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Damoh News: कमर तक पानी से शवयात्रा लेकर निकले ग्रामीण, मुक्तिधाम दूर होने पर खेत में किया अंतिम संस्कार
Tue, 06 Aug 2024 09:33 AM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Tue, 06 Aug 2024 09:33 AM IST
सार
ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के समय नाला उफान पर आ जाता है और आवागमन बंद हो जाता है। ऐसे में यदि कोई बीमार हो जाए या किसी की मृत्यु हो जाए तो उसे दूसरे पार ले जाना मुश्किल भरा होता है। लेकिन, मजबूरी के कारण हम जोखिम उठाते हैं।
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पानी से होकर शव यात्रा निकालते ग्रामीण
विस्तार
दमोह जिले की बटियागढ़ जनपद के हरदुआ जामसा गांव में कमर तक पानी से होकर अंतिम यात्रा निकालनी पड़ी। मुक्तिधाम दूर होने के कारण मृतक के खेत में ही अंतिम संस्कार करने के लिए लोग नाले को पार करते हुए निकले। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
रविवार दोपहर हरदुआ गांव निवासी 65 वर्षीय खजुआ अहिरवार का निधन हो गया था। लगातार बारिश होने के चलते अंतिम संस्कार नहीं किया गया। सोमवार को बारिश थमने के बाद अंतिम संस्कार के लिए गांव के लोग शव यात्रा लेकर निकले। मुक्तिधाम दूर होने के कारण खेत में अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया गया, लेकिन रास्ते में एक नाला मिला जो लगातार हो रही बारिश के कारण उफान पर था। शव का अंतिम संस्कार करना जरूरी था, इसलिए गांव के लोगों ने जोखिम उठाकर शव के साथ उफनते नाले को पार किया। मुक्तिधाम यहां से काफी दूर था इसलिए गांव के लोगों ने मृतक के निजी खेत में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
कमर तक पानी से होकर शव को बड़ी ही सावधानी से निकाला गया और उसके बाद बारी-बारी से पूरे गांव के लोग उफनते नाले से होकर निकले। पानी की धार इतनी तेज थी की यदि किसी का भी संतुलन बिगड़ता तो वह बह सकता था। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के समय नाला उफान पर आ जाता है और आवागमन बंद हो जाता है। ऐसे में यदि कोई बीमार हो जाए या किसी की मृत्यु हो जाए तो उसे दूसरे पार ले जाना मुश्किल भरा होता है। लेकिन, मजबूरी के कारण हम जोखिम उठाते हैं। गांव लोगों ने मांग की है कि नाले पर पुल बनाया जाए ताकि लोगों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
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रविवार दोपहर हरदुआ गांव निवासी 65 वर्षीय खजुआ अहिरवार का निधन हो गया था। लगातार बारिश होने के चलते अंतिम संस्कार नहीं किया गया। सोमवार को बारिश थमने के बाद अंतिम संस्कार के लिए गांव के लोग शव यात्रा लेकर निकले। मुक्तिधाम दूर होने के कारण खेत में अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया गया, लेकिन रास्ते में एक नाला मिला जो लगातार हो रही बारिश के कारण उफान पर था। शव का अंतिम संस्कार करना जरूरी था, इसलिए गांव के लोगों ने जोखिम उठाकर शव के साथ उफनते नाले को पार किया। मुक्तिधाम यहां से काफी दूर था इसलिए गांव के लोगों ने मृतक के निजी खेत में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
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कमर तक पानी से होकर शव को बड़ी ही सावधानी से निकाला गया और उसके बाद बारी-बारी से पूरे गांव के लोग उफनते नाले से होकर निकले। पानी की धार इतनी तेज थी की यदि किसी का भी संतुलन बिगड़ता तो वह बह सकता था। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के समय नाला उफान पर आ जाता है और आवागमन बंद हो जाता है। ऐसे में यदि कोई बीमार हो जाए या किसी की मृत्यु हो जाए तो उसे दूसरे पार ले जाना मुश्किल भरा होता है। लेकिन, मजबूरी के कारण हम जोखिम उठाते हैं। गांव लोगों ने मांग की है कि नाले पर पुल बनाया जाए ताकि लोगों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
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