने आ रही है कि महिला केस दर्ज होने के बाद क्रॉस कायमी करवाने के लिए थाने गई थी, लेकिन पुलिस ने उसकी तरफ से केस दर्ज नहीं किया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में पुलिस महिला के खिलाफ केस दर्ज नहीं कर रही थी लेकिन एसडीएम के दबाव में पुलिस को कायमी करनी पड़ी। पूरे मामले में एसडीएम की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे मे है। पहले भी वे विवादों से घिरे रहे हैं और उनके खिलाफ हाल ही में अभिभाषकों ने भी विरोध जताया था।
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दरअसल देवास के सयाजी गेट पर मंगलवार को एसडीएम प्रदीप सोनी, सीएसपी विवेक सिंह चौहान, टीआई उमराव सिंह, तहसीलदार पूनम तोमर पुलिस बल के साथ मास्क को लेकर चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान जागृति माधवानी मिश्रा नामक महिला स्कूटी से गुजरी। महिला ने मास्क नहीं लगाया था। इस पर पुलिस ने उसे रोका। चालान बनाने की बात करने पर महिला ने कहा कि उसके पास रुपये नहीं है। चालान नहीं भर सकती। पुलिस ने कहा कि स्कूटी जब्त कर लेंगे तो महिला ने कहा कि जब्त कर लीजिए, मैं कोर्ट से छुड़ा लूंगी। इस पर वहां बैठे एसडीएम सोनी ने कहा कि महिला को थाने ले जाएं। इस पर महिला भड़क गई। उसने कहा कि ऐसा क्या अपराध किया जो थाने ले जाओगे। एसडीएम से उसकी बहस होने लगी। इस दौरान वहां खड़ी महिला होमगार्ड ने उसे रोका तो उसने होमगार्ड को धक्का दे दिया। इससे वह दूर गिर गई। बाद में उस पर चप्पल उठाई और सिर में मार दी। इस घटना ने काफी तूल पकड़ा और आखिरकार देर रात को महिला जागृति माधवानी मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
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पुलिस ने नहीं लिखी महिला की रिपोर्ट
एसडीएम और सीएसपी की मौजूदूगी में हुई इस घटना की चौतरफा आलोचना हुई। कई लोगों ने कहा कि अगर महिला ने मास्क नहीं लगाया था तो उसे समझा सकते थे, चप्पल उठाकर मारने की क्या जरूरत थी। इस तरह सरेराह महिला का अपमान नहीं करना था। उधर कुछ लोगों ने कहा कि महिला की गलती थी। उसे हुज्जत नहीं करना थी। इस मामले में यह बात भी सामने आ रही है कि महिला केस दर्ज होने के बाद क्रॉस कायमी करवाने के लिए थाने गई थी, लेकिन पुलिस ने उसकी तरफ से केस दर्ज नहीं किया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में पुलिस महिला के खिलाफ केस दर्ज नहीं कर रही थी लेकिन एसडीएम के दबाव में पुलिस को कायमी करनी पड़ी। पूरे मामले में एसडीएम की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे मे है। पहले भी वे विवादों से घिरे रहे हैं और उनके खिलाफ हाल ही में अभिभाषकों ने भी विरोध जताया था।
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महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष ने कहा- चप्पल से पीटना गलत
Dewas: महिला पर चप्पल तानती महिला पुलिसकर्मी
- फोटो : फाइल फोटो
इस मामले में कांग्रेस ने घटनाक्रम की आलोचना की है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना जायसवाल ने कहा कि मास्क न लगाने पर महिला पुलिस द्वारा महिला को चप्पल से पीटना गलत है। यदि महिला ने मास्क नहीं लगाया था तो उसे समझाइश देते। उस महिला को भी कोरोना संक्रमण के चलते सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन पुलिस द्वारा पीटना गलत है। महिला पुलिस महिलाओं की सुरक्षा के लिए है न कि चप्पल से पीटने के लिए।
अर्चना जायसवाल ने कहा मैं शिवराज सिंह जी से कहना चाहती हूं कि महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाइए। ये अच्छी सोच नहीं है कि इस तरह की घटना हो। जिस भी पुलिसकर्मी ने ये किया है उसके खिलाफ एक्शन लिया जाए। कांग्रेस नेत्री नूरी खान ने भी फेसबुक पर उक्त घटना का वीडियो शेयर कर इसकी निंदा की है। नूरी खान ने लिखा कि भाजपा की बड़ी-बड़ी रैलियों में मास्क न हो तो कोई दिक्कत नहीं, प्रदेश के गृह मंत्री स्वयं मास्क न पहनें तो कोई दिक्कत नहीं लेकिन देवास में महिला ने मास्क के लिए चालान बनवाने के लिए मना कर दिया तो उसे थाने ले जाने के लिए जबर्दस्ती की गई। धक्का सेल्फ डिफेंस में लगा है। फिर भी बाद में उसे चप्पलों से पीटा गया। देवास प्रशासन का ये रवैया बर्दाश्त के काबिल नहीं है। नूरी ने लिखा कि बहन आपको डरने की जरूरत नहीं है, मैं आपके साथ हूं। प्रशासन को जवाब देना पड़ेगा कि आखिर चप्पल कैसे उठाई। एक आम नागरिक वो भी महिला के साथ ये दुर्व्यवहार उचित नहीं है।
प्रशासन की गलती, महिला पर हाथ उठाना निंदनीय
देवास शहर कांग्रेस ने कहा है कि कोरोना को लेकर प्रशासन अपनी स्थिति स्पष्ट करे। पुलिसकर्मी द्वारा महिला पर हाथ उठाना निंदनीय है। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी व प्रवक्ता सुधीर शर्मा ने इस कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि महिला पर दर्ज की गई शिकायत वापस ली जाए और महिला पुलिसकर्मी और उपस्थित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए। प्रशासन की पूर्ण रूप से इस प्रकरण में गलती है।
प्रशासन को अगर कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लोगों को मास्क पहनना जरूरी करना था तो उसके लिए पहले सूचना देनी थी। शहर में आज भी 99 प्रतिशत लोग मास्क नहीं पहन रहे हैं। यहां तक कि सरकारी अधिकारी-कर्मचारी भी मास्क नहीं पहनते। अचानक मास्क लगाने की सख़्ती एवं चालान काटने की कार्यवाही लोगों के साथ अन्याय है। एक तरफ तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कह रहे हैं कि नाइट कर्फ्यू के अलावा कोई प्रतिबंध नहीं है वहीं दूसरी ओर शहर में प्रशासनिक एवं राजनीतिक कार्यक्रम बड़ी भीड़ के साथ हो रहे हैं। खेलों के महा आयोजन और मीना बाजार लग रहा है। राजनीतिक और सामाजिक रैलियां निकल रही है। इसी बीच अचानक जिला प्रशासन ओमिक्रॉन की दस्तक की दहशत के बीच शहर के लोगों पर मास्क लगाने को लेकर सख्ती बरतना शुरू कर देता है। यही नहीं एसडीएम प्रदीप सोनी की उपस्थिति में एक महिला पुलिसकर्मी दूसरी महिला को मास्क नहीं लगाने को लेकर चप्पल तक मार देती है।
कांग्रेस का कहना है कि ओमिक्रॉन का खतरा इतना ही अधिक है तो प्रशासन पहले अपनी गाइडलाइन जारी करे। सामाजिक राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यक्रमों पर रोक लगाए। इसके बाद कोई भी व्यक्ति नियमों को तोड़ता है तो फिर कार्यवाही की जाए। अनायास ही कुछ पुलिसवालों को इकट्ठा कर लेना और अधिकारियों की उपस्थिति में कार्रवाई करने लग जाना उचित नहीं है।
अर्चना जायसवाल ने कहा मैं शिवराज सिंह जी से कहना चाहती हूं कि महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाइए। ये अच्छी सोच नहीं है कि इस तरह की घटना हो। जिस भी पुलिसकर्मी ने ये किया है उसके खिलाफ एक्शन लिया जाए। कांग्रेस नेत्री नूरी खान ने भी फेसबुक पर उक्त घटना का वीडियो शेयर कर इसकी निंदा की है। नूरी खान ने लिखा कि भाजपा की बड़ी-बड़ी रैलियों में मास्क न हो तो कोई दिक्कत नहीं, प्रदेश के गृह मंत्री स्वयं मास्क न पहनें तो कोई दिक्कत नहीं लेकिन देवास में महिला ने मास्क के लिए चालान बनवाने के लिए मना कर दिया तो उसे थाने ले जाने के लिए जबर्दस्ती की गई। धक्का सेल्फ डिफेंस में लगा है। फिर भी बाद में उसे चप्पलों से पीटा गया। देवास प्रशासन का ये रवैया बर्दाश्त के काबिल नहीं है। नूरी ने लिखा कि बहन आपको डरने की जरूरत नहीं है, मैं आपके साथ हूं। प्रशासन को जवाब देना पड़ेगा कि आखिर चप्पल कैसे उठाई। एक आम नागरिक वो भी महिला के साथ ये दुर्व्यवहार उचित नहीं है।
प्रशासन की गलती, महिला पर हाथ उठाना निंदनीय
देवास शहर कांग्रेस ने कहा है कि कोरोना को लेकर प्रशासन अपनी स्थिति स्पष्ट करे। पुलिसकर्मी द्वारा महिला पर हाथ उठाना निंदनीय है। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी व प्रवक्ता सुधीर शर्मा ने इस कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि महिला पर दर्ज की गई शिकायत वापस ली जाए और महिला पुलिसकर्मी और उपस्थित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए। प्रशासन की पूर्ण रूप से इस प्रकरण में गलती है।
प्रशासन को अगर कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लोगों को मास्क पहनना जरूरी करना था तो उसके लिए पहले सूचना देनी थी। शहर में आज भी 99 प्रतिशत लोग मास्क नहीं पहन रहे हैं। यहां तक कि सरकारी अधिकारी-कर्मचारी भी मास्क नहीं पहनते। अचानक मास्क लगाने की सख़्ती एवं चालान काटने की कार्यवाही लोगों के साथ अन्याय है। एक तरफ तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कह रहे हैं कि नाइट कर्फ्यू के अलावा कोई प्रतिबंध नहीं है वहीं दूसरी ओर शहर में प्रशासनिक एवं राजनीतिक कार्यक्रम बड़ी भीड़ के साथ हो रहे हैं। खेलों के महा आयोजन और मीना बाजार लग रहा है। राजनीतिक और सामाजिक रैलियां निकल रही है। इसी बीच अचानक जिला प्रशासन ओमिक्रॉन की दस्तक की दहशत के बीच शहर के लोगों पर मास्क लगाने को लेकर सख्ती बरतना शुरू कर देता है। यही नहीं एसडीएम प्रदीप सोनी की उपस्थिति में एक महिला पुलिसकर्मी दूसरी महिला को मास्क नहीं लगाने को लेकर चप्पल तक मार देती है।
कांग्रेस का कहना है कि ओमिक्रॉन का खतरा इतना ही अधिक है तो प्रशासन पहले अपनी गाइडलाइन जारी करे। सामाजिक राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यक्रमों पर रोक लगाए। इसके बाद कोई भी व्यक्ति नियमों को तोड़ता है तो फिर कार्यवाही की जाए। अनायास ही कुछ पुलिसवालों को इकट्ठा कर लेना और अधिकारियों की उपस्थिति में कार्रवाई करने लग जाना उचित नहीं है।
