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MP News: छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू, अब कुलगुरु के सभी अधिकार शासन के अधीन; जानें वजह

Sat, 29 Nov 2025 08:47 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी Updated Sat, 29 Nov 2025 08:47 PM IST
सार

महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं के बढ़ते आरोपों के बीच राज्य शासन ने बड़ा कदम उठाते हुए धारा 52 लागू कर दी है। इसके साथ ही कुलगुरु शुभा तिवारी के सभी अधिकार शासन के अधीन कर दिए गए हैं।

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Chhatarpur News: Big news regarding Maharaja Chhatrasal Bundelkhand University, Section 52 implemented in the
छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में एक्शन के बाद बड़ा बदलाव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छतरपुर स्थित महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में लगातार सामने आ रही वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों के बाद राज्य शासन ने बड़ा कदम उठाते हुए विश्वविद्यालय पर धारा 52 लागू कर दी है। इसके साथ ही कुलगुरु शुभा तिवारी के सभी प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से शासन के अधीन कर दिए गए हैं।

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जानकारी के अनुसार, धारा 52 तभी लागू की जाती है जब किसी विश्वविद्यालय की स्थिति असामान्य हो जाए और प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस हो। यह कार्रवाई राज्यपाल की अनुशंसा पर की जाती है। धारा 52 लागू होने के बाद वर्तमान कुलगुरु अपने पद से जुड़े अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकेंगी और विश्वविद्यालय का संचालन प्रत्यक्ष रूप से राज्य शासन के नियंत्रण में रहेगा।

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परामर्शी समिति का भी पुनर्गठन किया जाएगा
विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 13 व 14 के तहत नई कुलगुरु की नियुक्ति तक शासन या राज्यपाल एक उच्च स्तरीय समिति गठित करेंगे। वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए अधिनियम की धारा 47 (वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट) और धारा 48 (लेखा परीक्षण) के प्रावधान लागू किए जाएंगे। धारा 52 के प्रभाव में विश्वविद्यालय की विद्या परिषद और कार्यपरिषद भंग कर दी जाएगी और नई समितियों का गठन राज्यपाल द्वारा किया जाएगा। इसी प्रकार धारा 26-27 के तहत विभिन्न संकायों की बोर्ड ऑफ स्टडीज, धारा 20 के अनुसार विश्वविद्यालय कोर्ट तथा धारा 54 के तहत विद्यार्थी परामर्शी समिति का भी पुनर्गठन किया जाएगा।

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इस वजह से विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू करने का निर्णय लिया गया
गौरतलब है कि कुलगुरु शुभा तिवारी और कुलसचिव यशवंत पटेल की नियुक्ति के बाद से ही छात्रों और जनप्रतिनिधियों द्वारा राजभवन एवं शासन को वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतें भेजी जा रही थीं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए शासन ने अंतत: विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू करने का निर्णय लिया है।

ओरछा में माता सीता पर की थी बयानबाजी
लंबे समय से विवादों में घिरी महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. शुभा तिवारी को कुर्सी से बाहर कर दिया गया है। इसी साल मार्च में उन्होंने ओरछा धाम में एक कार्यक्रम में माता सीता को 'फेमिनिस्ट' बताते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसका हिंदू संगठनों और अभाविप ने कड़ा विरोध किया था। उन्हें हटाने की मांग की थी। छतरपुर जिले में सर्व हिंदू समाज और हिंदू संगठनों ने उनके बयान का विरोध किया था।

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