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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP High Court justifies lower court prohibition order, says wife cannot interfere in work of husband

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का निर्देश, पति के कामकाज में दखल नहीं दे पत्नी, चल रहा है तलाक का मुकदमा

Wed, 26 Sep 2018 02:12 PM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Updated Wed, 26 Sep 2018 02:12 PM IST
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MP High Court justifies lower court prohibition order, says wife cannot interfere in work of husband
Court
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में निचली अदालत के निषेधाज्ञा आदेश को सही ठहराते हुए कहा है कि पत्नी पति के कामकाज में दखल नहीं दे सकती। निचली कोर्ट ने महिला को आदेश दिया है कि वह अपने पति की दुकान पर नहीं जाए। उसमें दखल नहीं दे और उसे नुकसान ना पहुंचाए। बता दें कि महिला और उसके पति के बीच तलाक का मुकदमा निचली अदालत में चल रहा है।
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निचली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए एक महिला ने हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में अपील दायर की थी। महिला का पक्ष रखते हुए उसके वकील ने दलील दी थी कि पति के दुकान में उसने भी निवेश किया है और वह दुकान में आना-जाना चाहती है। इसके साथ ही वकील ने यह भी कहा कि निचली अदालत पारिवारिक मामलों में दखल नहीं दे सकती। घटना के दिन महिला दुकान में बच्चे के लिए सामान लेने गई थी।
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वहीं महिला के पति के वकील ने तर्क दिया कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 39 नियम एक-दो में प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति यदि किसी के कामकाज में रुकावट डालता है और वह अदालत से निषेधाज्ञा आदेश प्राप्त कर सकता है। यह नियम पारिवारिक मामलों में भी लागू हो सकता है।
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हाईकोर्ट इंदौर में जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की एकल पीठ ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए महिला की अपील खारिज कर दी। साथ ही आदेश में कहा कि निचली अदालत पारिवारिक मामलों के कामकाज में दखल नहीं देने संबंधी निषेधाज्ञा जारी कर सकती है।

मामला महू निवासी अमित जायसवाल का है। अमित ने पत्नी के खिलाफ नवंबर 2017 को क्रूरता के आधार पर महू अदालत में तलाक लेने के लिए याचिका दायर की। इसके साथ ही निषेधाज्ञा आवेदन लगाया, जिसमें कहा कि महू में उसकी दुकान है।


पत्नी दुकान पर आई और झगड़ा करते हुए दुकान से बिल, वाउचर और रुपये जबरदस्ती ले गई। पहले भी दुकान पर गाली-गलौज करते हुए जबरदस्ती दो गीजर, सेनिटरी की दो शीट ले गई। यह कृत्य क्रूरता की श्रेणी में आता है।

इस पर महू के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने निषेधाज्ञा जारी की थी। तलाक का मुकदमा अब भी निचली अदालत में चल रहा है।
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