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MP Politics: चार बार विधायक रहे रसाल सिंह ने छोड़ी बसपा, छह महीने पहले टिकट ना मिलने पर छोड़ी थी भाजपा
Fri, 26 Apr 2024 10:29 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भोपाल
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 26 Apr 2024 10:29 PM IST
सार
चार बार के विधायक और भिंड के बड़े नेता रसाल सिंह ने मात्र छह महीने में ही बसपा को अलविदा कह दिया, उन्होंने एक सादे कागज पर बसपा भिंड जिला अध्यक्ष के नाम इस्तीफा लिखा और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।
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रसाल सिंह ने बसपा को अलविदा कह दिया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर भिंड जिले की रौन विधानसभा से चार बार भाजपा के टिकट पर विधायक रहे रसाल सिंह ने बसपा जॉइन कर ली थी, लेकिन छह महीने में उनका मोह भंग हो गया और उन्होंने शुक्रवार को बहुजन समाज पार्टी से त्यागपत्र दे दिया। कयास लगाए जा रहे हैं कि रसाल सिंह जल्दी ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
नेताओं का दलबदल का सिलसिला पिछले कुछ महीनों में मध्य प्रदेश में दिखाई दे रहा है, पार्टियों में भगदड़ मची हुई है। विधानसभा चुनावों से पहले शुरू हुआ ये सिलसिला लोकसभा चुनावों तक जारी है। लेकिन अब जब उम्मीद पूरी नहीं हो रही तो कुछ नेताओं का नई पार्टियों से मोहभंग हो रहा है। ऐसा ही भिंड जिले के पूर्व विधायक के साथ देखने को मिला है। चार बार विधायक रहे रसाल सिंह को विधानसभा चुनावों में टिकट नहीं मिला था तो वे नाराज हो गए थे और उन्होंने भाजपा से इस्तीफा देकर बहुजन समाज पार्टी ज्वाइन कर ली थी उनके साथ उनके सैकड़ों समर्थक भी बीएसपी में चले गए लेकिन अब रसाल सिंह का बसपा से मोहभंग हो गया है।
रसाल सिंह ने मात्र छह महीने में ही बसपा को अलविदा कह दिया, उन्होंने एक सादे कागज पर बसपा भिंड जिला अध्यक्ष के नाम इस्तीफा लिखा और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। इस्तीफे में रसाल सिंह ने लिखा कि वे व्यक्तिगत कारणों से पार्टी में सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं, स्वीकार किया जाए।
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यह भी खबर है कि रसाल सिंह के इस्तीफे की स्क्रिप्ट कल पीएम मोदी के मुरैना दौरे के बाद लिखी गई है। चर्चा है कि भिंड लोकसभा सीट पर भाजपा की स्थिति उतनी अच्छी नहीं हैं जितनी दिखाई जा रही है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसे समझ रहा है और पार्टी छोड़कर गए नेताओं की वापसी पर जोर दे रहा है। रसाल सिंह भी पार्टी के सीनियर नेता रहे हैं, वे चार बार विधायक रहे, दो बार चुनाव हारे यानी उन्हें लम्बा राजनीतिक अनुभव है। उनके क्षेत्र में उनका प्रभाव भी है।
भाजपा में वापसी की चर्चा
माना जा रहा है कि भाजपा के कहने पर ही रसाल सिंह ने बसपा से इस्तीफा दिया है, उनके करीबियों की मानें तो उन्होंने व्यक्तिगत कारणों के चलते बीएसपी छोड़ी है अब वे भाजपा में वापसी करेंगे या फिर कोई दूसरी पार्टी ज्वाइन करेंगे ये एक दो दिन में पता चल जाएगा। बहरहाल रसाल सिंह के लोकसभा चुनाव के बीच बीएसपी छोड़ने से पार्टी को झटका जरूर लगा है।
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नेताओं का दलबदल का सिलसिला पिछले कुछ महीनों में मध्य प्रदेश में दिखाई दे रहा है, पार्टियों में भगदड़ मची हुई है। विधानसभा चुनावों से पहले शुरू हुआ ये सिलसिला लोकसभा चुनावों तक जारी है। लेकिन अब जब उम्मीद पूरी नहीं हो रही तो कुछ नेताओं का नई पार्टियों से मोहभंग हो रहा है। ऐसा ही भिंड जिले के पूर्व विधायक के साथ देखने को मिला है। चार बार विधायक रहे रसाल सिंह को विधानसभा चुनावों में टिकट नहीं मिला था तो वे नाराज हो गए थे और उन्होंने भाजपा से इस्तीफा देकर बहुजन समाज पार्टी ज्वाइन कर ली थी उनके साथ उनके सैकड़ों समर्थक भी बीएसपी में चले गए लेकिन अब रसाल सिंह का बसपा से मोहभंग हो गया है।
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रसाल सिंह ने मात्र छह महीने में ही बसपा को अलविदा कह दिया, उन्होंने एक सादे कागज पर बसपा भिंड जिला अध्यक्ष के नाम इस्तीफा लिखा और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। इस्तीफे में रसाल सिंह ने लिखा कि वे व्यक्तिगत कारणों से पार्टी में सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं, स्वीकार किया जाए।
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यह भी खबर है कि रसाल सिंह के इस्तीफे की स्क्रिप्ट कल पीएम मोदी के मुरैना दौरे के बाद लिखी गई है। चर्चा है कि भिंड लोकसभा सीट पर भाजपा की स्थिति उतनी अच्छी नहीं हैं जितनी दिखाई जा रही है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसे समझ रहा है और पार्टी छोड़कर गए नेताओं की वापसी पर जोर दे रहा है। रसाल सिंह भी पार्टी के सीनियर नेता रहे हैं, वे चार बार विधायक रहे, दो बार चुनाव हारे यानी उन्हें लम्बा राजनीतिक अनुभव है। उनके क्षेत्र में उनका प्रभाव भी है।
भाजपा में वापसी की चर्चा
माना जा रहा है कि भाजपा के कहने पर ही रसाल सिंह ने बसपा से इस्तीफा दिया है, उनके करीबियों की मानें तो उन्होंने व्यक्तिगत कारणों के चलते बीएसपी छोड़ी है अब वे भाजपा में वापसी करेंगे या फिर कोई दूसरी पार्टी ज्वाइन करेंगे ये एक दो दिन में पता चल जाएगा। बहरहाल रसाल सिंह के लोकसभा चुनाव के बीच बीएसपी छोड़ने से पार्टी को झटका जरूर लगा है।
