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एमपी में सख्त एक्शन का ट्रेंड: 8 कलेक्टर और 7 एसपी नपे, लापरवाह अफसर रहे सीएम के सबसे ज्यादा निशाने पर

Sat, 28 Mar 2026 01:02 PM IST
Anand Pawar Anand Pawar
Updated Sat, 28 Mar 2026 01:02 PM IST
सार

सीएम  मोहन यादव ने पिछले सवा दो साल में अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का स्पष्ट पैटर्न दिखाया है। लापरवाही, कानून-व्यवस्था में चूक और भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे ज्यादा कड़े कदम उठाए गए हैं।

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MP sees trend in action: Negligent officers are CM's top targets, prompt action against corruption
प्रदेश में सीएम का कलेक्टर और एसपी पर सख्त एक्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री मोहन यादव की सख्त प्रशासनिक शैली के चलते सवा दो साल में आठ कलेक्टर और सात एसपी को पद से हटाया। उनकी कार्रवाई का में तीन बड़े फैक्टर उभरकर सामने आए हैं। इसमें कानून-व्यवस्था में चूक, भ्रष्टाचार/रिश्वत और प्रशासनिक लापरवाही शामिल हैं। प्रशासनिक लापरवाही सीएम को बिलकुल पसंद नहीं है, इसलिए ऐसे अफसरों पर तुरंत कार्रवाई की गई। यहीं नहीं सीएम ने जनता से बदसलूकी, भ्रष्टाचार के मामले सामने आते ही तुरंत एक्शन लिया है। इसके माध्यम से सीएम ने कड़ा संदेश देने की कोशिश की हैं। 
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प्रशासनिक ढिलाई पर सख्त एक्शन के कुछ मामले
मुख्यमंत्री के एक्शन के सबसे ज्यादा मामले ऐसे रहे, जहां प्रशासनिक लापरवाही या जिम्मेदारी निभाने में ढिलाई सामने आई। हाल ही में सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी पर दफ्तर में नियमित नहीं बैठने और जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें हटा दिया गया।  वहीं, अगस्त 2024 में सागर दीवार हादसे में 9 बच्चे की मौत के बाद कलेक्टर दीपक आर्य, एसपी अभिषेक तिवारी और एसडीएम संदीप सिंह को हटाया गया। जनवरी 2026 में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी कांड में निगमायुक्त दिलीप यादव और अपर आयुक्त रोहित सोनिया को हटाया गया। दिसंबर 2023 गुना बस हादसे में 13 लोगों की मौत के बाद कलेक्टर तरुण राठी, एसपी विजय कुमार खत्री और परिवहन आयुक्त संजय कुमार झा पर कार्रवाई हुई। दिसंबर 2023 में ही हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लॉस्ट मामले में एसपी संजीव कुमार कंचन और कलेक्टर ऋषि गर्ग को हटाया गया। उक्त  मामलों से पता चलता है कि लापरवाही से जुड़ी घटनाओं और मामलों में मोहन सरकार ने सबसे अधिक कड़ा रुख अपनाया और कार्रवाई की। जिन मामलों में जनहानि हुई, उनमें तो संबंधित अधिकारियों को बिलकुल नहीं बख्शा गया। 


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हिंसा होने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर भी नपे
राज्य में जिन मामलों में कानून-व्यवस्था बिगड़ी या हिंसक घटनाएं हुईं, वहां सबसे तेज और कड़ी कार्रवाई देखने को मिली। मार्च 2025 में मऊगंज के गड़रा हत्याकांड विवाद के दौरान युवक सनी द्विवेदी की हत्या और पुलिस टीम पर हमले में एएसआई रामगोविंद गौतम की मौत के बाद कलेक्टर अजय श्रीवास्तव और एसपी रसना ठाकुर को हटा दिया गया। इसी तरह जून 2024 में सिवनी में 50 से अधिक गोवंश की हत्या के बाद तनावपूर्ण हालात बने। इसके बाद कलेक्टर क्षितिज सिंघल और एसपी राकेश कुमार सिंह पर भी कार्रवाई हुई। इससे साफ है कि जहां भी कानून व्यवस्था बिगड़ी और जनसभावनाएं प्रभावित हुई, वहां सीधे शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिरी।  

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भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की झलक दिखी
भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में भी सरकार का रुख सबसे सख्त नजर आया है, जहां सीधे अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई की गई। इसी माह गुना के हवाला रिश्वत कांड में गुजरात के व्यापारी से एक करोड़ रुपये जब्त करने के बाद 20 लाख रुपये लेकर छोड़ देने के आरोप में एसपी अंकित सोनी को हटा दिया गया। वहीं, थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मी भी सस्पेंड हुए। जनवरी 2026 अशोकनगर के आनंदपुर साहिब ट्रस्ट मामले में रिश्वत के आरोपों के चलते कलेक्टर आदित्य सिंह को पद से हटाया गया। यह कार्रवाई बिना किसी औपचारिक शिकायत के आधार पर की गई। भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार ने बिना किसी जांच के त्वरित और कड़ा फैसला लिया।

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विवादित मामलों में भी अफसरों पर गाज गिरी
प्रदेश में अधिकारियों के व्यवहार और व्यक्तिगत विवाद भी कार्रवाई के कारण बने और उन्हें पदों से हटाया गया। इससे पता चलता है कि सार्वजनिक व्यवहार और छवि भी अब प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा मानी जा रही हैं। शाजापुर कलेक्टर किशोर कान्याल को उनकाे एक बैठक में ड्राइवर से औकात पूछने वाला वीडियो वायरल होने के बाद हटाया गया।  जून 2025 कटनी एसपी अभिजीत रंजन को सीएसपी और उनके परिवार की शिकायतों के बाद पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया। भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह से हुए सार्वजनिक विवाद के बाद सितंबर 2025 में भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को हटा दिया गया।
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