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भोपाल की लोअर लेक पर खतरा: NGT ने बनाई संयुक्त जांच समिति, अवैध निर्माण, सीवेज और अतिक्रमण पर मांगी रिपोर्ट

Thu, 07 May 2026 05:44 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Thu, 07 May 2026 05:44 PM IST
सार

भोपाल की लोअर लेक और भोज वेटलैंड क्षेत्र में अवैध निर्माण, अतिक्रमण, मिट्टी-मलबा डालकर झील भरने और बिना ट्रीटमेंट का सीवेज छोड़ने के मामले में NGT ने सख्ती दिखाई है। ट्रिब्यूनल ने भोपाल नगर निगम समेत कई एजेंसियों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 

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Threat to Bhopal's Lower Lake: NGT Constitutes Joint Investigation Committee; Seeks Report on Illegal Construc
लोअर लेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल की लोअर लेक यानी भोज वेटलैंड में लगातार हो रहे अतिक्रमण, गंदे पानी की निकासी और अवैध निर्माण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। NGT की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए भोपाल नगर निगम समेत अन्य एजेंसियों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामला रामसर साइट घोषित भोज वेटलैंड के फुल टैंक लेवल (FTL), बफर जोन और आसपास के इलाके में हो रहे अवैध निर्माण, मिट्टी-मलबा डालकर झील को भरने और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है। यह याचिका राशिद नूर खान की ओर से दायर की गई है।
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झील में सीधे छोड़ा जा रहा गंदा पानी
NGT के सामने पेश फोटो और दस्तावेजों में सामने आया कि कई जगहों से बिना ट्रीटमेंट का सीवेज सीधे लोअर लेक में छोड़ा जा रहा है। नालों और पाइपलाइन के जरिए गंदा पानी झील में पहुंच रहा है, जिससे पानी की गुणवत्ता और जलीय जीवों पर खतरा बढ़ गया है।फोटो में झील किनारे प्लास्टिक कचरा, गंदगी और सीवेज मिला पानी भी दिखाई दिया। ट्रिब्यूनल ने इसे पर्यावरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है।
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पेड़ों में छेद कर डाले गए केमिकल
आवेदन में आरोप लगाया गया कि प्रोफेसर कॉलोनी रोड और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पेड़ों में मशीन से छेद कर रासायनिक पदार्थ डाले गए, ताकि उन्हें धीरे-धीरे सुखाया जा सके। आशंका जताई गई कि यह अवैध कब्जे और निर्माण की तैयारी का हिस्सा हो सकता है।
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झील किनारे मिट्टी डालकर बदला जा रहा स्वरूप
फोटो में यह भी सामने आया कि झील के किनारों और बफर जोन में अवैध तरीके से मिट्टी और मलबा डालकर भराव किया जा रहा है। कई जगह जमीन का स्वरूप बदलकर निर्माण गतिविधियों की तैयारी की जा रही है। साथ ही बफर क्षेत्र में अस्थायी और स्थायी निर्माण भी दिखाई दिए।

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NGT ने बनाई संयुक्त जांच समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT ने भोपाल नगर निगम को मौके पर निरीक्षण कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एक संयुक्त जांच समिति गठित की गई है, जिसमें MoEF&CC, CPCB, वेटलैंड अथॉरिटी/EPCO और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति को चार सप्ताह में जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होगी।

 
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