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कान्हा में जानलेवा वायरस का कहर जारी: तीन वर्षीय बाघिन की मौत; मरने वाले बाघों का आंकड़ा आठ पहुंचा

Wed, 07 Oct 2026 07:43 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडला Published by: शबाहत हुसैन Updated Wed, 07 Oct 2026 07:43 PM IST
सार

कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से संक्रमित तीन वर्षीय बाघिन की उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही वायरस से मरने वाले बाघों की संख्या आठ हो गई। बाघिन दूसरे क्षेत्र से भटककर कान्हा पहुंची थी।

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Deadly virus continues to wreak havoc in Kanha: Three-year-old tigress dies.
कान्हा नेशनल पार्क

विस्तार

कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से संक्रमित तीन वर्षीय बाघिन की उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही कान्हा में इस वायरस के संक्रमण से मरने वाले बाघों की संख्या आठ हो गई है। करीब तीन महीने के अंतराल के बाद वायरस से बाघ की मौत का नया मामला सामने आया है।

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गश्ती दल ने 26 अगस्त को मुक्की परिक्षेत्र में कोर और बफर जोन की सीमा के पास एक बाघिन को बेहद कमजोर हालत में अकेले घूमते देखा था। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए वन अमले ने 27 अगस्त को उसे मुक्की स्थित वन्यप्राणी उपचार केंद्र में भर्ती कराया। वन्यजीव चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार शुरू किया गया। उपचार के दौरान बाघिन में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के लक्षण पाए गए। चिकित्सकों की लगातार निगरानी और उपचार के बावजूद बाघिन की मौत हो गई।

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राष्ट्रीय मानकों के अनुसार हुआ शव परीक्षण
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्धारित मानकों और प्रक्रिया के तहत बुधवार को बाघिन का शव परीक्षण कराया गया। यह प्रक्रिया कान्हा के वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी और बैहर के पशु चिकित्सक की टीम ने पूरी की। इसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार बाघिन का शवदाह कराया गया।

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शव परीक्षण के दौरान चिकित्सकों की टीम ने बाघिन के आवश्यक जैविक नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को फोरेंसिक और पैथोलॉजिकल जांच के लिए जबलपुर स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बाघिन की मौत के वास्तविक कारण की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

दूसरे क्षेत्र से भटककर कान्हा पहुंची थी बाघिन
उद्यान प्रबंधन के अनुसार मृत बाघिन कान्हा टाइगर रिजर्व की मूल निवासी नहीं थी। जांच में पता चला कि वह किसी दूसरे क्षेत्र से भटककर कान्हा के जंगल में पहुंची थी। मुक्की परिक्षेत्र में कमजोर हालत में मिलने के बाद उसकी जान बचाने के उद्देश्य से उसे उपचार केंद्र में भर्ती कराया गया था।

कान्हा टाइगर रिजर्व के उप संचालक पीके वर्मा ने बताया कि मुक्की के उपचार केंद्र में भर्ती बाघिन में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के लक्षण पाए गए थे। उन्होंने पुष्टि की कि बाघिन कान्हा की निवासी नहीं थी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत शव परीक्षण के बाद उसका शवदाह कर दिया गया।

अप्रैल में शुरू हुआ था मौतों का सिलसिला
कान्हा में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बाघों की मौत का सिलसिला इस वर्ष अप्रैल में शुरू हुआ था। सरही परिक्षेत्र में अमाही नामक बाघिन और उसके 11 माह के चार शावक वायरस की चपेट में आए थे। पहले शावक की मौत 21 अप्रैल को हुई। इसके बाद 23 और 25 अप्रैल को दो अन्य शावकों ने दम तोड़ दिया। 29 अप्रैल को अमाही बाघिन और उसके चौथे शावक की भी मौत हो गई।

इसके बाद 19 मई को मुक्की परिक्षेत्र में करीब पांच वर्षीय बाघ और 23 जून को करीब तीन वर्षीय बाघ की भी इस वायरस से मौत हुई थी। अब तीन वर्षीय बाघिन की मौत के साथ कान्हा में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से मरने वाले बाघों की संख्या आठ हो गई है।

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