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SC: 'सात साल की सजा पूरी, फिर भी आठ वर्ष जेल में कैसे रहा आरोपी?' कोर्ट का मध्य प्रदेश सरकार से 'सुप्रीम' सवाल
Wed, 27 Aug 2025 03:01 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Wed, 27 Aug 2025 03:01 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि कैसे एक बलात्कार आरोपी को सात साल की सजा पूरी होने के बावजूद आठ साल तक जेल में रखा गया। आरोपी को सागर जिले के खुरी सत्र न्यायालय ने पहले आजीवन कारावास की सजा और 2,000 रुपये जुर्माना सुनाया था।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि कैसे एक बलात्कार आरोपी को सात साल की सजा पूरी होने के बावजूद आठ साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया। न्यायाधीश जे. बी. परिदवाला और के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को मध्य प्रदेश के सागर जिले के खुरी सत्र न्यायालय में बलात्कार सहित अन्य अपराधों के तहत मुकदमा चलाकर सजा सुनाई गई थी।
पीठ ने कहा, "हम यह जानना चाहते हैं कि ऐसा गंभीर लापरवाही कैसे हुई और क्यों याचिकाकर्ता को पूरी सात साल की सजा पूरी करने के बावजूद आठ साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया। हम चाहते हैं कि राज्य इस मामले में उचित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे।"
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ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा के साथ 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद आरोपी ने उच्च न्यायालय में अपील की, जिसे आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए सजा को आजीवन कारावास से घटाकर न्यूनतम सात साल कठोर कारावास कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि उच्च न्यायालय ने सजा कम करने के बावजूद आरोपी को जेल से 6 जून 2025 को ही रिहा किया गया। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को तय की है।
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पीठ ने कहा, "हम यह जानना चाहते हैं कि ऐसा गंभीर लापरवाही कैसे हुई और क्यों याचिकाकर्ता को पूरी सात साल की सजा पूरी करने के बावजूद आठ साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया। हम चाहते हैं कि राज्य इस मामले में उचित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे।"
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ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा के साथ 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद आरोपी ने उच्च न्यायालय में अपील की, जिसे आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए सजा को आजीवन कारावास से घटाकर न्यूनतम सात साल कठोर कारावास कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि उच्च न्यायालय ने सजा कम करने के बावजूद आरोपी को जेल से 6 जून 2025 को ही रिहा किया गया। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को तय की है।
