Damoh Fake Doctor: CMHO ने किया खुलासा, चार ऑपरेशन में तीन की हुई मौत, आरोपी की डिग्री को लेकर कही ये बात
CMHO मुकेश जैन ने बताया कि आरोपी डॉक्टर एन जॉन केम के द्वारा किए गए ऑपरेशन और रिकार्ड खंगाले गए। इस दौरान कार्डियोलाजी में सात लोगों की मौत हुई थी। आरोपी डॉक्टर ने चार की एंजायप्लास्टी की थी, इनमें से तीन की मौत हुई है।
विस्तार
दमोह के मिशन हॉस्पिटल में सात मौतों से जुड़े मामले में दमोह CMHO मुकेश जैन ने पहली बार खुलकर बोले। मामले में सीएमएचओ ने जांच की है। इसके बाद उनका बयान मीडिया में आया है। सीएमएचओ ने बताया कि 20 फरवरी को हमको जांच के लिए कलेक्टर ने कहा था। इसके बाद हमने 22 फरवरी से जांच शुरू की। इसमें आरोपी डॉक्टर एन जॉन केम के द्वारा किए गए ऑपरेशन और रिकार्ड खंगाले गए। 30 से 35 दिन डॉक्टर अस्पताल में रहा है। इस दौरान कार्डियोलाजी में सात लोगों की मौत हुई थी। आरोपी डॉक्टर ने चार की एंजायप्लास्टी की थी, इनमें से तीन की मौत हुई है।
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CMHO ने बताया कि फरवरी माह में उन्होंने मिशन अस्पताल में हुई सभी सर्जरी और डॉक्टरों की जानकारी मांगी थी, लेकिन मिशन अस्पताल ने वहां पदस्थ डॉक्टर एन जॉन केम के बारे में नहीं बताया। पांच मार्च को रिपोर्ट कलेक्टर सुधीर कोचर को दे दी। हमने फिर से मिशन अस्पताल से डॉक्टर के दस्तावेज मांगे। उन्होंने जो दस्तावेज दिए, उसमें आरोपी डॉक्टर के कोलकाता यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस और एमडी की डिग्री करना बताया गया। वहीं, कार्डियोलॉजिस्ट की डिग्री पांडिचेरी विवि से होना बताया गया। सभी डॉक्यूमेंट का सत्यापन करने के लिए हमने सागर मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखा, लेकिन उनका जवाब आया कि उनके यहां कार्डियोलॉजिस्ट नहीं हैं इसलिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज से जांच की मांग कीजिए। इसके बाद हमने चार अप्रैल को जबलपुर मेडिकल कॉलेज टीम को जांच के लिए पत्र लिखा।
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डिग्री में पूर्व उपराष्ट्रपति के फर्जी हस्ताक्षर
टीम ने जब डॉक्टर की डिग्री की जांच की तो उसमे पांडिचेरी विश्वविद्यालय के चांसलर के रूप में पूर्व उपराष्ट्रपति के हस्ताक्षर थे। इस बात का सत्यापन करने के लिए जब टीम ने पूर्व राष्ट्रपति के हस्ताक्षर चेक किए, तो डिग्री में मौजूद हस्ताक्षर और ओरिजिनल हस्ताक्षर में अंतर मिला, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी डॉक्टर की कार्डियोलॉजिस्ट की डिग्री भी फर्जी है। डिग्री में संदेह का एक प्रमुख कारण यह भी था कि उसकी डिग्री में न तो एनरोलमेंट नंबर था और न ही रोल नंबर। जब इस बात की पुष्टि हो गई कि डॉक्टर के दस्तावेज फर्जी हैं, तब जाकर टीम ने कोतवाली में आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
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