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MP: नौरादेही और रानी दुर्गावती अभयारण्य को मिलाकर बनेगा प्रदेश का सातवां टाइगर रिजर्व, प्रस्ताव को मिली मंजूरी
Mon, 19 Jun 2023 03:09 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Mon, 19 Jun 2023 03:09 PM IST
सार
नौरादेही अभयारण्य और दमोह के रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को मिलाकर नया टाइगर रिजर्व बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। बुंदेलखंड में पन्ना टाइगर रिजर्व के बाद यह दूसरा टाइगर रिजर्व कहलाएगा।
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नौरादेही और रानी दुर्गावती अभयारण्य को मिलाकर बनेगा प्रदेश का सातवां टाइगर रिजर्व
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश को एक और टाइगर रिजर्व मिलने वाला है और सबसे बड़ी बात यह है कि काफी प्रयासों के बाद नौरादेही अभयारण्य और दमोह के रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को मिलाकर नया टाइगर रिजर्व बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। संभवतः अगले महीने इसकी आधिकारिक घोषणा भी हो सकती है। बुंदेलखंड में पन्ना टाइगर रिजर्व के बाद यह दूसरा टाइगर रिजर्व कहलाएगा और इसमें सबसे बड़ा योगदान रहेगा नौरादेही के बाघ बाघिन राधा और किशन का जिन्होंने भेड़ियों के जंगल को बाघों से आबाद कर दिया।
मध्यप्रदेश का सातवां टाइगर रिजर्व
बताया जा रहा है कि प्रदेश में बनने जा रहा यह सातवां टाइगर रिजर्व होगा, जो रानी दुर्गावती को समर्पित है। टाइगर रिजर्व का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर भी रखा जा सकता है, हालांकि अभी नाम को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
इस संबंध में दमोह डीएफओ महेंद्र सिंह उइके ने बताया है कि जिला स्तर से प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया था और फिर राज्य स्तर से केंद्र सरकार को प्रस्ताव गया था, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस नए टाइगर रिजर्व के साथ देश में सबसे अधिक टाइगर रिजर्व वाला राज्य भी मध्यप्रदेश बन जाएगा। इधर टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद नौरादेही में कई बदलाव होंगे। जो इस नए नवेले टाइगर रिजर्व को सबसे खास बनाएंगे।
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काफी समय से चल रहे थे प्रयास
राज्य सरकार ने काफी समय पहले नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के पास नौरादेही व रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को मिलाकर एक विशाल टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव भेजा था। लंबी गहनता के बाद यह प्रस्ताव मंजूर हुआ है।
जैव विविधता के लिए खास है रानी दुर्गावती अभयारण्य
दमोह जिले का रानी दुर्गावती अभयारण्य अपनी खास जैव विविधताओं के लिए पहचाना जाता है। यहां वन्यप्राणियों के लिए प्राकृतिक जलस्रोत, ऊंची-ऊंची पहाडियां, घना जंगल व पर्याप्त वन्यप्राणियों की मौजूदगी है। रानी दुर्गावती अभयारण्य जबेरा और तेंदूखेड़ा ब्लॉक तक फैला हुआ है।
नौरादेही इसलिए है खास
नए टाइगर रिजर्व की रेस में नौरादेही वाइल्ड लाइफ सेंचुरी सबसे आगे था। इसकी कई वजह हैं। पहली वजह यहां की बॉयो डायवर्सिटी है, जो इसे अन्य अभयारण्यों व टाइगर रिजर्व से अलग बनाती हैं। इसके अलावा टाइगर रिजर्व की रेस में सबसे आगे रहने की एक वजह यह भी है कि यह प्रदेश का सबसे बड़ा अभ्यारण्य है और यहां बाघों के पुनर्विस्थापन की योजना सफल हुई है।
2339 वर्ग किमी हो सकता है एरिया
एनटीसी से नौरादेही व रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को नए टाइगर रिजर्व बनाने की मंजूरी मिलने के बाद अब इसके कुल एरिया, बाघों की संख्या आदि के बारे में चर्चा चल रही है। सूत्रों के अनुसार नौरादेही और रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से मिलकर बनने इस टाइगर रिजर्व का एरिया 2339 वर्ग किलोमीटर अथवा इससे अधिक हो सकता है। इतने एरिया में दर्जनों बाघ आसानी से रह सकते हैं।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
नए टाइगर रिजर्व से बाघों की वंशवृद्धि और बेहतर तरीके से होगी। इसके साथ ही रिजर्व क्षेत्र में पर्यटन को लेकर भी व्यवस्थाएं की जाएंगी। वर्तमान में नौरादेही के कुछ एरिया में ही पर्यटन सुविधा है, जहां न के बराबर सैलानी पहुंचते हैं। वहीं नए एवं विशालकाय टाइगर रिजर्व से दमोह, जबलपुर, सागर और नरसिंहपुर सभी जिलों में पर्यटन को लेकर काम किया जाएगा। जिससे सैलानियों की संख्या बढॉने पर पर्यटन को रफ्तार मिलेगी।
एक भी गांव नहीं होगा विस्थापित
दमोह डीएफओ महेंद्र सिंह उइके ने जानकारी देते हुए बताया है कि रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के लिए जो निर्धारित क्षेत्र तय हुआ है इसमें जिले का एक भी गांव विस्थापित नहीं किया जाएगा। क्योंकि जो एरिया रिजर्व में लिया गया है उसमें किसी भी गांव में विस्थापन की परिस्थितियां निर्मित नहीं होंगी। उन्होंने बताया कि कोर एरिया की सीमाएं भी तय हो चुकीं हैं। रानी दुर्गावती अभयारण्य व नौरादेही अभयारण्य मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाया जाना है, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिली है। जल्द ही इस पर कार्य शुरू होगा।
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मध्यप्रदेश का सातवां टाइगर रिजर्व
बताया जा रहा है कि प्रदेश में बनने जा रहा यह सातवां टाइगर रिजर्व होगा, जो रानी दुर्गावती को समर्पित है। टाइगर रिजर्व का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर भी रखा जा सकता है, हालांकि अभी नाम को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
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इस संबंध में दमोह डीएफओ महेंद्र सिंह उइके ने बताया है कि जिला स्तर से प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया था और फिर राज्य स्तर से केंद्र सरकार को प्रस्ताव गया था, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस नए टाइगर रिजर्व के साथ देश में सबसे अधिक टाइगर रिजर्व वाला राज्य भी मध्यप्रदेश बन जाएगा। इधर टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद नौरादेही में कई बदलाव होंगे। जो इस नए नवेले टाइगर रिजर्व को सबसे खास बनाएंगे।
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काफी समय से चल रहे थे प्रयास
राज्य सरकार ने काफी समय पहले नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के पास नौरादेही व रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को मिलाकर एक विशाल टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव भेजा था। लंबी गहनता के बाद यह प्रस्ताव मंजूर हुआ है।
जैव विविधता के लिए खास है रानी दुर्गावती अभयारण्य
दमोह जिले का रानी दुर्गावती अभयारण्य अपनी खास जैव विविधताओं के लिए पहचाना जाता है। यहां वन्यप्राणियों के लिए प्राकृतिक जलस्रोत, ऊंची-ऊंची पहाडियां, घना जंगल व पर्याप्त वन्यप्राणियों की मौजूदगी है। रानी दुर्गावती अभयारण्य जबेरा और तेंदूखेड़ा ब्लॉक तक फैला हुआ है।
नौरादेही इसलिए है खास
नए टाइगर रिजर्व की रेस में नौरादेही वाइल्ड लाइफ सेंचुरी सबसे आगे था। इसकी कई वजह हैं। पहली वजह यहां की बॉयो डायवर्सिटी है, जो इसे अन्य अभयारण्यों व टाइगर रिजर्व से अलग बनाती हैं। इसके अलावा टाइगर रिजर्व की रेस में सबसे आगे रहने की एक वजह यह भी है कि यह प्रदेश का सबसे बड़ा अभ्यारण्य है और यहां बाघों के पुनर्विस्थापन की योजना सफल हुई है।
2339 वर्ग किमी हो सकता है एरिया
एनटीसी से नौरादेही व रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को नए टाइगर रिजर्व बनाने की मंजूरी मिलने के बाद अब इसके कुल एरिया, बाघों की संख्या आदि के बारे में चर्चा चल रही है। सूत्रों के अनुसार नौरादेही और रानी दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से मिलकर बनने इस टाइगर रिजर्व का एरिया 2339 वर्ग किलोमीटर अथवा इससे अधिक हो सकता है। इतने एरिया में दर्जनों बाघ आसानी से रह सकते हैं।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
नए टाइगर रिजर्व से बाघों की वंशवृद्धि और बेहतर तरीके से होगी। इसके साथ ही रिजर्व क्षेत्र में पर्यटन को लेकर भी व्यवस्थाएं की जाएंगी। वर्तमान में नौरादेही के कुछ एरिया में ही पर्यटन सुविधा है, जहां न के बराबर सैलानी पहुंचते हैं। वहीं नए एवं विशालकाय टाइगर रिजर्व से दमोह, जबलपुर, सागर और नरसिंहपुर सभी जिलों में पर्यटन को लेकर काम किया जाएगा। जिससे सैलानियों की संख्या बढॉने पर पर्यटन को रफ्तार मिलेगी।
एक भी गांव नहीं होगा विस्थापित
दमोह डीएफओ महेंद्र सिंह उइके ने जानकारी देते हुए बताया है कि रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के लिए जो निर्धारित क्षेत्र तय हुआ है इसमें जिले का एक भी गांव विस्थापित नहीं किया जाएगा। क्योंकि जो एरिया रिजर्व में लिया गया है उसमें किसी भी गांव में विस्थापन की परिस्थितियां निर्मित नहीं होंगी। उन्होंने बताया कि कोर एरिया की सीमाएं भी तय हो चुकीं हैं। रानी दुर्गावती अभयारण्य व नौरादेही अभयारण्य मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाया जाना है, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिली है। जल्द ही इस पर कार्य शुरू होगा।
