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Damoh News: नवरात्रि पर बुंदेलखंड की अनूठी परंपरा, माता की प्रतिमा के पास शेर करते हैं नृत्य, जानिए क्या हुआ
सार
पंडित कृष्णकुमार गर्ग ने बताया कि माता रानी शेर की सवारी करती हैं इसलिए शेर नृत्य माता को जल्दी प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इसमें दुर्गा पंडालों में माता के सामने बच्चे और युवा शेर बनकर नृत्य करके मातारानी को प्रसन्न करते है।
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शेर नृत्य करते कलाकार
विस्तार
बुंदेलखंड में माना जाता है कि शेरों की सवारी करने वाली मां दुर्गा को यदि शेर बनकर ही मनाया जाए तो मन्नत जल्दी पूरी होगी। इसी वजह से बुंदेलखंड अंचल के जिलों में दुर्गा पंडालों में शेरों के नृत्य हो रहे हैं।
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दमोह जिले में बुंदेलखंड की परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमा के समीप शेर नृत्य का आयोजन किया गया। यह आयोजन सप्तमी से नवमी तक चलता है, जिसमें मां दुर्गा के वाहन शेर का प्रतीकात्मक नृत्य प्रस्तुत किया जाता है। कीर्ति स्तंभ पर मां दुर्गा की झांकी के समक्ष कलाकार शेर की वेशभूषा में नृत्य करते हैं, जो इस परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।
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बुंदेलखंड के दमोह जिले में हर साल शारदीय और चैत्र नवरात्र में शेर नृत्य की परंपरा निभाई जाती है। इस नृत्य में युवा और बच्चे शेर की तरह वेशभूषा पहनकर मां दुर्गा की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस नृत्य से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और उनके आशीर्वाद से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।दमोह के कीर्ति स्तंभ के समीप युवा जागृति मंच के तत्वाधान में इस साल भी शेर नृत्य का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोग उपस्थित हुए, जिनमें पूर्व विधायक अजय टंडन और अन्य कांग्रेस नेता भी शामिल थे। आयोजन की शुरुआत एक छोटी बच्ची को मां दुर्गा के रूप में सजाकर की गई, जो शेर पर सवार होकर असुरों का संहार करती नजर आई। इसके बाद कई बच्चे और युवा शेर की वेशभूषा में तैयार हुए और शेर नृत्य का प्रदर्शन किया।
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पंडित कृष्णकुमार गर्ग ने बताया कि बुंदेलखंड में यह मान्यता है कि मां दुर्गा शेर की सवारी करती हैं, और शेर नृत्य से उन्हें प्रसन्न किया जाता है। यह नृत्य सप्तमी, अष्टमी, और नवमी को विभिन्न दुर्गा पंडालों में होता है, जहां बच्चे और युवा शेर बनकर माता की आराधना करते हैं।
