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भोपाल की सड़कों पर सियासत गरम: अरुण यादव बोले-सड़कें कम, मौत के गड्ढे ज्यादा,फूल चढ़ाकर लोगों ने किया प्रदर्शन
Mon, 07 Sep 2026 06:30 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 07 Sep 2026 06:30 PM IST
सार
भोपाल की जर्जर सड़कों पर राजनीति गरमाई। अरुण यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा- राजधानी की सड़कें कम, मौत के गड्ढे ज्यादा हैं। इधर, परेशान लोगों ने फूल-माला और अगरबत्ती से सड़क को श्रद्धांजलि देकर अनोखा विरोध जताया।
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सड़क पर रहवासियों ने फूल चढ़ाए और अगरबत्ती जलाई
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी की जर्जर सड़कों और गड्ढों को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव ने भोपाल की सड़कों की बदहाली को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राजधानी की सड़कें अब सड़क कम और मौत के गड्ढे ज्यादा बन चुकी हैं। अरुण यादव ने कहा कि जब प्रदेश की राजधानी में ही सड़कें जानलेवा स्थिति में पहुंच गई हैं, तो मध्यप्रदेश के बाकी शहरों और कस्बों की सड़कों का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने सरकार के विकास के दावों पर तंज कसते हुए कहा कि यह ‘ट्रिपल इंजन विकास’ का मॉडल नहीं, बल्कि सरकार की नाकामी का आईना है।
सड़क की हालत पर अनोखा विरोध, फूल चढ़ाए और अगरबत्ती जलाई
भोपाल में खराब सड़कों से परेशान लोगों का गुस्सा अब विरोध के नए रूप में सामने आ रहा है। इनकम टैक्स कार्यालय के सामने बड़े-बड़े गड्ढों के पास स्थानीय लोगों ने सड़क को फूल-माला चढ़ाई, अगरबत्ती जलाई और मंत्रोच्चार के साथ सड़क को श्रद्धांजलि दी। लोगों का कहना है कि सड़क इतनी खराब हो चुकी है कि अब इसकी मरम्मत की उम्मीद छोड़कर श्रद्धांजलि देना ही बाकी रह गया है। प्रदर्शनकारियों ने जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सवाल किया कि आखिर कब तक लोगों को जान जोखिम में डालकर इन सड़कों से गुजरना पड़ेगा।
गढढों के कारण सड़क पर वाहन चलाना मुश्किल
विरोध कर रहे उमाशंकर तिवारी द्वारा बताया कि राजधानी भोपाल में अधिकांश सड़कों में गड्ढे हो चुके हैं पूरे शहर में गढढों के कारण सड़क पर वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। बरसात होने पर यह गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। बड़े छोटे गड्ढों में जब पानी भर जाता है तो वह दिखाई नहीं देते कई वाहन चालक इसमें गिर जाते हैं, घायल हो जाते हैं, हड्डी टूट जाती है। नए बने ब्रिज अंबेडकर सेतु जो कि 154 करोड़ की लागत से बना था उसमें भी गड्ढे हो गए हैं अयोध्या बाईपास पर जो कार्य चल रहे हैं उनके अगल-बगल की एवं मेट्रो के कार्य के कारण जुबली गेट से रत्नागिरी न्यू मार्केट से जवाहर चौक पुराने भोपाल की सड़कें भी गढढों के कारण जर्जर हो रही हैं। गड्ढे होने का मुख्य कारण है कहीं ना कहीं सड़क बनाने में भ्रष्टाचार है। उन्होने कहा कि पिछले 3 साल में जो भी सड़क बनी हैं इनकी जांच की जाए शहर के गड्ढों से परेशान नागरिकों द्वारा प्रदेश सरकार तक सड़कों की दुर्दशा की आवाज पहुंचाने को लेकर आज गढ्ढों को श्रद्धांजलि दी गई।
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यह भी पढ़ें-भोपाल में आज से सीलिंग का बड़ा एक्शन: 8264 नोटिस के बाद अब सीधे प्रतिष्ठान होंगे बंद,पुलिस बल के साथ कार्रवाई
5000 किमी सड़कें, आधी पर गड्ढों का दावा
राजधानी में करीब 5000 किलोमीटर लंबी सड़कों का नेटवर्क है। दावा है कि इसमें बड़ी संख्या में सड़कें बारिश के बाद गड्ढों से जर्जर हो चुकी हैं। कई जगह गड्ढों में पानी भरने के कारण उनकी गहराई दिखाई तक नहीं देती। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा लगातार बना हुआ है। करोंद में डी-मार्ट के सामने सड़क की खराब हालत के कारण बाइक सवार परिवार के गिरने की घटना भी सामने आई। विरोध के बाद वहां गिट्टी डालकर गड्ढों को भरने की कोशिश की गई, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थायी समाधान नहीं है।
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सड़क की हालत पर अनोखा विरोध, फूल चढ़ाए और अगरबत्ती जलाई
भोपाल में खराब सड़कों से परेशान लोगों का गुस्सा अब विरोध के नए रूप में सामने आ रहा है। इनकम टैक्स कार्यालय के सामने बड़े-बड़े गड्ढों के पास स्थानीय लोगों ने सड़क को फूल-माला चढ़ाई, अगरबत्ती जलाई और मंत्रोच्चार के साथ सड़क को श्रद्धांजलि दी। लोगों का कहना है कि सड़क इतनी खराब हो चुकी है कि अब इसकी मरम्मत की उम्मीद छोड़कर श्रद्धांजलि देना ही बाकी रह गया है। प्रदर्शनकारियों ने जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सवाल किया कि आखिर कब तक लोगों को जान जोखिम में डालकर इन सड़कों से गुजरना पड़ेगा।
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गढढों के कारण सड़क पर वाहन चलाना मुश्किल
विरोध कर रहे उमाशंकर तिवारी द्वारा बताया कि राजधानी भोपाल में अधिकांश सड़कों में गड्ढे हो चुके हैं पूरे शहर में गढढों के कारण सड़क पर वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। बरसात होने पर यह गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। बड़े छोटे गड्ढों में जब पानी भर जाता है तो वह दिखाई नहीं देते कई वाहन चालक इसमें गिर जाते हैं, घायल हो जाते हैं, हड्डी टूट जाती है। नए बने ब्रिज अंबेडकर सेतु जो कि 154 करोड़ की लागत से बना था उसमें भी गड्ढे हो गए हैं अयोध्या बाईपास पर जो कार्य चल रहे हैं उनके अगल-बगल की एवं मेट्रो के कार्य के कारण जुबली गेट से रत्नागिरी न्यू मार्केट से जवाहर चौक पुराने भोपाल की सड़कें भी गढढों के कारण जर्जर हो रही हैं। गड्ढे होने का मुख्य कारण है कहीं ना कहीं सड़क बनाने में भ्रष्टाचार है। उन्होने कहा कि पिछले 3 साल में जो भी सड़क बनी हैं इनकी जांच की जाए शहर के गड्ढों से परेशान नागरिकों द्वारा प्रदेश सरकार तक सड़कों की दुर्दशा की आवाज पहुंचाने को लेकर आज गढ्ढों को श्रद्धांजलि दी गई।
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5000 किमी सड़कें, आधी पर गड्ढों का दावा
राजधानी में करीब 5000 किलोमीटर लंबी सड़कों का नेटवर्क है। दावा है कि इसमें बड़ी संख्या में सड़कें बारिश के बाद गड्ढों से जर्जर हो चुकी हैं। कई जगह गड्ढों में पानी भरने के कारण उनकी गहराई दिखाई तक नहीं देती। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा लगातार बना हुआ है। करोंद में डी-मार्ट के सामने सड़क की खराब हालत के कारण बाइक सवार परिवार के गिरने की घटना भी सामने आई। विरोध के बाद वहां गिट्टी डालकर गड्ढों को भरने की कोशिश की गई, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थायी समाधान नहीं है।
