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वेटलैंड में अतिक्रमण पर NGT की दो टूक: केरवा डैम में अवैध भराव तुरंत रोकें, नहीं चलेगा निजी जमीन का बहाना

Fri, 06 Feb 2026 03:55 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Fri, 06 Feb 2026 03:55 PM IST
सार

केरवा-कालीयसोत डैम क्षेत्र में अवैध मिट्टी भराव और ठोस कचरा डंपिंग के मामले में NGT ने कड़ा आदेश दिया है। जांच में डैम के फुल टैंक लेवल और कैचमेंट क्षेत्र में अवैध भराव की पुष्टि हुई। अधिकरण ने साफ कहा कि निजी भूमि होने से पर्यावरण नियमों का उल्लंघन वैध नहीं हो जाता।

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NGT issues stern warning on encroachment in wetlands: Immediately stop illegal filling at Kerwa Dam; claiming
एनजीटी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल के केरवा-कालीयसोत डैम क्षेत्र में हो रहे अवैध मिट्टी भराव और ठोस अपशिष्ट डंपिंग पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), केंद्रीय पीठ भोपाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए अहमआदेश पारित किया है। NGT के समक्ष आई रिपोर्टों में खुलासा हुआ कि भोपाल जिले के ग्राम महुआखेड़ा स्थित केरवा डैम, जो कालीयसोत प्रणाली का अहम हिस्सा है, उसके फुल टैंक लेवल (FTL) और आसपास के क्षेत्र में 2000 से अधिक डंपरों से कोपरा, मुर्रम और काली मिट्टी डाली गई। आरोप है कि इस भराव का उद्देश्य जलाशय और कैचमेंट क्षेत्र को समतल कर भविष्य में प्लॉटिंग और निर्माण गतिविधियों का रास्ता खोलना था। अधिकरण ने इसे वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम 2017, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम 1974 का सीधा उल्लंघन माना।
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यह मामला अधिकरण ने स्वतः संज्ञान (Suo Moto) में लिया था। हालांकि अधिकरण ने स्पष्ट किया कि रशीद नूर खान इस प्रकरण के मूल शिकायतकर्ता रहे, जिन्होंने इस गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन को लगातार प्रशासन और न्यायिक मंचों पर उठाया। आवेदक पक्ष की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने प्रभावी ढंग से मामले को रखा।मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT ने जिला कलेक्टर, जल संसाधन विभाग, MPPCB, CPCB और राज्य वेटलैंड प्राधिकरण की संयुक्त समिति गठित की। समिति की स्थल जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
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समिति की स्थल जांच के तथ्य
- FTL की चिन्हांकित सीमा के भीतर भी अवैध भराव मौजूद
- करीब 10 फीट ऊंचाई तक मिट्टी और कोपरा डाला गया
- इससे डैम की भंडारण क्षमता, संरचनात्मक सुरक्षा और पारिस्थितिकी पर गंभीर खतरा
- समिति ने यह भी दर्ज किया कि भले ही कुछ भराव निजी भूमि पर किया गया हो, लेकिन उसका सीधा प्रभाव डैम और FTL क्षेत्र पर पड़ रहा है।

दलील को सिरे से खारिज कर दिया
NGT ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया कि जमीन निजी है, इसलिए कार्रवाई नहीं हो सकती। अधिकरण ने दो टूक कहा कि निजी स्वामित्व पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन को वैध नहीं बनाता। यदि किसी गतिविधि से जलाशय, कैचमेंट या FTL प्रभावित होता है, तो उस पर रोक और सुधारात्मक कार्रवाई अनिवार्य है। अधिकरण ने माना कि 33 मीटर बफर जोन का उल्लंघन हुआ है और मिट्टी व कोपरा हटाने के लिए जारी नोटिस पूरी तरह वैध हैं। NGT ने यह भी रेखांकित किया कि केरवा डैम एक वेटलैंड श्रेणी का जल निकाय है, जिसका संरक्षण अनिवार्य है। यह डैम न सिर्फ भोपाल के लिए वैकल्पिक पेयजल स्रोत है, बल्कि हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई से भी जुड़ा है। कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध भराव से डैम की आयु और क्षमता दोनों खतरे में पड़ती हैं, जो सीधे जनहित के खिलाफ है।
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ख्त निर्देश
- जल संसाधन विभाग को FTL क्षेत्र में महीने में कम से कम दो बार पेट्रोलिंग के लिए विशेष टीम बनाने के आदेश
- जिला कलेक्टर, वन विभाग और पंचायतों को कैचमेंट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, वृक्षारोपण और मृदा संरक्षण के निर्देश
- राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को दो माह में Zone of Influence की पहचान और सीमांकन पूरा करने का आदेश
- MP प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निरंतर निगरानी और त्वरित कानूनी कार्रवाई की जिम्मेदारी

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पल्ला नहीं झाड़ सकता राज्य
NGT ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए दोहराया कि स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है, और राज्य किसी भी हाल में इससे पल्ला नहीं झाड़ सकता। इन निर्देशों के साथ अधिकरण ने भले ही आवेदन का निस्तारण कर दिया हो, लेकिन साफ कर दिया कि केरवा डैम और उसके कैचमेंट क्षेत्र की सुरक्षा पर प्रशासन की जिम्मेदारी लगातार बनी रहेगी। यह आदेश प्रदेश के अन्य जलाशयों और वेटलैंड क्षेत्रों में चल रही अवैध प्लॉटिंग और मिट्टी भराव के खिलाफ एक मजबूत नजीर माना जा रहा है।


 
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