फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Damoh News ›   On the occasion of Holi, a sweet garland made of sugar ends the hatred of centuries

Damoh: होली पर्व पर शक्कर से बनी मीठी माला खत्म कर देती है सदियों का बैर, परंपरा को निभाते आ रहे नेमा परिवार

Mon, 25 Mar 2024 05:20 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: शबाहत हुसैन Updated Mon, 25 Mar 2024 05:20 PM IST
सार

Damoh: होली का त्यौहार पूरे देश में मनाया जाता है और इस पर्व को रंगों का त्यौहार कहा जाता है। इस दिन पुराने बैर भुलाने की भी परंपरा है। जिसमें लोग एक दूसरे को गुलाल लगाकर बैर खत्म करने की शुरुआत करते हैं, लेकिन बुंदेलखंड के दमोह जिले में दो लोगों के बीच चल रहे बैर को खत्म करने की एक विशेष परंपरा है।

विज्ञापन
On the occasion of Holi, a sweet garland made of sugar ends the hatred of centuries
मीठी माला खत्म कर देती है सदियों का बैर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

होली पर्व पर शक्कर की चासनी से बनी मीठी माला का निर्माण किया जाता है। जिसे दो लोगों के बीच चलने वाले सदियों के बैर को खत्म करने के लिए जाना जाता है। जिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को यह शक्कर से बनी  मीठी माला पहनाता है और इसकी मिठास के साथ ही पुराने बैर खत्म हो जाते हैं।

विज्ञापन


इस माला का निर्माण करने वाले स्टेशन चौराहा निवासी 72 वर्षीय रमेश नेमा ने बताया कि शक्कर की चाशनी से बनी मीठी माला दो लोगों के बीच चले आ रहे वर्षों पुराने बैर को खत्म कर देती है। उन्होंने बताया कि यह उनका पुश्तैनी काम है उनके पिता से उन्होंने इस परंपरा को सीखा था, जिसे वह आज भी जीवित रखे हुए हैं। उनके इस काम में उनकी पत्नी गीता नेमा सहयोग करती हैं। दमोह जिले में उनके अलावा और कहीं इसका निर्माण नहीं होता।
विज्ञापन


नेमा बीएससी, एमए और एलएलबी हैं, लेकिन उन्होंने नौकरी ना कर अपने बुजुर्गों की परंपरा को बनाए रखने की खातिर इस कारोबार को चालू रखा। उनके दो बेटे हैं, जो प्रदेश के बाहर है। एक नौकरी में दूसरा व्यवसाय में हैं। बेटों ने कभी इस काम को नहीं किया इसलिए उनके बाद इस शक्कर की माला को बनाने वाला कोई नहीं रहेगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे बनती है मीठी माला
रमेश नेमा ने बताया कि उनकी यह तीसरी पीढ़ी चल रही है, जो इस मीठी माला को बना रही है। उन्होंने बताया कि शक्कर की चाशनी को धागे के साथ सांचे में भरकर सूखने रख दिया जाता है और जब चाशनी सूख जाती है तो इन सांचों को खोल दिया जाता है, जिसके अंदर से शक्कर की माला बनकर बाहर आ जाती है। नेमा ने बताया कि उनकी बनी यह माला समूचे बुंदेलखंड में विक्रय के लिए जाती है। इसके साथ ही तेंदूखेड़ा के लोग यह मीठी माला ले जाते है और जबलपुर में जाकर बेचते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed