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ओबीसी आरक्षण पर घमासान: सिंघार बोले- सरकार ने पिछड़ों की पीठ में छुरा घोंपा, पटवारी ने लगाया साजिश का आरोप

Sat, 10 Oct 2026 03:25 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 10 Oct 2026 03:25 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार की पैरवी और आंकड़ों पर सवाल उठाए। पटवारी ने संघ के इशारे पर आरक्षण रोकने का आरोप लगाया, जबकि उमंग सिंघार ने सीमित सर्वे, पुराने आंकड़ों और सरकारी पदों की रिक्तियों को मुद्दा बनाया। कांग्रेस अब फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।

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Uproar over OBC reservation: Singhar says the government stabbed the backward classes in the back; Patwari all
पीसीसी में प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर आरक्षण के समर्थन में मजबूत तथ्य और पर्याप्त आंकड़े पेश नहीं करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि 7.26 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में पिछड़ेपन का आकलन करने के लिए करीब 10 हजार लोगों के सर्वे को आधार क्यों बनाया गया। पटवारी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारे पर पिछड़ों का हक रोका गया, जबकि सिंघार ने इसे समाज की पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया। कांग्रेस ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है। शनिवार को कांग्रेस मुख्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा को इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से रोकने के लिए साजिश करती रही। पटवारी ने दावा किया कि आरक्षण के कानूनी मामले में सरकार ने वकीलों पर भारी खर्च किया, लेकिन पिछड़े वर्ग के पक्ष में प्रभावी पैरवी नहीं की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ेगी और इसके लिए होने वाला खर्च पार्टी उठाएगी।
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1983 के आंकड़ों पर निर्भरता क्यों?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की ओर से अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और सर्वेक्षण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग को उम्मीद थी कि 27 प्रतिशत आरक्षण से शिक्षा और सरकारी नौकरियों में अवसर बढ़ेंगे, लेकिन सरकार अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखने में नाकाम रही। सिंघार के मुताबिक, हाईकोर्ट के फैसले में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के लिए 1983 की महाजन आयोग रिपोर्ट पर निर्भरता का उल्लेख है। कांग्रेस ने सवाल किया कि इतने वर्षों बाद भी सरकार ने आरक्षण के समर्थन में नए, व्यापक और विश्वसनीय आंकड़े क्यों नहीं जुटाए। पार्टी का कहना है कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति सामने रखने के लिए ठोस अध्ययन जरूरी था।
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करोड़ों की आबादी में सर्वे का दायरा सीमित
कांग्रेस ने डॉ. बीआर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की 2023 की रिपोर्ट को भी निशाने पर लिया। सिंघार ने कहा कि प्रदेश की करीब 7.26 करोड़ आबादी के मुकाबले लगभग 10 हजार लोगों के सर्वे के आधार पर पिछड़े वर्ग की स्थिति का आकलन किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि सामाजिक पिछड़ेपन की तुलना करने के लिए सर्वेक्षण में दूसरे सामाजिक वर्गों को शामिल क्यों नहीं किया गया। सिंघार ने रिपोर्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग की शैक्षणिक स्थिति को अत्यंत कमजोर बताए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को अदालत में उपलब्ध आंकड़ों और रिपोर्ट के निष्कर्षों के बीच अंतर स्पष्ट करना चाहिए था। कांग्रेस ने मांग की कि सरकार बताए कि सर्वेक्षण की कमियों को दूर करने और आरक्षण के समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य जुटाने के लिए उसने क्या प्रयास किए।
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प्रथम श्रेणी के पद खाली, प्रतिनिधित्व पर सवाल
कांग्रेस ने सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। सिंघार के अनुसार, हाईकोर्ट के फैसले में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए स्वीकृत प्रथम श्रेणी के 68.24 प्रतिशत पद और कुल स्वीकृत पदों में 51.17 प्रतिशत पद खाली होने का उल्लेख है। उन्होंने सवाल किया कि जब इतने पद रिक्त हैं, तो सरकार ने भर्ती प्रक्रिया पूरी कर प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए। सिंघार ने यह भी पूछा कि सरकार 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा से आगे जाने के लिए जरूरी असाधारण परिस्थितियों को साबित करने के पर्याप्त आधार क्यों नहीं जुटा पाई। प्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और प्रस्तावित अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण को मिलाकर कुल आरक्षण 63 प्रतिशत हो रहा था। इसी सीमा और उसके समर्थन में पेश किए गए साक्ष्यों को लेकर मामला अदालत में विचाराधीन था।

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सर्वदलीय बैठक पर भी उठाए सवाल
पटवारी ने आरोप लगाया कि मोहन यादव सरकार ने सर्वदलीय बैठक के नाम पर अन्य पिछड़ा वर्ग को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस युवाओं को इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगने के लिए प्रेरित करेगी। पार्टी का सवाल है कि जब आरक्षण के समर्थन में नए आंकड़ों और मजबूत कानूनी आधार की जरूरत थी, तब सरकार ने इस दिशा में प्रभावी काम क्यों नहीं किया। हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था। 159 पृष्ठों के फैसले में आंकड़ों, सर्वेक्षण और आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार किया गया। अब कांग्रेस ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। इस मुद्दे पर प्रदेश में आरक्षण को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने के आसार हैं।
 
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