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प्रीतम लोधी विवाद: नेताओं के आगे क्यों झुकती है कानून की ताकत? जीतू पटवारी का पुलिस को खुला खत, उठाए बड़े सवाल
Fri, 24 Apr 2026 05:59 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 24 Apr 2026 05:59 PM IST
सार
प्रीतम लोधी द्वारा पुलिस अधिकारी को धमकाने के मामले ने सियासत गरमा दी है। इस पर जीतू पटवारी ने पुलिस के नाम खुला पत्र लिखकर सवाल उठाए कि आखिर नेताओं के सामने पुलिस नरम क्यों पड़ जाती है। उन्होंने पुलिस से संविधान के अनुसार काम करने और दबाव में न आने की अपील की है।
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पीसीसी चीफ जीतू पटवारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में पुलिस और सियासत के टकराव का मुद्दा अब खुलकर सामने आ गया है। पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी द्वारा एक पुलिस अधिकारी को धमकाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसी घटनाक्रम को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने पुलिस अधिकारियों के नाम खुला पत्र लिखते हुए व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सत्ता का दबाव कानून पर भारी
पटवारी ने अपने पत्र में लिखा कि एक विधायक द्वारा आईपीएस अधिकारी को धमकाने की घटना केवल एक व्यक्ति का व्यवहार नहीं, बल्कि उस माहौल का संकेत है जहां सत्ता का दबाव कानून और संविधान पर हावी होता दिख रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया।
नेताओं के सामने नरम, आम लोगों पर सख्त क्यों?
उन्होंने पुलिस से सीधा सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां हैं, जिनमें प्रशिक्षित और सशक्त पुलिस अधिकारी रक्षात्मक नजर आते हैं। पटवारी ने कहा कि नेताओं के सामने पुलिस की आवाज धीमी क्यों पड़ जाती है, जबकि आम नागरिकों के मामलों में वही तंत्र सख्त दिखाई देता है।
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पुलिस पर दबाव और खामोशी खतरनाक
पत्र में यह भी कहा गया कि कई मामलों में सत्ताधारी दल के नेता पुलिस पर दबाव बनाने या उन्हें अपमानित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन प्रतिक्रिया अक्सर सीमित या शांत रहती है। उन्होंने IPS Association के पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें आक्रोश से ज्यादा बेबसी झलकती है।
यह भी पढ़ें-गर्म हवाओं का अटैक, मध्यप्रदेश में बढ़ी झुलसाने वाली गर्मी, आज 11 जिलों में लू का अलर्ट
संविधान को सर्वोपरि मानें
पटवारी ने पुलिसकर्मियों से अपील की कि वे किसी व्यक्ति या सरकार नहीं, बल्कि संविधान को सर्वोच्च मानकर काम करें और अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कानून लागू करने वाली संस्था ही कमजोर दिखेगी, तो आम लोगों का भरोसा डगमगा जाएगा।
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सत्ता का दबाव कानून पर भारी
पटवारी ने अपने पत्र में लिखा कि एक विधायक द्वारा आईपीएस अधिकारी को धमकाने की घटना केवल एक व्यक्ति का व्यवहार नहीं, बल्कि उस माहौल का संकेत है जहां सत्ता का दबाव कानून और संविधान पर हावी होता दिख रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया।
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नेताओं के सामने नरम, आम लोगों पर सख्त क्यों?
उन्होंने पुलिस से सीधा सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां हैं, जिनमें प्रशिक्षित और सशक्त पुलिस अधिकारी रक्षात्मक नजर आते हैं। पटवारी ने कहा कि नेताओं के सामने पुलिस की आवाज धीमी क्यों पड़ जाती है, जबकि आम नागरिकों के मामलों में वही तंत्र सख्त दिखाई देता है।
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पुलिस पर दबाव और खामोशी खतरनाक
पत्र में यह भी कहा गया कि कई मामलों में सत्ताधारी दल के नेता पुलिस पर दबाव बनाने या उन्हें अपमानित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन प्रतिक्रिया अक्सर सीमित या शांत रहती है। उन्होंने IPS Association के पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें आक्रोश से ज्यादा बेबसी झलकती है।
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संविधान को सर्वोपरि मानें
पटवारी ने पुलिसकर्मियों से अपील की कि वे किसी व्यक्ति या सरकार नहीं, बल्कि संविधान को सर्वोच्च मानकर काम करें और अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कानून लागू करने वाली संस्था ही कमजोर दिखेगी, तो आम लोगों का भरोसा डगमगा जाएगा।
