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Damoh: गंगा जमना स्कूल में मस्जिद में जाने के लिए बना है गुप्त रास्ता, बच्चों को बताते थे इस्लाम की बातें
Fri, 09 Jun 2023 01:42 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Fri, 09 Jun 2023 01:42 PM IST
सार
बाल संरक्षण आयोग की सदस्य मेघा पवार ने भी इस बात का खुलासा किया कि गंगा जमना स्कूल के केजी वन के सिलेबस में धर्म विशेष से जुड़े विषयों को हिंदी बच्चों को भी पढ़ाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि केजी के बच्चों को इस्लाम से जुड़ी बातें बताई जा रही थी।
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गंगा जमना स्कूल से जुड़ा एक और चौंकाने वाला खुलासा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दमोह के गंगा जमना स्कूल के हिजाब और धर्मांतरण प्रकरण के सामने आने के बाद अब हर दिन नए नए खुलासे हो रहे हैं। हिजाब से शुरू हुआ मामला इतना आगे बढ़ जाएगा, इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। हाल ही में जब राज्य बाल आयोग के सदस्यों द्वारा स्कूल का निरीक्षण किया गया था, तो उसमें स्कूल से मस्जिद की ओर जाने वाला एक गुप्त मार्ग भी टीम को मिला है, जिससे यह प्रतीत होता है कि छात्रों को इस्लामी प्रार्थना पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता होगा। वहीं, दूसरी ओर नर्सरी से ही छात्रों को इस्लाम से जुड़ी शिक्षा दी जाती थी। यह बात राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने दमोह कलेक्टर एवं एसपी को लिखे अपने पत्र में कही है।
उनके द्वारा लिखे गए सात बिंदुओं के पत्र में अनेक खुलासे किए गए हैं। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण स्कूल से मस्जिद की ओर जाने वाला एक गुप्त मार्ग है, जिससे प्रतीत होता है कि छात्रों को इस्लामी प्रार्थना पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। उसके अलावा छात्रों को भारत का गलत भौगोलिक नक्शा पढ़ाया जा रहा था, जिसमें भारत के नक्शे के साथ छेड़छाड़ करके आधा भारत गायब कर दिया गया है, जो राष्ट्रीय मानचित्र नीति 2005 एवं भारतीय सर्वेक्षण के द्वारा 2016 में जारी विस्तृत दिशा निर्देशों का उल्लंघन है।
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उनके द्वारा लिखे गए सात बिंदुओं के पत्र में अनेक खुलासे किए गए हैं। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण स्कूल से मस्जिद की ओर जाने वाला एक गुप्त मार्ग है, जिससे प्रतीत होता है कि छात्रों को इस्लामी प्रार्थना पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। उसके अलावा छात्रों को भारत का गलत भौगोलिक नक्शा पढ़ाया जा रहा था, जिसमें भारत के नक्शे के साथ छेड़छाड़ करके आधा भारत गायब कर दिया गया है, जो राष्ट्रीय मानचित्र नीति 2005 एवं भारतीय सर्वेक्षण के द्वारा 2016 में जारी विस्तृत दिशा निर्देशों का उल्लंघन है।
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वह गुप्त रास्ता जो स्कूल से मस्जिद तक जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
रिकॉर्ड के अनुसार शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी भाषा में होना है और हिंदी को दूसरी भाषा के रूप में इस्तेमाल किया जाना है। वहीं उर्दू को स्कूल में तीसरी भाषा के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन निरीक्षण के दौरान मध्यप्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों को पता चला कि उर्दू को एक अनिवार्य प्राथमिक भाषा के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इस तथ्य के बावजूद की उपभाषा छात्रों की मातृभाषा भी नहीं है, लेकिन जबरदस्ती उर्दू भाषा के रूप में अनेक प्रकार के साहित्य के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है।
मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग की सदस्य मेघा पवार ने भी इस बात का खुलासा किया कि गंगा जमना स्कूल के केजी वन के सिलेबस में धर्म विशेष से जुड़े विषयों को हिंदी बच्चों को भी पढ़ाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि केजी के बच्चों को इस्लाम से जुड़ी बातें बताई जा रही थी। हिंदू बच्चों पर इसे याद करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इसके अलावा उन्होंने अन्य बिंदुओं पर भी कार्रवाई करने के लिए कलेक्टर एवं एसपी को निर्देशित किया है तथा स्कूल की मान्यता को निरस्त करने निर्देशित करते हुए एफआईआर करने के लिए भी कहा है।
मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग की सदस्य मेघा पवार ने भी इस बात का खुलासा किया कि गंगा जमना स्कूल के केजी वन के सिलेबस में धर्म विशेष से जुड़े विषयों को हिंदी बच्चों को भी पढ़ाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि केजी के बच्चों को इस्लाम से जुड़ी बातें बताई जा रही थी। हिंदू बच्चों पर इसे याद करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इसके अलावा उन्होंने अन्य बिंदुओं पर भी कार्रवाई करने के लिए कलेक्टर एवं एसपी को निर्देशित किया है तथा स्कूल की मान्यता को निरस्त करने निर्देशित करते हुए एफआईआर करने के लिए भी कहा है।
