रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव: बांस और सागौन पर व्यापार व्यवसाय और निवेश को प्रोत्साहन देने सेक्टोरियल सत्र आयोजित
बैतूल जिले में वुडन क्लस्टर स्थापित किया जा रहा है, जिसमें 101 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से लगभग 3,000 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इस क्लस्टर में लकड़ी से बने फर्नीचर, प्लाईवुड, पार्टीकल बोर्ड, खिलौने और डेकोरेटिव आइटम्स जैसी उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।
विस्तार
बैतूल सागौन की जीआई टैगिंग
बैतूल डीएफओ श्री नवीन गर्ग ने बताया कि जिले के तैलीया सागौन को राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाए जाने हेतु जिओ टैग पंजीकरण की कार्यवाही की जा रही है। सागौन की जीआई टैगिंग हेतु G.I. Registry पोर्टल पर "बैतूल टीक वुड" नाम से फाइल कर दी गई है। जिसमे जीआई ऑफिस चेन्नई की सीजीएम मीटिंग के बाद बैतूल सागौन का GIR Journal में स्वीकृत एवं प्रकाशित होने के बाद जीआई टैग प्रदान किया जाएगा। जीआई टैगिंग से सागौन एवं उनके उत्पाद के विक्रय हेतु अधिक से अधिक क्रेता को बढ़ाना एवं स्थानीय स्तर पर वुडन क्लस्टर स्थापित कर सागौन एवं सागौन काष्ठ की खपत को बढ़ाना, स्थानीय विनिर्माता एवं व्यापारी की आय में वृद्धि करना एवं स्थानीय जनता को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करना जीआई टैगिंग के मुख्य उद्देश्य है।
जिले के सागौन की महत्वता एवं स्थानीय व्यवसायियों को व्यवसाय में सुविधा प्रदान करने एवं एक जिला एक उत्पाद के रूप में पृथक पहचान स्थापित करने की दृष्टि से एमएसएमई विभाग के सहयोग से एसपीवी बैतूल क्लस्टर डेव्हलपमेंट एसोसिएशन द्वारा भोपाल-नागपुर एनएच.69 पर स्थित ग्राम कढ़ाई के 20 हे. शासकीय भूमि पर वुडन क्लस्टर का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें व्यवसाय के लिए 101 भूखण्ड विकसित किये जाएंगे। वूडन क्लस्टर में 101 औद्योगिक इकाइयों में लगभग 3 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। यहां लगभग 200 करोड़ रु. राशि का अनुमानित निवेश किया जाएगा। वुडन क्लस्टर में सुविधाओं हेतु सिंगल विंडो प्लेटफार्म स्थापित किया जाएगा, जिसमें बैंक, ए.टी.एम., कैंटीन, मीटिंग हाल, ट्रेनिंग हाल, फायर बिग्रेड स्टेशन, वन विभाग एवं उद्योग विभाग का कार्यालय बनाया जाएगा। वुडन क्लस्टर में फर्निचर, प्लायवुड, पार्टीकल बोर्ड, विनियर, एम.डी.एफ., खिलौना, डेकोरेटिव आइटम प्रकार के उद्योगों में जीरो वेस्टेज पॉलिसी के तहत लकड़ी का पूर्ण उपयोग किया जाएगा।
जिले में 60 आरा मशीन, 200 फर्नीचर निर्माण इकाइयां एवं 3 शिल्पकार पंजीकृत
सागौन के विक्रय से बैतूल को लगभग 100 करोड़ रुपए का राजस्व प्रतिवर्ष प्राप्त होता है। जिले में 60 आरा मशीन, 200 फर्नीचर निर्माण इकाइयां एवं 3 शिल्पकार पंजीकृत है। सागौन काष्ठ से हस्तशिल्प की मूर्तियां, विनियर प्लाईवुड, फर्नीचर, मकानों की चौखट, दरवाजे, खिलौने डेकोरेटिव आइटम एवं अन्य कलाकृतियों का निर्माण किया जाता है। इन व्यावसायिक गतिविधियों से अनुमानित 25 करोड़ रुपए का प्रतिवर्ष व्यापार होता है एवं जिलों की 2 इकाई द्वारा लगभग 10 करोड़ राशि का निर्यात यूरोपिन देशों में किया जाता है।
राष्ट्रीय बांस मिशन योजना
डीएफओ हरदाअनिल चोपड़ा ने बताया कि बांस उत्पाद निर्माण उद्योगों की स्थापना एवं राष्ट्रीय बांस मिशन योजना में प्रावधान के संबंध में बताया कि बांस के पौधों का उत्पादन तथा बांस रोपण अंतर्गत बांस रोपणियों की स्थापना में निजी क्षेत्र के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान, कृषि क्षेत्र में बांस वृक्षारोपण पर रू. 120/- प्रति पौधा 50:30:20 के अनुपात में तीन वर्षों में अनुदान, बांस उत्पादन निर्माण एवं प्रसंस्करण में निजी क्षेत्र के लिए 30 से 50 प्रतिशत तक अनुदान,बांस उपचरण एवं संरक्षण पर निजी क्षेत्र के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान, बांस बाजार के लिए अद्योसंरचना एवं विकास निजी क्षेत्र के लिए 25 प्रतिशत तक अनुदान बांस आधारित औजार, उपकरण एवं मशीनरी का विकास निजी क्षेत्र के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान हैं। उन्होंने बताया कि स्वसहायता समूह के सदस्यों द्वारा एम्पोरियम का संचालन होता है।
सेक्टोरियल सत्र में बांस से बने उत्पादों को बढ़ावा देने किया प्रेरित
नागपुर से वेद प्रकाश सोनी ने बांस उत्पादों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले बांस से छोटे-मोटे उत्पाद चटाई इत्यादि बनाई जाती थी, लेकिन कुछ सालों में बदलाव आया और बांस उत्पादन में काफी एक्यूमेंट हुआ। अब मशीन की सहायता से बांस उत्पाद की संख्याओं में वृद्धि हुई है, जिसकी अन्य जिलों में काफी डिमांड है। हम अगरबत्ती, चारकोल, बंबू फर्नीचर, बंबू प्लाईवुड, बंबू बोट, बंबू बॉटल जैसे उत्पाद आसानी से मशीन की सहायता से बना सकते है। इस दौरान शांतला ने बंबू के बेस मैनेजमेंट की जानकारी दी। आशीष पांडे ने जिले में बांस से संबंधित खेती की जानकारी दी और उद्यमिता के विषय में अपने विचार सांझा किए। उन्होंने कहा कि हम जिले में बांस की खेती कर मार्केट में विस्तार ला सकते है। हम अपनी मार्केटिंग को कैसे बढ़ाएं इसकी भी जानकारी दी गई। जनरल मैनेजर अभिमन्यु श्रीवास्तव ने कहा कि यूरोप में बांस की अधिक डिमांड है। पहले भारत में बांस से निर्मित उत्पादों का उपयोग करते थे, लेकिन अब हमने दूरी बना ली है। उन्होंने सभी से पुन्ह बांस, टीक, बम्बू से बने उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। बम्बू मिशन मप्र राज्य शासन के तकनीकी विशेषज्ञ श्री सरदार भाईरे ने जिले के किसानों को बांस की खेती में वृद्धि किए जाने की टिप्स सांझा की। उन्होंने कहा कि बांस की खेती में किसानों को पेशेंस रखना पड़ेगा। इसकी खेती हमें तुरंत में मुनाफा तो नहीं देती, लेकिन कुछ सालों बाद जो मुनाफा मिलता है वह अधिक होता है।
