दबंगईः सिर पर जूते रखकर चल रहा दलित परिवार
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तरक्की की राह में खुद को सबसे आगे दिखाने की होड़ में जुटे देश में दलितों पर जुल्म के किस्से आज भी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मध्यप्रदेश के सागर जिले में दलितों पर अत्याचार की जो कहानी सामने आ रही है वो झकझोर देने वाली है।
जिले के दूरदराज के एक गांव में उच्च जाति की दबंगई झेल रहे दलित परिवार के 15 सदस्यों को सबके सामने अपने सिर पर जूते रखकर चलना पड़ता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार इस वाकये के पीछे दो साल पुराना घटनाक्रम है, जब पीड़ित परिवार पर गांव के ही ठाकुर बिरादरी ने एक मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बनाया था।
जानकारी के अनुसार बुंदा तहसील के कैथोरा गांव निवासी गुलजारी धानुक (50) की 17 साल की बेटी को ठाकुर परिवार का राजेन्द्र सिंह अपने साथ दिल्ली ले गया था। किशोरी ने राजेन्द्र पर बलात्कार का आरोप लगाया था, जिसके बाद उसने एक बच्चे को जन्म दिया।
पीड़ित परिवार की सुनने को तैयार नहीं शासन-प्रशासन
आरोप है कि राजेन्द्र के परिवार ने उस बच्चे का कत्ल कर दिया। मामले में पीड़ित परिवार की ओर से बुंदा थाने में राजेन्द्र के खिलाफ अपहरण और बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
जो तभी से चला आ रहा था। रेप पीड़िता युवती की बहन अनार बाई ने बताया कि उसके परिवार को मुकदमा वापस लेने के लिए जान से मारने की धमकी दी जा रही थी। लेकिन उन्होंने मुकदमा वापस नहीं लिया।
दो साल पहले मामले में उच्च जातियों की एक पंचायत हुई जिसमें दलित परिवार के बहिष्कार की घोषणा की गई थी। दबंग परिवारों ने इस दौरान मुकदमा वापस न लेने तक पीड़ित परिवार को सदस्यों को सिर पर जूते रखकर चलने का हुक्म भी सुना दिया था।
परिवार के मुखिया गुलजारी बताते हैं कि इस जुल्म के बाद भी हमने मुकदमा वापस न लेने का निर्णय लिया। उसके बाद से ही हमें दबंग परिवारों के जुल्म का शिकार होना पड़ रहा है, इस संबंध में पुलिस प्रशासन भी हमारी कोई मदद नहीं कर रहा है।
परिवार का हुक्का पानी भी किया गया बंद
वह बताते हैं कि इस घटना के बाद से उनकी बेटी दिल्ली में रहकर नौकरानी का काम करने को मजबूर है। वह गांव वापस लौटने से भी डरती है।
वहीं दंबंगों के इस फरमान की पुष्टि करते हुए गांव की सरपंच के पति संतोष अथिया ने बताया कि हम पूरी तरह लाचार हैं। आलम ये है कि कोई भी पीड़ित धानुक परिवार को राशन और पानी जैसी बुनियादी चीजें देने को तैयार नहीं है।
गुलजारी खुद बताते हैं कि राशन जैसी जरूरी चीजें खरीदने के लिए हमें 10 किलोमीटर दूर कर्रापुर का सफर करना पड़ता है। सागर का स्थानीय प्रशासन भी पीड़ित परिवार की किसी तरह मदद करने को तैयार नहीं है।
मामले में जब बुंदा के तहसीलदार सीजी गोस्वामी बताते हैं कि मुझे इस संबंध में अभी पता चला है, मैंने इस संबंध में बुंदा एसएचओ से पूछा है। वहीं सागर के एसपी सचिन अतुलकर बताते हैं कि उन्हें इस घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं है, मरमले में स्थानीय अधिकारियों से बात की जा रही है।
