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Bhopal News: हमीदिया अस्पताल में लिफ्ट संकट पर ब्रेक, 24 लिफ्ट फिर चालू, लेकिन सिस्टम की पोल खुली
Fri, 27 Mar 2026 09:28 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 27 Mar 2026 09:28 PM IST
सार
हमीदिया अस्पताल में 24 लिफ्ट ऑपरेटरों के 6 महीने से वेतन न मिलने के कारण सामूहिक इस्तीफे से लिफ्ट सिस्टम ठप हो गया था, जिससे मरीजों और स्टाफ को भारी परेशानी हुई।प्रशासन के आश्वासन और चर्चा के बाद सभी लिफ्टें दोबारा चालू कर दी गई हैं, लेकिन व्यवस्था पर गंभीर सवाल बने हुए हैं।
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हमीदिया अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हमीदिया अस्पताल में मचे लिफ्ट संकट पर फिलहाल विराम लग गया है। 24 लिफ्ट दोबारा चालू कर दी गई हैं, लेकिन यह मामला राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर गया है। प्रशासन ने बजट जारी करने का आश्वासन जरूर दिया है, पर असली समस्या अभी भी जड़ से हल नहीं हुई है।
6 महीने वेतन नहीं, ऑपरेटरों ने छोड़ा काम
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अस्पताल में काम कर रहे सभी 24 लिफ्ट ऑपरेटरों को पिछले 6 महीने से वेतन नहीं मिला। लगातार अनदेखी से नाराज ऑपरेटरों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया और लिफ्ट की चाबियां तक अपने साथ ले गए। इसके बाद 11-11 मंजिला दो बड़े भवनों में लगी लिफ्टें या तो बंद हो गईं या बिना नियंत्रण के चलने लगीं, जिससे पूरा अस्पताल तंत्र चरमरा गया।
720 करोड़ की बिल्डिंग
करीब 720 करोड़ रुपए की लागत से बने आधुनिक भवनों में यह हालात सबसे ज्यादा चौंकाने वाले रहे। यहां रोजाना करीब 2500 मरीज और उनके साथ हजारों परिजन कुल मिलाकर 7000 से ज्यादा लोग लिफ्ट सिस्टम पर निर्भर हैं।
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लिफ्ट बंद होने से इन्हें ज्यादा परेशानी
- हार्ट पेशेंट्स को स्ट्रेचर पर ऊपर ले जाना मुश्किल
- गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी
- इमरजेंसी केस प्रभावित
- डॉक्टर और स्टाफ की मूवमेंट तक बाधित
इलाज पर सीधा असर, डॉक्टर भी परेशान
डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ ने माना कि इस संकट ने इलाज की गति तक धीमी कर दी। पहले डॉक्टरों के लिए अलग लिफ्ट व्यवस्था थी, लेकिन वह भी प्रभावित हो गई। कई मामलों में मरीजों को समय पर वार्ड तक पहुंचाना चुनौती बन गया।
3.25 करोड़ अटका, पूरा सिस्टम बैठा
इस पूरे संकट की जड़ सिर्फ एक है लंबित भुगतान। लिफ्ट संचालन का ठेका निजी एजेंसी को दिया गया है। यह ठेका गांधी मेडिकल कॉलेज के जरिए PWD से दिया गया है। जानकारी के मुताबिक करीब 3.25 करोड़ रुपए का भुगतान एक साल से अटका हुआ है।भुगतान नहीं मिलने पर एजेंसी ने ऑपरेटरों का वेतन रोक दिया था।
यह भी पढ़ें-PCC चीफ का CM को अल्टीमेटम, आदेश वापस लो, वरना सड़क से सदन तक होगा बड़ा आंदोलन
प्रशासन का दावा,सब सामान्य, बजट जल्द
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ऑपरेटरों से चर्चा के बाद सभी लिफ्टें फिर चालू कर दी गई हैं और मरीजों को अब कोई परेशानी नहीं है। डीन डॉ. कविता एन सिंह के मुताबिक मामला शासन स्तर पर भेजा गया है और जल्द बजट मिलने की उम्मीद है।
यह भी पढ़ें-एमपी में खत्म होगा 24 साल पुराना दो बच्चों का नियम, तीन या अधिक संतान वालों को भी मिलेगी सरकारी नौकरी
सवाल अभी भी बाकी
- क्या सिर्फ आश्वासन से सिस्टम सुधरेगा?
- 720 करोड़ की बिल्डिंग में बेसिक सुविधा क्यों ठप हुई?
- भुगतान प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों?
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6 महीने वेतन नहीं, ऑपरेटरों ने छोड़ा काम
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अस्पताल में काम कर रहे सभी 24 लिफ्ट ऑपरेटरों को पिछले 6 महीने से वेतन नहीं मिला। लगातार अनदेखी से नाराज ऑपरेटरों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया और लिफ्ट की चाबियां तक अपने साथ ले गए। इसके बाद 11-11 मंजिला दो बड़े भवनों में लगी लिफ्टें या तो बंद हो गईं या बिना नियंत्रण के चलने लगीं, जिससे पूरा अस्पताल तंत्र चरमरा गया।
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720 करोड़ की बिल्डिंग
करीब 720 करोड़ रुपए की लागत से बने आधुनिक भवनों में यह हालात सबसे ज्यादा चौंकाने वाले रहे। यहां रोजाना करीब 2500 मरीज और उनके साथ हजारों परिजन कुल मिलाकर 7000 से ज्यादा लोग लिफ्ट सिस्टम पर निर्भर हैं।
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लिफ्ट बंद होने से इन्हें ज्यादा परेशानी
- हार्ट पेशेंट्स को स्ट्रेचर पर ऊपर ले जाना मुश्किल
- गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी
- इमरजेंसी केस प्रभावित
- डॉक्टर और स्टाफ की मूवमेंट तक बाधित
इलाज पर सीधा असर, डॉक्टर भी परेशान
डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ ने माना कि इस संकट ने इलाज की गति तक धीमी कर दी। पहले डॉक्टरों के लिए अलग लिफ्ट व्यवस्था थी, लेकिन वह भी प्रभावित हो गई। कई मामलों में मरीजों को समय पर वार्ड तक पहुंचाना चुनौती बन गया।
3.25 करोड़ अटका, पूरा सिस्टम बैठा
इस पूरे संकट की जड़ सिर्फ एक है लंबित भुगतान। लिफ्ट संचालन का ठेका निजी एजेंसी को दिया गया है। यह ठेका गांधी मेडिकल कॉलेज के जरिए PWD से दिया गया है। जानकारी के मुताबिक करीब 3.25 करोड़ रुपए का भुगतान एक साल से अटका हुआ है।भुगतान नहीं मिलने पर एजेंसी ने ऑपरेटरों का वेतन रोक दिया था।
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प्रशासन का दावा,सब सामान्य, बजट जल्द
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ऑपरेटरों से चर्चा के बाद सभी लिफ्टें फिर चालू कर दी गई हैं और मरीजों को अब कोई परेशानी नहीं है। डीन डॉ. कविता एन सिंह के मुताबिक मामला शासन स्तर पर भेजा गया है और जल्द बजट मिलने की उम्मीद है।
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सवाल अभी भी बाकी
- क्या सिर्फ आश्वासन से सिस्टम सुधरेगा?
- 720 करोड़ की बिल्डिंग में बेसिक सुविधा क्यों ठप हुई?
- भुगतान प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों?
