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एमपी: पन्ना जल संसाधन विभाग के कार्यपाल यंत्री बोले-रिश्वत मांगता नहीं हूं, कोई खुशी से दे तो मना भी नहीं करता
Fri, 30 Oct 2026 04:20 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 30 Oct 2026 04:20 PM IST
सार
पन्ना में जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों के 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद कार्यपालन यंत्री एबी अहिरवार का वीडियो वायरल हो गया है। इसमें वे कहते सुनाई दे रहे हैं कि रिश्वत मांगते नहीं हैं, लेकिन कोई खुशी से दे तो लेने से इनकार भी नहीं करते।
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पन्ना जल संसाधन विभाग के इंजीनियर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश के पन्ना में रिश्वतखोरी के मामले के बीच जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री एबी अहिरवार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में अधिकारी रिश्वत लेने को लेकर ऐसी बात कहते नजर आ रहे हैं, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी किसी से रिश्वत नहीं मांगी, लेकिन कोई अपनी मर्जी से पैसे देता है तो वे उसे लेने से इनकार भी नहीं करते।
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दरअसल, एक दिन पहले ही सागर लोकायुक्त पुलिस ने पन्ना जिले में जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों को 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। इस कार्रवाई के अगले दिन कार्यपालन यंत्री अहिरवार का मीडिया से बातचीत का वीडियो सामने आया। इसमें वे कहते हैं कि उन्होंने अपनी पूरी नौकरी के दौरान कभी किसी से रिश्वत की मांग नहीं की, लेकिन किसी ने भुगतान के बदले अपनी खुशी से पैसे दिए तो उन्होंने मना नहीं किया।
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अधिकारी ने ठेकेदार की ओर से पैसे देने को उसकी अच्छी पहल बताते हुए कहा कि यह ठेकेदार का सद्भाव है। उन्होंने शिकायतकर्ता गौरव तोमर का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि उसने दोनों कर्मचारियों के रिश्वत मांगने की शिकायत उनसे नहीं की थी। यदि शिकायत की जाती तो वे इस मामले में कार्रवाई करते। कार्यपालन यंत्री के इस बयान के बाद रिश्वत लेने और देने को लेकर उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि विभाग के दो कर्मचारियों के लोकायुक्त की गिरफ्त में आने के तुरंत बाद उनका यह बयान सामने आया है।
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दरअसल, एक दिन पहले ही सागर लोकायुक्त पुलिस ने पन्ना जिले में जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों को 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। इस कार्रवाई के अगले दिन कार्यपालन यंत्री अहिरवार का मीडिया से बातचीत का वीडियो सामने आया। इसमें वे कहते हैं कि उन्होंने अपनी पूरी नौकरी के दौरान कभी किसी से रिश्वत की मांग नहीं की, लेकिन किसी ने भुगतान के बदले अपनी खुशी से पैसे दिए तो उन्होंने मना नहीं किया।
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अधिकारी ने ठेकेदार की ओर से पैसे देने को उसकी अच्छी पहल बताते हुए कहा कि यह ठेकेदार का सद्भाव है। उन्होंने शिकायतकर्ता गौरव तोमर का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि उसने दोनों कर्मचारियों के रिश्वत मांगने की शिकायत उनसे नहीं की थी। यदि शिकायत की जाती तो वे इस मामले में कार्रवाई करते। कार्यपालन यंत्री के इस बयान के बाद रिश्वत लेने और देने को लेकर उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि विभाग के दो कर्मचारियों के लोकायुक्त की गिरफ्त में आने के तुरंत बाद उनका यह बयान सामने आया है।
