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Damoh: भविष्य संवारने जान जोखिम में डाल रहे छात्र, 10 करोड़ की लागत से बने पुल का नहीं मिल रहा लाभ, जानें वजह
Wed, 12 Jul 2023 05:56 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Wed, 12 Jul 2023 05:56 PM IST
सार
दमोह जिले की पथरिया विधानसभा में आने वाली सुनार नदी पर सात साल पहले करीब 10 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण किया गया था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते आज भी इस गांव के लोग नाव से सफर करने को मजबूर हैं।
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विस्तार
दमोह जिले की पथरिया विधानसभा क्षेत्र के असलाना और बड़ी सागोनी गांव के बीच से निकली सुनार नदी पर पुल होने के बाद भी इस गांव के लोगों को जान जोखिम में डालकर नाव से आवागमन करना पड़ रहा है। हर सुबह स्कूली छात्र नदी किनारे पहुंचते हैं, जहां से नाव में बैठकर दूसरे गांव असलाना पढ़ाई करने जाते हैं। बच्चों के परिजनों के साथ ही स्कूल के शिक्षक भी बच्चों के इस जोखिम भरे सफर को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते।
10 करोड़ का पुल किसी काम का नहीं
स्कूल के प्राचार्य हरगोविंद तिवारी का कहना है कि पुल के दोनों तरफ निजी जमीन है, जिसमें लोग खेती करते हैं। रास्ता है नहीं, लेकिन पुल बन गया है। करीब 10 करोड़ की लागत से यह पुल बनकर तैयार हुआ है, लेकिन गांव के लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा। बड़ी सागोनी के बच्चे हर दिन इसी तरह जोखिम उठाकर यहां पहुंचते हैं। उन बच्चों के अभिभावकों से कहा भी है कि वह बड़ी सागोनी के उस तरफ किसी गांव में अपने बच्चों का एडमिशन करा दें, लेकिन वह गांव काफी दूर हैं और असलाना गांव पास में पड़ता है, इसलिए यह लोग अपने बच्चों को यहीं पढ़ाना चाहते हैं। अब शासन ही कुछ व्यवस्था कर सकता है।
नदी पार करते समय लगता है डर: छात्रा
स्कूल जाने के लिए नाव की सवारी करने वाली छात्रा आरुषि कुर्मी ने बताया कि वह कक्षा बारहवीं में पढ़ती है। नाव में बैठते समय डर तो लगता है, लेकिन उसे तैरना आता है, इसलिए दूसरों की अपेक्षा कम डर लगता है। रास्ता नहीं है इसलिए नाव में सवार होकर ही स्कूल जाते हैं। दूसरी छात्रा रक्षा कुर्मी ने कहा कि डर बहुत लगता है, लेकिन पढ़ाई करनी है। असलाना स्कूल उनके गांव से पास है इसलिए नाव में सवार होकर जाते हैं। रास्ता बन जाए तो हमें काफी सुविधा हो जाएगी। गांव के लोग बताते हैं कि यह पुल करीब सात साल पहले बन चुका है, लेकिन आज तक इस पुल से आवागमन शुरू नहीं हुआ, क्योंकि दोनों तरफ निजी भूमि है और वहां से रास्ता नहीं मिल रहा।
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कलेक्टर बोले- गंभीर समस्या है
मामले में दमोह कलेक्टर मयंक अग्रवाल का कहना है कि मामला गंभीर है। संबंधित अधिकारियों से इसकी जानकारी ली जाएगी कि अभी तक रास्ता क्यों नहीं बनाया गया और स्थाई इंतजाम करने का प्रयास भी किया जाएगा ताकि बच्चे सुरक्षित स्कूल पहुंच सकें।
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10 करोड़ का पुल किसी काम का नहीं
स्कूल के प्राचार्य हरगोविंद तिवारी का कहना है कि पुल के दोनों तरफ निजी जमीन है, जिसमें लोग खेती करते हैं। रास्ता है नहीं, लेकिन पुल बन गया है। करीब 10 करोड़ की लागत से यह पुल बनकर तैयार हुआ है, लेकिन गांव के लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा। बड़ी सागोनी के बच्चे हर दिन इसी तरह जोखिम उठाकर यहां पहुंचते हैं। उन बच्चों के अभिभावकों से कहा भी है कि वह बड़ी सागोनी के उस तरफ किसी गांव में अपने बच्चों का एडमिशन करा दें, लेकिन वह गांव काफी दूर हैं और असलाना गांव पास में पड़ता है, इसलिए यह लोग अपने बच्चों को यहीं पढ़ाना चाहते हैं। अब शासन ही कुछ व्यवस्था कर सकता है।
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नदी पार करते समय लगता है डर: छात्रा
स्कूल जाने के लिए नाव की सवारी करने वाली छात्रा आरुषि कुर्मी ने बताया कि वह कक्षा बारहवीं में पढ़ती है। नाव में बैठते समय डर तो लगता है, लेकिन उसे तैरना आता है, इसलिए दूसरों की अपेक्षा कम डर लगता है। रास्ता नहीं है इसलिए नाव में सवार होकर ही स्कूल जाते हैं। दूसरी छात्रा रक्षा कुर्मी ने कहा कि डर बहुत लगता है, लेकिन पढ़ाई करनी है। असलाना स्कूल उनके गांव से पास है इसलिए नाव में सवार होकर जाते हैं। रास्ता बन जाए तो हमें काफी सुविधा हो जाएगी। गांव के लोग बताते हैं कि यह पुल करीब सात साल पहले बन चुका है, लेकिन आज तक इस पुल से आवागमन शुरू नहीं हुआ, क्योंकि दोनों तरफ निजी भूमि है और वहां से रास्ता नहीं मिल रहा।
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कलेक्टर बोले- गंभीर समस्या है
मामले में दमोह कलेक्टर मयंक अग्रवाल का कहना है कि मामला गंभीर है। संबंधित अधिकारियों से इसकी जानकारी ली जाएगी कि अभी तक रास्ता क्यों नहीं बनाया गया और स्थाई इंतजाम करने का प्रयास भी किया जाएगा ताकि बच्चे सुरक्षित स्कूल पहुंच सकें।
