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MP News: 35 साल से भाजपा का गढ़ है दमोह लोकसभा, 89 से लगातार हारती आ रही कांग्रेस; जानें क्या हैं समीकरण

Fri, 08 Mar 2024 02:56 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Fri, 08 Mar 2024 02:56 PM IST
सार

Lok Sabha Elections 2024: दमोह लोकसभा सीट को कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। लेकिन आज यह भाजपा का गढ़ बन चुकी है। वर्ष 1989 से यहां भाजपा की जीत का सिलसिला शुरू हुआ जो लगातार जारी है। वहीं, जागेश्वर धाम और कुंडलपुर मंदिर का यहां क्या प्रभाव है जानें...।

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MP News: Damoh Lok Sabha has been stronghold of BJP for 35 years, Congress losing continuously from 1989
दमोह लोकसभा सीट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल की प्रमुख दमोह लोकसभा सीट को कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। लेकिन आज यह भाजपा का गढ़ बन चुकी है। वर्ष 1989 से यहां भाजपा की जीत का सिलसिला शुरू हुआ जो लगातार जारी है। दमोह के मतदाता भी 35 वर्षों से भाजपा के साथ ही खड़े हैं। साल 1984 में प्रभु नारायण टंडन ने दमोह से जीत हासिल की थी। उसके बाद कांग्रेस को केवल हार मिली है।

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2019 में प्रहलाद पटेल ने यहां से चुनाव लड़ा था और करीब तीन लाख वोटों से कांग्रेस के प्रताप सिंह को हराया था। अब प्रहलाद पटेल मप्र सरकार में पंचायत मंत्री हैं और इस बार भाजपा ने कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व विधायक राहुल सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। हालांकि अभी कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
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दो तीर्थ क्षेत्र हैं दमोह की पहचान
दमोह क्षेत्र दो तीर्थस्थलों की वजह से भी पूरे प्रदेश और देश में जाना जाता है। बांदकपुर में विराजमान भगवान जागेश्वरनाथ जिन्हें तेरहवें ज्योतिर्लिंग के रूप में भी पूजा जाता है और कुंडलपुर का जैन तीर्थस्थल है, जहां बड़े बाबा की प्रतिमा विराजमान हैं। यह मंदिर पूरे देश में प्रसिद्ध है। इसलिए प्रदेश और केंद्र सरकार में दमोह संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं का अच्छा प्रभाव रहा है। इस सीट के साथ रोचक संयोग यह भी है कि यहां बाहरी प्रत्याशियों का दबदबा रहा है। देश के चौथे राष्ट्रपति वराहगिरी वेंकट गिरि के बेटे वराहगिरी शंकर गिरि भी यहां से चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंच चुके हैं।
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दो बार बदली गई लोकसभा क्षेत्र की सीमा
स्वतंत्रता के बाद दमोह संसदीय क्षेत्र की भौगोलिक सीमा में दो बार परिवर्तन भी हो चुका है। पहले दमोह, पन्ना और छतरपुर जिले की आठ विधानसभा सीटों को शामिल करते हुए इस संसदीय क्षेत्र का नाम दमोह-पन्ना संसदीय क्षेत्र था। वर्ष 2009 में हुए परिसीमन में दमोह, छतरपुर और सागर जिले की विधानसभा सीटों को शामिल करते हुए नया क्षेत्र दमोह रहली लोकसभा बनाया गया।


कुछ समय पहले तक प्रहलाद पटेल केंद्रीय मंत्री थे। वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव नरसिंहपुर से जीतने के बाद उन्होंने संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वे अब मध्य प्रदेश में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री हैं।

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