सिंधिया और शिवराज के दबदबे पर लगाम लगाने के लिए टला मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 30 Jun 2020 07:33 PM IST
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शिवराज सिंह चौहान-ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो)
शिवराज सिंह चौहान-ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

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सार

  • सिंधिया को काबू में रखकर साधना चाहती है भाजपा, खत्म की जाएगी सौदेबाजी की ताकत 
  • शिवराज, वीडी शर्मा, नरोत्तम, सुहास भगत सब पहुंचे भोपाल
  • ज्योतिरादित्य ने भी टाला मंगलवार का दौरा

विस्तार

सोमवार की सुबह तक मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल का बन रहा आकार फिर टल गया। मंगलवार को भोपाल पहुंच कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फिर कोविड-19 से जूझने समेत तमाम कार्यों में व्यस्त हैं। बताते हैं दिल्ली का दो दिन से अधिक समय का दौरा शिवराज सिंह चौहान के लिए काफी कड़वा रहा।
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केंद्रीय नेतृत्व न तो शिवराज के फार्मूले से सहमत है और न ही शिवराज को केंद्रीय नेतृत्व का फार्मूला रास आया। मंत्रिमंडल के विस्तार की एक पूरी कवायद करके फिर जल्द ही शिवराज को दिल्ली पहुंचना है।
तब तक राज्य सरकार पांच मंत्रियों के मंत्रिमंडल से ही सरकार चलाएगी। भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया को साधे तो रखना चाहती है, लेकिन उनके ज्यादा लोगों को मंत्री बना कर और उन्हें मनचाहे विभाग देकर सिंधिया को इतना ताकतवर नहीं बनाना चाहती कि वो बीच बीच में दबाव बनाकर सौदेबाजी करें।
भाजपा सिंधिया को काबू में रख कर उनकी सियासी सौदेबाजी की ताकत भी खत्म करना चाहती है।

दो डिप्टी सीएम- एक नरोत्तम, दूसरे तुलसी सिलावट

मध्य प्रदेश सरकार में दो डिप्टी सीएम होने चाहिए। यह प्रस्ताव शिवराज के लिए भी कड़वे घूंट की तरह है। ज्योतिरादित्य सिंधिया चाहते हैं कि तुलसी सिलावट को उप मुख्यमंत्री बनाया जाए।

इसी बात के मान सम्मान को लेकर उनकी कांग्रेस पार्टी से नाराजगी थी। दूसरी तरफ नरोत्तम मिश्रा का कद मध्य प्रदेश सरकार में लगातार बड़ा हो रहा है। वह राज्य के गृहमंत्री हैं। मुख्यमंत्री हमेशा गृह मंत्रालय अपने किसी विश्वसनीय मंत्री को देता है या फिर अपने पास रखता है।

नरोत्तम शिवराज का दरबार छोड़कर बाकी भाजपा के सभी बड़े दरबारों में अपनी साख बनाए हुए हैं। पार्टी का एक धड़ा चाहता है कि तुलसी सिलावट कांग्रेस से ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आए हैं।

उन्हें डिप्टी सीएम का पद देने के साथ नरोत्तम को भी दिया जाए। नरोत्तम पुराने भाजपाई हैं। ग्वालियर चंबल संभाग में भी अपनी पकड़ रखते हैं। इस बार भाजपा की सरकार बनने के बाद से वह बेहद सक्रिय हैं।

इस तरह से एक संतुलन आएगा। शिवराज की परेशानी यह है कि वह ऐसी जटिल परिस्थिति में पुराने नेता, तीन बारत भाजपा की सरकार में मंत्री रहे लोगों का क्या करें? भूपेन्द्र सिंह, गोपाल भार्गव, यशोधरा राजे सिंधिया को मंत्रिमंडल में क्यों न शामिल करें?

इस तरह के करीब 13-14 वरिष्ठ नेताओं को वह भोपाल लौटकर क्या जवाब दें? बताते हैं कहानी कुछ इसी तरह की पेचीदगियों में फंसी है।

ज्योतिरादित्य बनाम कांग्रेस के चक्रव्यूह से निकलना चाहते हैं शिवराज

शिवराज सिंह चौहान ने तीन बार की सरकार अपने मिजाज से चलाई है। मुख्यमंत्री और भाजपा नेता के तौर पर हर गुट पर भारी रहे हैं। इस बार पर्दे के पीछे से पुराने सहयोगी कैलाश विजयवर्गीय झटका दे रहे हैं तो कुछ अन्य भाजपा नेताओं ने भी सिर उठाना शुरू कर दिया है।

राज्य सरकार को अभी 24 सीटों पर उप चुनाव का सामना करना है। इनमें से 16 सीटें ग्वालियर चंबल संभाग की हैं। इन सभी 16 सीटों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बागी होकर आए पूर्व विधायकों के लिए सिंधिया लगातार बैटिंग कर रहे हैं।

सिंधिया इनमें से कम से कम आठ के लिए मंत्रीपद चाहते हैं। पांच सदस्यीय मंत्रिमंडल में सिंधिया के अभी दो मंत्री हैं। छह को और मंत्री बनाने का दबाव बना रहे हैं। इसके समानांतर 16 सीटों पर 2018 में हारे भाजपा प्रत्याशी, पुराने नेता उप चुनाव में टिकट मिलने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।

सिंधिया के समर्थक इस पूरी लड़ाई को सिंधिया बनाम कांग्रेस बनाकर जीतने के पक्ष में हैं। शिवराज सिंह चौहान का खेमा चाहता है, यह हवा और सूरत दोनों बदलनी चाहिए। भाजपा के पुराने नेताओं का सम्मान भी बने रहना चाहिए।

मध्य प्रदेश में आखिर शिवराज भी कब तक?

भाजपा में नेताओं का एक धड़ा और भी है। वह मध्य प्रदेश में आखिर शिवराज कब तक, जैसी सोच को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है। बताते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व के पास तक अच्छी पहुंच रखने वाले इन नेताओं को मध्य प्रदेश में चेहरा बदलने के लिए यह सही समय लग रहा है।

शिवराज सिंह चौहान भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। तीन बार के मुख्यमंत्री, अनुभवी नेता हैं। एक सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम को संगठन में इस तरह के नेताओं की आवश्यकता है।

वैसे भी नड्डा ने अभी अपनी टीम को अंतिम रूप नहीं दिया है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने पार्टी में युवा नेतृत्व को पैदा किया है। उन्हें जिम्मेदारियां दी हैं।

वह भविष्य की भाजपा का निर्माण कर रहे हैं। इसलिए जहां तक हो सके नए चेहरे को आगे लाया जाना चाहिए। बताते हैं कुछ इसी तरह के कारण रहे और सोमवार को नरोत्तम मिश्रा को अचानक दिल्ली जाना पड़ा।

लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया कि नरोत्तम ने दिल्ली आकर कब और किससे मुलाकात की।

अचानक बदला सीन

रविवार देर रात तक चली भेंट मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल का फेर बदल तय माना जा रहा था। भाजपा के एक बड़े नेता का कहना था कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ मंत्रिमंडल फेरबदल भी होगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, राज्य ईकाई के संगठन मंत्री सुहास भगत केंद्रीय नेताओं (केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन मंत्री बीएल संतोष) से मेल मिलाप में व्यस्त थे।

विनय सहस्त्रबुद्धे समेत तमाम नेता हर घटनाक्रम पर निगाह लगाए थे। इस क्रम में शिवराज की केंद्रीय गृहमंत्री से दो बार मुलाकात हुई। जेपी नड्डा से कई बार की बात हुई। सोमवार को चार बजे प्रधानमंत्री से मिलने का समय प्रस्तावित हो गया।

इससे पहले सिंधिया से भी भेंट हुई। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के सोमवार शाम को चार बजे तक भोपाल पहुंचने का कार्यक्रम भी तय था। तय कार्यक्रम के अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी भोपाल पहुंचना था, लेकिन बताते हैं कि प्रधानमंत्री से आधा घंटे की हुई मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हकीकत का अहसास हो गया।

वह लौटकर मध्य प्रदेश भवन आए और एक नई उधेड़बुन में उलझ गए। जेपी नड्डा से फिर बात हुई और मंगलवार को सुबह टीम भोपाल पहुंच गई। अब मंत्रिमंडल का विस्तार थोड़ा रुक कर होने के संकेत हैं।
 
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