इंदौर: स्वास्थ्यकर्मियों पर पथराव करने वाले चार लोगों पर लगा रासुका
मध्यप्रदेश के इंदौर के टाटपट्टी बाखल इलाके में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम पर पथराव करने के मामले में मध्यप्रदेश सरकार ने चार लोगों पर रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाया गया है। इस कानून के तहत हिरासत में लिए व्यक्ति को अधिकमत एक साल जेल में रखा जा सकता है।
Madhya Pradesh Government has put the National Security Act on Md Mustafa, Md Gulrez, Shoaib and Majeed who were involved in stone-pelting on health workers in Indore's Tatpatti Bakhal area. https://t.co/gnmb4ZUi5G
— ANI (@ANI) April 2, 2020
प्रदेश सरकार ने हमले के आरोपी मोहम्मद मुस्तफा, मोहम्मद गुलरेज, शोएब और मजीद पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की है। इन सभी पर इंदौर के टाटापट्टी बाखल इलाके में कोरोना के खिलाफ अभियान चल रहे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर पथराव करने वाले समूह में शामिल होने का आरोप है। इस हमले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही कह चुके हैं कि किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
10 पर कार्रवाई की तैयारी
इससे पहले इंदौर में स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले के आरोप में सात आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इंदौर डीआईजी हरि नारायण चारी मिश्र ने गुरुवार को बताया था कि टाटपट्टी बाखल इलाके में हुई घटना पर दोषियों की वीडियो फुटेज से पहचान की गई है।
मुख्य दोषी सहित चार लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। इनके खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा सहित धारा 186 , 188 और 353 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। मिश्रा ने बताया है कि अन्य दस दोषियों पर भी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इंदौर में पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया में भ्रामक प्रचार करने वालों पर भी पुलिस के साइबर सेल की नजर है। आजाद नगर क्षेत्र में एक वॉट्सऐप ग्रुप एडमिन पर अफवाह फैलाने का मामला दर्ज किया गया है।
बता दें कि शहर के टाटपट्टी बाखल इलाके में बुधवार को कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए अभियान चला रहे स्वास्थ्य कर्मियों पर लोगों ने पथराव कर दिया था। इससे दो महिला चिकित्सकों के पैरों में चोटें आई थीं।
कोरोना वायरस से संक्रमित एक मरीज के संपर्क में आए लोगों को ढूंढने गए स्वास्थ्य कर्मियों पर बुधवार को पथराव कर दिया था। पथराव से दो महिला डॉक्टरों के पैरों में चोट आईं। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहा है।
क्या है पूरा मामला
घटना के दौरान मौजूद रही एक महिला डॉक्टर ने पहचान का खुलासा करने से इनकार करते हुए बताया था कि कोरोना के खिलाफ अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग का पांच सदस्यीय दल इलाके में गया था।
उन्होंने कहा कि मैं बहुत डरी हुई हूं। हम कोरोना वायरस संक्रमण के एक मरीज के संपर्क में आए लोगों को ढूंढ रहे थे। हमने जैसे ही इन लोगों से उनकी सेहत की स्थिति से जुड़े सवाल करने शुरू किए, तो उन्होंने इसका विरोध किया। तभी वहां कुछ और लोग आ धमके जिन्होंने हम पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए।
महिला डॉक्टर ने कहा कि वो तो शुक्र है कि कुछ पुलिस कर्मी पास ही थे, इसलिए हमारी जान बच गई। इस बीच, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण जड़िया ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि हमारा दल लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने के लिए काम कर रहा था।
लेकिन रहवासियों ने नासमझी में इस दल पर ही पथराव कर दिया। बहरहाल, यह शहर में कोई पहली घटना नहीं है जब कोरोना वायरस के खिलाफ अभियान चला रहे स्वास्थ्य कर्मियों को अप्रिय हालात का सामना करना पड़ा हो।
