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गड़बड़ी: इंदौर में कोरोना के आकंड़ों में हुआ हेरफेर, रिपोर्ट के मुताबिक 50 फीसद केस कम दिखाए गए
Fri, 28 May 2021 05:16 PM IST
प्रियंका तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: प्रियंका तिवारी
Updated Fri, 28 May 2021 05:16 PM IST
सार
एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर के दौरान आईसीएमआर के पोर्टल पर इंदौर के लगभग 50 फीसद कोरोना के मामले ही जारी किए गए। यह खुलासा तब हुआ, जब स्थानीय अधिकारियों द्वारा जमा किए गए आंकड़ों की तुलना आईसीएमआर और राज्य सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों से की गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विपक्ष बार-बार यह आरोप लगा रहा है कि सरकार देशभर के कोरोना के आंकड़ों से छेड़छाड़ कर रही है। इस बीच कोरोना संक्रमण के आकंड़ों में हुुई छेड़छाड़ के मुद्दे पर मध्यप्रदेश सरकार भी कठघरे में खड़ी दिखाई पड़ रही है। दरअसल, इंदौर में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 50 फीसदी कम आकंड़े दिखाए जाने की बात सामने आई है। भारतीय अनुसंधान चिकित्सा परिषद (आईसीएमआर) के पोर्टल पर अपलोड किए गए डाटा में बड़े पैमाने पर कोरोना मामलों की अंडर-रिपोर्टिंग की गई है।
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कैसे हुआ खुलासा?
यह खुलासा तब हुआ, जब स्थानीय अधिकारियों द्वारा जमा किए गए डाटा की तुलना आईसीएमआर और राज्य सरकार की तरफ से जारी किए गए कोरोना आंकड़ों से की गई। 1 फरवरी 2021 से 14 मई 2021 तक आईसीएमआर द्वारा जारी डाटा के अनुसार इंदौर में कुल 1,54,474 कोरोना के मामले सामने आए थे, जबकि स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार यह आंकड़ा सिर्फ 77,353 का रहा। दोनों के आंकड़ों में लगभग 50 फीसद का अंतर साफ दिखा। इसका सीधा मतलब है कि आंकड़ों से छेड़छाड़ हुआ है। मालूम हो कि आईसीएमआर के पोर्टल पर आंकड़ों को जिलाधिकारी की ओर से चढ़ाया जाता है।
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पिछले 4 महीने में 25 से 60 फीसद तक मामले छुपाए गए
रिपोर्ट के मुताबिक जिलाधिकारियों ने पिछले चार महीनों में 25 से 60 फीसद तक मामलों को छुपाया। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इंदौर में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान (23 से 29 अप्रैल तक) सबसे अधिक (25,447) मामले सामने आए जबकि स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस अवधि तक का केवल 12,669 मरीजों का ही डाटा जारी किया।
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डाटा घोटाले को लेकर क्या बोले अमूल्य निधि
इस मामले पर जन स्वास्थ्य अभियान के राज्य संयोजक अमूल्य निधि ने कहा कि आंकड़ों को छुपाने का असर महामारी से निपटने के लिए बनाई जा रही योजना को लागू करने पर पड़ेगा। भोपाल में स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि महामारी के दौरान जिन जिलों में अधिक कोरोना के केस सामने आए, वहां के इन मामलों को छुपाया गया। हालांकि, जैसे ही यह मामले कम आने लगे तो आंकड़े जारी कर दिए गए।
आरोपों के जवाब में इंदौर के डीएम ने भी दिया तर्क
इंदौर के कलेक्टर मनीष ने इस रिपोर्ट का खंडन करते हुए दावा किया कि आईसीएमआर और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े अलग-अलग इसलिए हैं क्योंकि एक ही व्यक्ति का दो या उससे अधिक बार टेस्ट किया गया। साथ ही बाहर के कई लोग भी इंदौर आकर टेस्ट कराते हैं। उन्होंने कहा कि हम डाटा को अधिक सटीक बनाने का प्रयास करते हैं, लेकिन यह एक थका देने वाला काम है।
कोविड मामलों का डाटा अपलोड करने की क्या है प्रक्रिया?
इंदौर के सीएमएचओ डॉ. भूरे सिंह सैत्य ने कहा कि सैंपल लेने के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी व्यक्ति का विवरण आईसीएमआर के पोर्टल पर अपलोड करते हैं और एक पेशेंट आईडी बनाते हैं। इसके बाद सैंपल को प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है। भूरे सिंह ने बताया कि दोनों टेस्ट (आरटीपीसीआर और रैपिड एंटीजन) के रिजल्ट सैंपल लेने के 24 घंटे के अंदर दे दिए जाते हैं। डाटा में होने वाली गड़बड़ियों पर उन्होंने कहा कि आईसीएमआर के पोर्टल पर रीयल टाइम डाटा अपलोड करने की प्रक्रिया में कमियां हैं।
