MP News: एक हादसे में उजड़ गया पूरा परिवार, सड़क हादसे में पति-पत्नी हुई मौत, तीन बेटियां हुईं अनाथ
जुन्नारदेव में चांद से लौट रहे पति-पत्नी की बाइक जमुनिया जेठू के पास कार से टकरा गई। हादसे में पति नरेश चौधरी की मौके पर मौत हो गई, जबकि गंभीर घायल पत्नी वर्षा चौधरी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना के बाद उनकी तीन मासूम बेटियां अनाथ हो गईं। पूरे नगर में शोक का माहौल है और सड़क सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं।
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एक ही सड़क हादसे में हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गए। चांद से अपने घर लौट रहे पति-पत्नी की बाइक जमुनिया जेठू के पास एक कार से टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि पति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल पत्नी ने कुछ घंटों बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे नगर को झकझोर कर रख दिया है। सबसे ज्यादा चिंता और दर्द उन तीन मासूम बेटियों को लेकर है, जिनके सिर से एक ही रात में माता-पिता दोनों का साया उठ गया।
पारिवारिक कार्यक्रम से लौट रहे थे दंपति
जानकारी के अनुसार नरेश चौधरी (42) शुक्रवार शाम अपनी पत्नी वर्षा चौधरी (35) के साथ चांद से जुन्नारदेव लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि दोनों किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे और रात करीब साढ़े आठ बजे वापस घर लौट रहे थे। इसी दौरान जमुनिया जेठू के पास उनकी बाइक सामने से आ रही एक कार की चपेट में आ गई।
टक्कर इतनी भीषण कि दूर जा गिरे दोनों
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार और बाइक की भिड़ंत बेहद जोरदार थी। टक्कर लगते ही बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों पति-पत्नी सड़क पर दूर जा गिरे। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक नरेश चौधरी गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। कुछ ही देर में उन्होंने मौके पर दम तोड़ दिया। वहीं वर्षा चौधरी गंभीर रूप से घायल थीं। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल छिंदवाड़ा भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन देर रात उपचार के दौरान उनकी भी मौत हो गई।
तीन मासूम बेटियों के सिर से उठा माता-पिता का साया
इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर दंपति की तीन बेटियां हैं। बताया जा रहा है कि बच्चियों की उम्र करीब 10 साल, 6 साल और 4 साल है। शुक्रवार तक जिन बच्चों की दुनिया उनके माता-पिता के इर्द-गिर्द घूमती थी, शनिवार सुबह वही बच्चियां अनाथ हो गईं।नगर के लोग जब बच्चियों को देख रहे थे तो हर आंख नम हो रही थी। परिवार के लोगों के मुताबिक बच्चियां बार-बार अपने माता-पिता के बारे में पूछ रही थीं। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर रहा था।
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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दिवंगत दंपति स्वर्गीय गोविंद मांडवार के पुत्र और पुत्रवधु थे। नरेश चौधरी अपने मिलनसार और सरल स्वभाव के कारण क्षेत्र में अच्छी पहचान रखते थे। वे महेश मांडवार, नरेंद्र मांडवार और महेंद्र मांडवार के भाई थे। हादसे की खबर मिलते ही रिश्तेदार, मित्र और परिचित बड़ी संख्या में उनके घर पहुंचने लगे। पूरे घर में चीख-पुकार और मातम का माहौल बना रहा।
नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
शनिवार दोपहर जुन्नारदेव के स्थानीय मोक्षधाम में पति-पत्नी का अंतिम संस्कार किया गया। दोनों को एक ही चिता पर अंतिम विदाई दी गई। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में नगरवासी, सामाजिक संगठन, मित्र और परिचित शामिल हुए। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल इतना भावुक था कि कई लोगों की आंखों से आंसू नहीं रुक पाए। लोगों ने कहा कि यह हादसा पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
सड़क सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल
इस हादसे के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण लगातार सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई करने और सड़क सुरक्षा के बेहतर इंतजाम करने की मांग की है।
