{"_id":"626155497dc346612f369832","slug":"dewas-bjp-leader-reached-the-collectorate-by-accusing-cmho-of-corruption-gave-a-memorandum-and-said-the-corrupt-officer-should-be-removed-from-here","type":"story","status":"publish","title_hn":"देवास: सीएमएचओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर भाजपा नेता पहुंचे कलेक्टोरेट, ज्ञापन देकर बोले- भ्रष्ट अफसर को यहां से हटाया जाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देवास: सीएमएचओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर भाजपा नेता पहुंचे कलेक्टोरेट, ज्ञापन देकर बोले- भ्रष्ट अफसर को यहां से हटाया जाए
Thu, 21 Apr 2022 06:29 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Thu, 21 Apr 2022 06:29 PM IST
सार
अपनी ही सरकार में भाजपा नेताओं को एक अधिकारी के खिलाफ ज्ञापन देना पड़ रहा है। देवास में भाजपा नेताओं ने सीएमएचओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर कलेक्टोरेट में ज्ञापन दिया और उन्हें देवास से हटाने की मांग की है।
विज्ञापन
एसडीएम के सामने भाजपा नेता करते रहे सीएमएचओ के खिलाफ नारेबाजी
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्यप्रदेश के देवास में स्वास्थ्य सेवाएं कैसी है इसे इसी से समझा जा सकता है कि अपनी ही सरकार में भाजपा पदाधिकारियों को आंदोलन करना पड़ रहा है। आंदोलन भी व्यवस्था के खिलाफ नहीं बल्कि अधिकारी के खिलाफ। भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर खुद की सरकार होने के बावजूद भाजपा को आंदोलन क्यों करना पड़ा रहा है।
दरअसल मामला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमपी शर्मा का है। उनके खिलाफ भाजपा के कुछ पदाधिकारी लामबंद हो गए हैं। भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। हुआ यूं कि जिला अस्पताल में नर्सिंग ऑफिसर को चाइल्ड केयर लीव स्वीकृत नहीं होने से भाजपा पदाधिकारी नाराज हुए। सीएमएचओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे और उनके खिलाफ नारेबाजी की। भाजपा नेताओं ने सीएमएचओ पर रुपये मांगने के आरोप लगाकर कहा कि ऐसे भ्रष्ट अफसर भाजपा सरकार की छवि खराब करने के प्रयास कर रहे हैं। जिला अस्पताल में एक नर्स पदस्थ है। जिसकी चार पांच माह पहले प्रसूति हुई थी। ऐसी शासकीय महिलाओं के लिए सरकार ने छुट्टी का प्रावधान रखा है। पीड़ित नर्स पिछले 20 दिनों से छुट्टी की गुहार लगा रही है लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा महिला को अवकाश नहीं दिया गया। भाजपा नेताओं ने बताया नर्स से अप्रत्यक्ष रूप से रुपयों की मांग की जा रही है। इसके विरोध में भाजपा पदाधिकारी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे जहां उन्होंने सीएमएचओ के विरोध में जमकर नारेबाजी की व सीएमएचओ को हटाने की मांग वरिष्ठ अधिकारियों से की।
आवेदन के बाद भी नहीं दी छुट्टी
इस मामले में भाजपा जिला महामंत्री राजेश यादव ने बताया कि जिला अस्पताल की एक नर्स है जिसकी चार पांच माह पहले प्रसुति हुई थी। ऐसी शासकीय महिलाओं के लिए सरकार ने छुट्टी का प्रावधान रखा है। उस प्रावधान के अंतर्गत महिला नर्स ने 20 दिन से जिला अस्पताल में आवेदन दिया गया था। किंतु सीएमएचओ ने छुट्टी नहीं दी थी। सीएमएचओ ने नर्स से कहा था कि कलेक्टर के आदेश हैं कि किसी को भी छुट्टी नहीं मिलेगी। जब नर्स सीएमएचओ के पास आवेदन लेकर जाती है तो वे कहते है कि लीगल-वे में आओ और छुट्टी मंजूर हो जाएगी। हम मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री से मांग करेंगे की ऐसे सीएमएचओ को तत्काल यहां से हटाया जाए। सीएमएचओ डॉ. शर्मा ने कहा कि यह प्रकरण सिविल सर्जन के कार्यालय का था। मेरे पास इस प्रकार का कोई आवेदन नहीं आया। जब मेरे कार्यालय में आवेदन आएगा तो मैं उसका निराकरण करुंगा। रुपयों की मांग करने वालों के नाम बताएंगे तो हम उनपर कार्रवाई करेंगे। जो भी आरोप लगाए गए हैं वे निराधार हैं।
विज्ञापन
विवादित रही है सीएमएचओ की कार्यशैली
सीएमएचओ के खिलाफ आरोप लगने का यह पहला मामला नहीं है। उनकी कार्यशैली शुरू से विवादित ही रही है। कुछ समय पहले उनकी जगह दूसरे अधिकारी को सीएमएचओ बना दिया गया था लेकिन राजनीतिक पहुंच के चलते कुछ ही दिनों में एमपी शर्मा फिर से सीएमएचओ की कुर्सी पर काबिज हो गए। विभाग के कुछ कर्मचारी भी उनकी कार्यशैली से नाखुश हैं। कोरोना की दूसरी लहर में भाजपा कार्यकर्ता के परिजन की मृत्यु पर जब लापरवाही के आरोप लगाए गए तो सीएमएचओ ने उक्त कार्यकर्ता से अभद्रता की थी। इसके बाद संघ के पदाधिकारियों तक शिकायत पहुंची थी। मामले में भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा सीएमएचओ को बचाने के आरोप भी लगे। यही वजह रही कि ऊपर तक शिकायत होने के बावजूद वे कुर्सी पर काबिज रहे। अब जबकि भाजपा संगठन के पदाधिकारियों ने उन पर खुलकर आरोप लगाए हैं तो सवाल उठ रहे हैं कि सत्ता में होने के बावजूद भाजपाइयों को अधिकारी के खिलाफ आंदोलन करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
दरअसल मामला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमपी शर्मा का है। उनके खिलाफ भाजपा के कुछ पदाधिकारी लामबंद हो गए हैं। भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। हुआ यूं कि जिला अस्पताल में नर्सिंग ऑफिसर को चाइल्ड केयर लीव स्वीकृत नहीं होने से भाजपा पदाधिकारी नाराज हुए। सीएमएचओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे और उनके खिलाफ नारेबाजी की। भाजपा नेताओं ने सीएमएचओ पर रुपये मांगने के आरोप लगाकर कहा कि ऐसे भ्रष्ट अफसर भाजपा सरकार की छवि खराब करने के प्रयास कर रहे हैं। जिला अस्पताल में एक नर्स पदस्थ है। जिसकी चार पांच माह पहले प्रसूति हुई थी। ऐसी शासकीय महिलाओं के लिए सरकार ने छुट्टी का प्रावधान रखा है। पीड़ित नर्स पिछले 20 दिनों से छुट्टी की गुहार लगा रही है लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा महिला को अवकाश नहीं दिया गया। भाजपा नेताओं ने बताया नर्स से अप्रत्यक्ष रूप से रुपयों की मांग की जा रही है। इसके विरोध में भाजपा पदाधिकारी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे जहां उन्होंने सीएमएचओ के विरोध में जमकर नारेबाजी की व सीएमएचओ को हटाने की मांग वरिष्ठ अधिकारियों से की।
विज्ञापन
आवेदन के बाद भी नहीं दी छुट्टी
इस मामले में भाजपा जिला महामंत्री राजेश यादव ने बताया कि जिला अस्पताल की एक नर्स है जिसकी चार पांच माह पहले प्रसुति हुई थी। ऐसी शासकीय महिलाओं के लिए सरकार ने छुट्टी का प्रावधान रखा है। उस प्रावधान के अंतर्गत महिला नर्स ने 20 दिन से जिला अस्पताल में आवेदन दिया गया था। किंतु सीएमएचओ ने छुट्टी नहीं दी थी। सीएमएचओ ने नर्स से कहा था कि कलेक्टर के आदेश हैं कि किसी को भी छुट्टी नहीं मिलेगी। जब नर्स सीएमएचओ के पास आवेदन लेकर जाती है तो वे कहते है कि लीगल-वे में आओ और छुट्टी मंजूर हो जाएगी। हम मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री से मांग करेंगे की ऐसे सीएमएचओ को तत्काल यहां से हटाया जाए। सीएमएचओ डॉ. शर्मा ने कहा कि यह प्रकरण सिविल सर्जन के कार्यालय का था। मेरे पास इस प्रकार का कोई आवेदन नहीं आया। जब मेरे कार्यालय में आवेदन आएगा तो मैं उसका निराकरण करुंगा। रुपयों की मांग करने वालों के नाम बताएंगे तो हम उनपर कार्रवाई करेंगे। जो भी आरोप लगाए गए हैं वे निराधार हैं।
विज्ञापन
विवादित रही है सीएमएचओ की कार्यशैली
सीएमएचओ के खिलाफ आरोप लगने का यह पहला मामला नहीं है। उनकी कार्यशैली शुरू से विवादित ही रही है। कुछ समय पहले उनकी जगह दूसरे अधिकारी को सीएमएचओ बना दिया गया था लेकिन राजनीतिक पहुंच के चलते कुछ ही दिनों में एमपी शर्मा फिर से सीएमएचओ की कुर्सी पर काबिज हो गए। विभाग के कुछ कर्मचारी भी उनकी कार्यशैली से नाखुश हैं। कोरोना की दूसरी लहर में भाजपा कार्यकर्ता के परिजन की मृत्यु पर जब लापरवाही के आरोप लगाए गए तो सीएमएचओ ने उक्त कार्यकर्ता से अभद्रता की थी। इसके बाद संघ के पदाधिकारियों तक शिकायत पहुंची थी। मामले में भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा सीएमएचओ को बचाने के आरोप भी लगे। यही वजह रही कि ऊपर तक शिकायत होने के बावजूद वे कुर्सी पर काबिज रहे। अब जबकि भाजपा संगठन के पदाधिकारियों ने उन पर खुलकर आरोप लगाए हैं तो सवाल उठ रहे हैं कि सत्ता में होने के बावजूद भाजपाइयों को अधिकारी के खिलाफ आंदोलन करना पड़ रहा है।
