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Nag Panchami 2023: दमोह के नागमणि गांव में प्रचलित है अनोखी प्रथा, नागपंचमी के दिन चूल्हे पर नहीं चढ़ती कढ़ाई

Mon, 21 Aug 2023 10:16 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Mon, 21 Aug 2023 10:16 AM IST
सार

Nag Panchami 2023: मध्यप्रदेश के दमोह के नागमणि गांव में एक अनोखी परंपरा प्रचलित है। नागपंचमी के दिन गांव में किसी भी घर में पकवान नहीं बनाए जाते और न ही किसी घर में कढ़ाई चढ़ती है। 

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Nag Panchami 2023: Unique tradition of Damoh Nagmani village pan does not go on the stove on  Nag panchami
नागमणि गांव में स्थित नागदेवता का मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दमोह जिले के पटेरा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले नागमणि गांव में नागपंचमी के दिन एक चूल्हे पर कढ़ाई नहीं चढ़ती। यदि किसी ने चूल्हे पर कढ़ाई चढ़ा दी तो तत्काल काले सांप प्रकट हो जाते हैं। इस गांव में सैकड़ों की संख्या में काले नाग घूमते रहते हैं, लेकिन आज तक किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। वर्षों से इस गांव के लोग अपने पूर्वजों की परंपरा को निभाते हुए नाग पंचमी के दिन मंदिर में जाकर दाल, बाटी बनाकर नागदेव को भोग लगाते हैं। इस दिन गांव के किसी भी घर में चूल्हे पर कढ़ाई नहीं चढ़ाते और न ही पकवान बनाते हैं।
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बताया जाता है कि कई वर्ष पहले किसी महिला ने पकवान बनाने का प्रयास किया था तो उसके घर में सैकड़ों की संख्या में नाग निकल आए थे। डरे सहमे लोग मंदिर पहुंचे और नागदेव से माफी मांगी तो घर से सभी नाग जमीन में समा गए। गांव के लोगों का मानना है कि उनके गांव के लोगों की रक्षा स्वयं नागदेव करते हैं इसलिए गांव का कोई भी व्यक्ति नाग देखकर भयभीत नहीं होता।
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गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उनके गांव में नागदेव के जोड़े की प्रतिमा है और उनके गांव का नाम भी नागमणि है। उनके पूर्वजों ने नागदेव की शक्ति का आभास किया है इसलिए वह लोग भी अपने पूर्वजों की मान्यता का पालन कर रहे हैं। इस गांव की यह भी मान्यता है कि कई साल पहले नागपंचमी के दिन किसी ने घर में पकवान बनाने के लिए चूल्हे पर कढ़ाई चढ़ाई थी तो उसमें एक नाग गिरकर मर गया था तब से इस गांव में नागपंचमी पर कढ़ाई नहीं चढ़ाई जाती। 

70 वर्षीय भूपत तिवारी ने बताया कि उनके पूर्वजों ने बताया था कि कई साल पहले गांव में किसी ने  नागपंचमी के दिन पकवान बनाने के लिए जैसे ही चूल्हे पर कढ़ाई चढ़ाई तो घर में अचानक ही सैकड़ों नाग निकल आए। जबकि उन्हें पता था कि इस दिन कढ़ाई नहीं चढ़ाई जाती है।  परिवार के लोगों ने जब मंदिर जाकर माफी मांगी तब जाकर नाग घर से गायब हुए थे। 66 वर्षीय लक्ष्मण सिंह ने बताया कि यहां काले नाग को मारा नहीं जाता बल्कि वह गांव की रक्षा करते हैं और आज तक गांव के किसी भी व्यक्ति को नाग ने नुकसान नहीं पहुंचाया और न किसी की जान सांप के डसने से गई है।
 

गांव की परंपरा है कि नागपंचमी के दिन किसी के भी घर में पकवान नहीं बनाए जाते और चूल्हे पर कढ़ाई नहीं चढ़ाई जाती, यदि ऐसा किया तो नागदेव कुछ ही देर में प्रकट हो जाते हैं। शेखर सिंह ठाकुर ने बताया कि पहले यहां एक मढ़ा बना हुआ था जिसमें नागदेव की प्रतिमा थी। करीब दो दशक पहले गांव के सरपंच ने यहां मंदिर का निर्माण कराया था और जब से नागदेव की प्रतिमा मंदिर के भीतर है, जहां लोग पूजन करने आते हैं। कई बार लोगों के ऊपर से नाग निकल जाते हैं, लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते। यदि किसी के घर पर नागपंचमी के दिन मेहमान भी आ जाएं तो उसे भी बाटी खिलाई जाती है पकवान नहीं बनाए जाते।
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