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Damoh: विक्की रोहित सुसाइड में जांच करने पहुंचे कांग्रेसी, बोले-मंत्री को पुलिस पर भरोसा नहीं, तो हम कैसे करें
Mon, 10 Jul 2023 06:41 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 10 Jul 2023 06:41 PM IST
सार
विक्की रोहित आत्महत्या मामले में सियासत बढ़ने लगी है। अब कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल मामले की जांच के लिए दमोह पहुंचा। इस दौरान मीडिया से बातचीत में सरकार पर जमकर हमला बोला गया।
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जांच के लिए दमोह पहुंचे कांग्रेसी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
दमोह के राशन दुकान सेल्समैन विक्की रोहित आत्महत्या मामले में जांच करने के लिए सोमवार को कांग्रेस की जांच समिति की टीम दमोह पहुंची। यहां मृतक के परिवार के लोगों से टीम के लोगों ने मुलाकात की। इसके बाद टीम के सदस्यों ने जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में पत्रकारों के सामने अपनी बात रखी।
पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि जब केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को ही दमोह पुलिस की कार्रवाई पर भरोसा नहीं तो विपक्ष इस पुलिस पर कैसे भरोसा करे। वहीं बंडा के कांग्रेस विधायक तरवर सिंह लोधी ने कहा यदि केंद्रीय राज्यमंत्री खुद कह रहे हैं कि सुसाइड नोट में उनका नाम है तो पुलिस को उनके खिलाफ भी एफआईआर करनी चाहिए फिर अब पुलिस पीछे क्यों हट रही है।
'एससी-एसटी पर लगातार हो रहे हमले'
चौधरी ने कहा सच्चाई सबके सामने हैं। इस जिले में सत्ता दल के कारण कानून व्यवस्था स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही। इसका जीता जागता उदाहरण विक्की रोहित की आत्महत्या है, जो न्याय की गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुनवाई नहीं की। क्योंकि वह एससी-एसटी वर्ग से जुड़ा था। उसे मजबूरी में सुसाइड करना पड़ा। जिनके नाम सुसाइड नोट में थे पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर की है, लेकिन सत्ता के लोग उन आरोपियों को जेल में डालने की बजाय बचाने में जुटे हैं। मंत्री परिषद में बैठे लोग इस पूरे मामले को सीआईडी को सौंप कर इस मामले को रफा-दफा कराना चाहते हैं। एससी-एसटी के लोग प्रताड़ित होकर जान दे रहे हैं, लेकिन निष्पक्ष जांच नहीं हो रही।
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चौधरी ने कहा कि वो चाहते हैं कि पीड़ित को मुआवजा मिले, परिवार के सदस्यों को नौकरी मिले और इस पूरे मामले की निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाए। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के बयान पर उन्होंने कहा वह खुद स्पष्ट कर रहे हैं कि उन्हें मध्य प्रदेश की पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो विपक्ष पुलिस पर कैसे भरोसा करे। इसलिए वे चाहते हैं इस मामले की निष्पक्ष जांच हो। सीआईडी कैसे जांच करती है यह मुझे भी पता है, क्योंकि मैं भी लंबे समय तक मंत्री रहा हूं। यह सब रफा दफा करने की तैयारी चल रही है।
बंडा विधायक तरवर सिंह लोधी ने कहा कि सभी जान रहे हैं कि बात क्या है, लेकिन सत्ता के दबाव में विक्की के सुसाइड नोट को नजर अंदाज करने का प्रयास किया जा रहा है। सुसाइड नोट में 4 लोग आरोपी हैं। पुलिस ने उन पर कार्रवाई की, लेकिन सत्ता के लोग अब उन्हें गिरफ्तार ना करवाकर उन्हें बचाने में जुटे हैं। जबकि दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था भी प्रशासन को करनी चाहिए। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल अगर यह बयान दे रहे हैं कि सुसाइड नोट में उनका नाम है और उन पर भी पुलिस को एफआईआर करनी चाहिए, तो अब इस मामले में पुलिस पीछे क्यों हट रही है।
जांच टीम में यह हैं शामिल
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा विक्की रोहित सुसाइड मामले में गठित की गई कमेटी में पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी, बंडा विधायक तरवर सिंह, सागर शहर अध्यक्ष रेखा चौधरी, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व उपाध्यक्ष राकेश राय और रामजी दुबे शामिल हैं, जिनमें से राम जी दुबे को छोड़कर बाकी सभी लोग सोमवार जांच करने के लिए दमोह पहुंचे थे।
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पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि जब केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को ही दमोह पुलिस की कार्रवाई पर भरोसा नहीं तो विपक्ष इस पुलिस पर कैसे भरोसा करे। वहीं बंडा के कांग्रेस विधायक तरवर सिंह लोधी ने कहा यदि केंद्रीय राज्यमंत्री खुद कह रहे हैं कि सुसाइड नोट में उनका नाम है तो पुलिस को उनके खिलाफ भी एफआईआर करनी चाहिए फिर अब पुलिस पीछे क्यों हट रही है।
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'एससी-एसटी पर लगातार हो रहे हमले'
चौधरी ने कहा सच्चाई सबके सामने हैं। इस जिले में सत्ता दल के कारण कानून व्यवस्था स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही। इसका जीता जागता उदाहरण विक्की रोहित की आत्महत्या है, जो न्याय की गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुनवाई नहीं की। क्योंकि वह एससी-एसटी वर्ग से जुड़ा था। उसे मजबूरी में सुसाइड करना पड़ा। जिनके नाम सुसाइड नोट में थे पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर की है, लेकिन सत्ता के लोग उन आरोपियों को जेल में डालने की बजाय बचाने में जुटे हैं। मंत्री परिषद में बैठे लोग इस पूरे मामले को सीआईडी को सौंप कर इस मामले को रफा-दफा कराना चाहते हैं। एससी-एसटी के लोग प्रताड़ित होकर जान दे रहे हैं, लेकिन निष्पक्ष जांच नहीं हो रही।
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चौधरी ने कहा कि वो चाहते हैं कि पीड़ित को मुआवजा मिले, परिवार के सदस्यों को नौकरी मिले और इस पूरे मामले की निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाए। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के बयान पर उन्होंने कहा वह खुद स्पष्ट कर रहे हैं कि उन्हें मध्य प्रदेश की पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो विपक्ष पुलिस पर कैसे भरोसा करे। इसलिए वे चाहते हैं इस मामले की निष्पक्ष जांच हो। सीआईडी कैसे जांच करती है यह मुझे भी पता है, क्योंकि मैं भी लंबे समय तक मंत्री रहा हूं। यह सब रफा दफा करने की तैयारी चल रही है।
बंडा विधायक तरवर सिंह लोधी ने कहा कि सभी जान रहे हैं कि बात क्या है, लेकिन सत्ता के दबाव में विक्की के सुसाइड नोट को नजर अंदाज करने का प्रयास किया जा रहा है। सुसाइड नोट में 4 लोग आरोपी हैं। पुलिस ने उन पर कार्रवाई की, लेकिन सत्ता के लोग अब उन्हें गिरफ्तार ना करवाकर उन्हें बचाने में जुटे हैं। जबकि दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था भी प्रशासन को करनी चाहिए। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल अगर यह बयान दे रहे हैं कि सुसाइड नोट में उनका नाम है और उन पर भी पुलिस को एफआईआर करनी चाहिए, तो अब इस मामले में पुलिस पीछे क्यों हट रही है।
जांच टीम में यह हैं शामिल
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा विक्की रोहित सुसाइड मामले में गठित की गई कमेटी में पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी, बंडा विधायक तरवर सिंह, सागर शहर अध्यक्ष रेखा चौधरी, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व उपाध्यक्ष राकेश राय और रामजी दुबे शामिल हैं, जिनमें से राम जी दुबे को छोड़कर बाकी सभी लोग सोमवार जांच करने के लिए दमोह पहुंचे थे।
