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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   MP Politics: Politics 'loud' on loudspeaker, opposition said - ill will will run in the state, not government.

MP Politics: लाउड स्पीकर पर सियासत 'लाउड', विपक्ष बोला- प्रदेश में सरकार नहीं दुर्भावना चलेगी

Thu, 14 Dec 2023 04:21 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 14 Dec 2023 04:21 PM IST
सार

लाउडस्पीकर और मांस की बिक्री की दुकानों को लेकर आए आदेश पर राजनीति में पारा हाई है। प्रदेश में इस मुद्दे पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। इस पर नेताओं की बयानबाजी भी शुरू हो गई है। 

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MP Politics: Politics 'loud' on loudspeaker, opposition said - ill will will run in the state, not government.
लाउडस्पीकर को लेकर एक बार फिर से सियासी हलचल तेज हो गई है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धार्मिक स्थलों पर बजने वाले लाउडस्पीकर और खुले में बिकने वाले मांस की दुकान को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीति गरमा गई है। दरअसल, प्रदेश के नए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी पहली ही कैबिनेट में धार्मिक स्थलों पर अनियंत्रित आवाज में बजने वाले लाउडस्पीकर और खुले में बिक रहे मांस को लेकर निर्देश दिए हैं। उन्होंने लाउडस्पीकर के मामले सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन न करने पर सख्त एक्शन लिए जाने की बात कही है। इसके साथ ही खुले में मांस की बिक्री करने पर भी कार्रवाई की जाएगी। सीएम के इस फरमान के बाद से ही सियासत तेज हो गई है। जहां सत्ता पक्ष ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है तो वहीं विपक्ष ने इस भ्रम फैलाने की राजनीति बताया है। इसको लेकर कई बयान सामने आए हैं।
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मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के फैसले का भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने समर्थन किया है। उन्होंने गुरुवार को पत्रकारों से चर्चा में कहा कि मंदिर के आसपास मांस की दुकान नहीं लगाने देने का फैसला सरकार का स्वागत योग्य कदम है। पहले भी इस पर कार्रवाई हुई है। अब आगे और सख्ती से एक्शन होगा। वहीं लाउडस्पीकर मामले में शर्मा ने कहा कि अब किसी की हिम्मत हो तो बजाकर दिखाएं। यहां कानून का राज है। आए दिन देखने में मिल रहा है कि जमाती बाहर निकलकर सड़कों पर हिटलर शाही करते थे। कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट से ऊपर है क्या। सरकार क्या कांग्रेस पूछकर निर्णय लेगी। 
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कांग्रेस विरोध में
इस मामले में पूर्व मंत्री और विधायक उमंग सिंघार ने कहा कि यह सीएम का फैसला नहीं है। यह आरएसएस का फैसला है। सबसे पहले तो महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं से जो शुल्क लिया जाता है वो नहीं लेना चाहिए। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने कहा कि यह फैसला यदि प्रदूषण कम करने के लिए हुआ है तो इसका स्वागत है लेकिन किसी गलत धारणा से किया गया है तो यह गलत है। खुले में मांस बेचने पर प्रतिबंध के फैसले को बरैया ने गलत बताते हुए कहा कि जो छोटे दुकानदार हैं और खुले में मांस बेच रहे हैं सरकार को उन्हें दुकान देनी चाहिए। इसी मामले में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि यह आदेश कोई नया नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की पहले से गाइडलाइन है। सीएम ने अगर किसानों को लेकर महंगाई को लेकर कोई आदेश दिया होता तो हम स्वागत करते, लेकिन उन्होंने अपने आदेश से यह साबित कर दिया है कि प्रदेश में सरकार नहीं दुर्भावना चलेगी। ये केवल भ्रम फैलने का काम किया जा रहा है। 
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संस्कृति बचाओ मंच ने किया स्वागत
इधर, संस्कृति बचाओ मंच ने भी इस आदेश का स्वागत किया है। मंच के अध्यक्ष चंद्र शेखर तिवारी ने कहा है कि मंदिरों से ध्वनि प्रदूषण नहीं होता हम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए भजन बजाते हैं। हिंदू मान्यता और धर्म शास्त्रों के अनुसार घंटा-घड़ियाल की ध्वनि से क्षेत्र प्रदूषण नहीं होता, जबकि प्रदूषण मुक्त होता है। बुरी आत्माएं, बला इत्यादि मुक्ति को प्राप्त कर लेती हैं और मंदिरों में प्रातः 5:00 बजे से धोनी विस्तार यंत्रों का उपयोग नहीं किया जाता जबकि अन्य धर्म स्थलों पर प्रातः 5:00 बजे से ध्वनि विस्तार यंत्रों का उपयोग करके ध्वनि प्रदूषण फैलाया जाता है। मंदिरों में भी 6 समय आरती की जाती है, लेकिन हम प्रातः 5:00 बजे की आरती में माइक का उपयोग नहीं करते। सिर्फ प्रातः 8:00 बजे और रात्रि 8:00 बजे दो आरतियों में माइक का उपयोग करते हैं। रात्रि 10:00 बजे शयन आरती में भी इसका उपयोग नहीं किया जाता। इस प्रकार से जो नियम की धज्जियां उड़ाए उन धर्मस्थलों से माइक उतरवा देना चाहिए। 
 
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