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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Comment of MP High Court: Said- you will go on horseback to serve notice, present inspection report of nursing colleges in 24 hours

एमपी हाईकोर्ट की टिप्पणी: कहा- नोटिस सर्व करने घोड़े पर चढ़कर जाओगे, 24 घंटे में पेश करो नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट

Mon, 09 May 2022 08:53 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 09 May 2022 08:53 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों के संबंध में दायर याचिका की सुनवाई की। 24 घंटे में सभी कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट मांगी गई।  अनावेदक ने जब और समय चाहा तो हाईकोर्ट ने कहा कि नोटिस सर्व करने के लिए समय क्याें, इसके लिए क्या घोड़े पर चढ़कर जाना है। ईमेल से पलभर में नोटिस पहुंच जाता है। 

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Comment of MP High Court: Said- you will go on horseback to serve notice, present inspection report of nursing colleges in 24 hours
MP High Court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

नर्सिंग कॉलेज को लेकर लगाई गई याचिका पर सुनवाई के दौरान 24 घंटे में नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट तलब की है। इसके लिए चार सप्ताह का समय मांगे जाने पर हाईकोर्ट की रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पीके कौरव की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी की है। कहा है कि नोटिस सर्व करने घोड़े पर चढ़कर जाओगे क्या। ई-मेल के माध्यम से कुछ पलों में नोटिस सर्व हो जाता है। युगलपीठ ने याचिका अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित की है।
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बता दें कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2000-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारिण मापदण्ड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है।
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याचिका के साथ ऐसे कॉलेज की सूची व फोटो प्रस्तुत किए गए थे। याचिका में कहा गया था कि जब कॉलेज ही नहीं हैं तो छात्रों को कैसे पढ़ाया जाता होगा। याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ऐसे कॉलेजों को अनावेदक बनाने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए थे। याचिका की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने 55 कॉलेजों से सिर्फ सात कॉलेजों को अनावेदक बनाया है। याचिकाकर्ता को अपनी आपत्ति काउसिंल के समक्ष प्रस्तुत करना था, परंतु उसने ऐसा नहीं किया।
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पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कौंसिल की तरफ से निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। जिस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए युगलपीठ ने 24 घंटों में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए थे। समय बढ़ाए जाने के आग्रह करने पर युगलपीठ ने उक्त तल्ख टिप्पणी करते हुए आदेश का पालन नहीं होने पर प्रतिकूल आदेश पारित करने की चेतावनी दी है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेजा ने पैरवी की। 
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